आदिवासी सीटों को जीतने राहुल का मिशन 76, विक्रांत भूरिया को एमपी-छत्तीसगढ़ की कमान

Arun Tiwari | Sept 10, 2026, 14:13 IST
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राहुल का मिशन 76
राहुल का मिशन 76

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की 76 ST आरक्षित विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने 2028 चुनाव के लिए फोकस बढ़ा दिया है। राहुल गांधी ने आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया को दोनों राज्यों की आदिवासी सीटों की जिम्मेदारी दी है।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सत्ता का ताला खोलने के लिए आदिवासी चाबी बहुत जरुरी है। इन दोनों राज्यों में दोबारा सरकार बनाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मिशन 76 शुरु किया है। मिशन 76 यानी फोकस में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की आदिवासी सीटें जो एसटी के लिए आरक्षित हैं।

इन दोनों राज्यों का जिम्मा राहुल गांधी ने आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्यप्रदेश से विधायक विक्रांत भूरिया को सौंपा है। विक्रांत ने इन दोनों राज्यों में दौरे शुरु कर दिए हैं। एमपी और छत्तीसगढ़ में एक बात बहुत खास है कि जिसके पास आदिवासी सीटें गई हैं सरकार उसी की बनी है।

बात 2018 की हो या 2023 के विधानसभा चुनाव की या फिर आने वाले 2028 के चुनाव की। आदिवासियों को साधना मजबूरी भी है और जरुरी भी। इसीलिए राहुल गांधी ने ढाई साल पहले से इनकी तैयारी शुरु कर दी है।

आदिवासी सीटों का गणित :

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी वोट 2028 के विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर बन सकता है। दोनों राज्यों में कुल 76 विधानसभा सीटें ST के लिए आरक्षित हैं। मध्य प्रदेश में 47 और छत्तीसगढ़ में 29 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। हालांकि आदिवासियों का असर 100 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर है।

इन आदिवासी सीटों को जीतने के लिए ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मिशन 76 शुरु किया है। विक्रांत भूरिया को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की 76 आदिवासी सीटों का जिम्मा सौंपा है। भूरिया आदिवासी इलाकों में जल जंगल जमीन के मुद्दे पर बड़े आंदोलन का खाका खींच रहे हैं। इन आंदोलनों में राहुल गांधी भी शामिल होंगे।

पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि आदिवासी राजनीति में पांच साल के भीतर कितना बड़ा बदलाव आ सकता है। 2018 में जहां कांग्रेस ने दोनों राज्यों के आदिवासी इलाकों में बड़ी बढ़त बनाई थी और सत्ता हासिल की। वहीं 2023 में BJP ने दोनों राज्यों में इस बढ़त को काफी हद तक पलट दिया। और दोनों राज्यों में बड़े बहुमत से बीजेपी की सरकार बनी।

मध्यप्रदेश में 2018: कांग्रेस का दबदबा

मध्यप्रदेश की 47 ST आरक्षित सीटों में 2018 में कांग्रेस ने 30 सीटें जीती थीं। BJP के खाते में 16 सीटें आईं, जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। यानी कांग्रेस ने बीजेपी से करीब 14 सीटों की बढ़त बनाई थी। यही वह आदिवासी समर्थन था जिसने 2018 में कांग्रेस को 15 साल बाद सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ये अलग बात है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार डेढ़ साल बाद ही गिर गई और फिर बीजेपी की सरकार बनी।

मध्यप्रदेश में 2023: BJP ने पलटा पासा :

2023 में तस्वीर बदल गई। 47 ST सीटों में BJP ने 24 सीटें जीतीं, कांग्रेस को 22 मिलीं और सैलाना सीट भारत आदिवासी पार्टी (BAP)के खाते में गई। यानी पांच साल में कांग्रेस की ST सीटें 30 से घटकर 22 रह गईं, जबकि BJP 16 से बढ़कर 24 पर पहुंच गई।

सीटों का बदलाव:

  • एमपी की कुल आदिवासी सीटें 47
  • साल 2018 : कांग्रेस 30, बीजेपी 16
  • साल 2023 : कांग्रेस 22, बीजेपी 24
  • बदलाव : कांग्रेस को 8 सीटों का नुकसान,बीजेपी को 8 सीटों का फायदा
यह बदलाव 2028 के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत है। कांग्रेस अगर 2018 का प्रदर्शन दोहराना चाहती है तो उसे 2023 में गंवाई गई कम से कम 8 ST सीटों पर वापसी करनी होगी।

राहुल का मिशन 76
राहुल का मिशन 76


छत्तीसगढ़: 2018 में कांग्रेस की बड़ी जीत

90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में 29 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं। 2018 में कांग्रेस ने इनमें से 25 सीटें जीतकर आदिवासी इलाकों में लगभग क्लीन स्वीप जैसा प्रदर्शन किया था। BJP को सिर्फ 3 सीटें मिलीं, जबकि JCC-J ने एक सीट जीती। यह प्रदर्शन कांग्रेस की 2018 की 68 सीटों वाली बड़ी जीत का बड़ा आधार बना। यहां भी कांग्रेस ने 15 साल बाद सत्ता का स्वाद चखा। भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बनें और सरकार पांच साल तक चली।

छत्तीसगढ़ : 2023 में BJP की बड़ी वापसी

2023 में BJP ने आदिवासी सीटों पर जबरदस्त वापसी की। 29 ST सीटों में BJP ने 17 सीटें जीतीं, कांग्रेस 11 पर रह गई और GGP ने एक सीट जीती। यानी पांच साल में BJP की ST सीटें 3 से बढ़कर 17 हो गईं यानी 14 सीटों का उछाल। वहीं कांग्रेस की सीटें 25 से घटकर 11 हो गईं यानी 14 सीटों का नुकसान। आदिवासियों ने बीजेपी का साथ दिया तो विष्णुदेव साय सरकार सत्ता में आ गई।

सीटों का बदलाव :

  • छत्तीसगढ़ में कुल आदिवासी सीटें 29
  • साल 2018 : कांग्रेस 25, बीजेपी 3
  • साल 2023 : कांग्रेस 11, बीजेपी 17
बदलाव: कांग्रेस को 14 सीटों का नुकसान, बीजेपी को 14 सीटों का फायदा। यानी दोनों राज्यों में यही ट्रेंड रहा है। 2018 से 2023 के बीच आदिवासी सीटों का झुकाव कांग्रेस से BJP की ओर गया जिससे उसकी सरकार बनी।

2028 में BJP के सामने अपनी बढ़त बचाने की चुनौती :

BJP के लिए 2028 का चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी ने 2023 में आदिवासी क्षेत्रों में जो बढ़त बनाई, उसे अब स्थायी राजनीतिक आधार में बदलना होगा।

एमपी में बीजेपी को 47 में से 24 ST सीटें मिली थीं। कांग्रेस सिर्फ दो सीट पीछे थी। यानी यहां मुकाबला अभी भी कांटे का है।
छत्तीसगढ़ में BJP की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखती है। 29 में से 17 ST सीटें उसके पास हैं। लेकिन 2018 का अनुभव बताता है कि यहां आदिवासी वोट का झुकाव तेजी से बदल सकता है।

कांग्रेस के सामने दो राज्यों में दो अलग चुनौतियां :

एमपी में कांग्रेस को 8 सीटें वापस चाहिए। कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश में चुनौती अपेक्षाकृत सीधी है। उसे 2018 की 30 ST सीटों वाली स्थिति के करीब पहुंचने के लिए 2023 में गंवाई गई सीटों को वापस जीतना होगा। झाबुआ-अलीराजपुर, धार-बड़वानी, मंडला-डिंडौरी और महाकौशल इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र होंगे।

छत्तीसगढ़ में चुनौती कहीं बड़ी है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सामने तस्वीर ज्यादा कठिन है। 2018 में 25 ST सीटें जीतने वाली कांग्रेस 2023 में सिर्फ 11 पर रह गई। इसलिए 2028 में कांग्रेस को केवल BJP से कुछ सीटें छीननी नहीं हैं, बल्कि पूरे आदिवासी बेल्ट में अपना भरोसा फिर से कायम करना है।

छत्तीसगढ़ में आदिवासी राजनीति को मुख्य रूप से दो हिस्सों में देखा जा सकता है उत्तर का सरगुजा और दक्षिण का बस्तर। 2018 में कांग्रेस ने दोनों क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया था। 2023 में बीजेपी ने खासकर सरगुजा में मजबूत वापसी की। इसलिए 2028 में कांग्रेस की कोशिश होगी कि वह सरगुजा में खोई जमीन वापस ले और बस्तर में अपना आधार बचाए।

2028 का असली सवाल :

अब दोनों राज्यों में कहानी सिर्फ BJP बनाम कांग्रेस की नहीं है। 2018 से 2023 के बीच आदिवासी वोट का जो बड़ा राजनीतिक शिफ्ट हुआ, क्या 2028 में वह कायम रहेगा।

अगर बीजेपी 2023 की बढ़त बरकरार रखती है तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों में उसका सत्ता समीकरण मजबूत रहेगा। लेकिन अगर कांग्रेस आदिवासी इलाकों में 2018 वाला भरोसा वापस हासिल करने में सफल होती है, तो दोनों राज्यों में BJP के लिए बड़ा नुकसान हो सकता है। और एमपी में बाप जैसी तीसरी ताकत और छत्तीसगढ़ में स्थानीय आदिवासी प्रभाव कुछ सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं। सवाल यही है कि 2018 में कांग्रेस का आदिवासी गढ़, 2023 में BJP की सेंध अब 2028 में किसके साथ जाएगा 76 सीटों का यह सियासी ब्लॉक।

क्या कहते हैं आदिवासी नेता :

विक्रांत भूरिया कहते हैं कि यह सही है आदिवासी वर्ग जिस तरफ जाता है सरकार उसी की बनती है। कांग्रेस आदिवासियों के मुद्दों को उठाएगी। उनके जल,जंगल,जमीन के मुद्दे सुलग रहे हैं। बीजेपी सरकार उनकी जमीन को उद्योगपतियों को सौंप रही है। मध्यप्रदेश हो या छत्तीसगढ़ बीजेपी ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा है।

कांग्रेस उनके मुद्दे उठाएगी और आंदोलन करेगी। इन आंदोलनों में राहुल गांधी भी शामिल होंगे। वहीं बीजेपी के आदिवासी विधायक चैतराम अटामी कहते हैं कि कांग्रेस सिर्फ झूठी बयानबाजी करती है। उसे आदिवासियों से कोई मतलब नहीं है। चुनाव आते हैं तो आदिवासियों की याद आने लगती है। आदिवासी अब उनके झांसे में आने वाले नहीं हैं।

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