महंगी बिजली के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, कल प्रदेशव्यापी घेराव
Aishwarya Dwivedi | Jun 16, 2026, 20:03 IST
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छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2026 से बिजली दरें औसतन 6.23% बढ़ेंगी। इसके विरोध में कांग्रेस ने 17 और 18 जून को प्रदेशव्यापी उग्र घेराव और आंदोलन का ऐलान किया है।
छत्तीसगढ़ में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए घोषित नई बिजली दरों को लेकर सियासत पूरी तरह गरमा गई है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) द्वारा बिजली दामों में की गई वृद्धि के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने बढ़ी हुई दरों को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए 17 और 18 जून को दो दिवसीय प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देशानुसार, 17 जून को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में बिजली कार्यालयों का उग्र घेराव किया जाएगा। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता सड़कों पर उतरकर मुख्यमंत्री का पुतला दहन करेंगे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके अगले दिन, 18 जून को जिला स्तर पर वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें पार्टी इस बिजली दर वृद्धि के खिलाफ अपना पक्ष जनता के सामने रखेगी।
इस आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए कांग्रेस ने जिला, शहर और ब्लॉक कमेटियों के पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, मोर्चा संगठनों और सभी जनप्रतिनिधियों को सक्रिय रूप से शामिल होने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं और किसानों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।
नियामक आयोग ने बिजली कंपनी द्वारा प्रस्तावित 24 प्रतिशत की भारी-भरकम वृद्धि को सिरे से खारिज करते हुए औसतन 6.23 प्रतिशत (लगभग 40 से 42 पैसे प्रति यूनिट) की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह नई दरें 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएंगी।
![छत्तीसगढ़ महंगी बिजली]()
घरेलू उपभोक्ता: निचले स्लैब में 30 पैसे और ऊपरी स्लैब में 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है।
कमर्शियल (व्यावसायिक) यूजर: व्यापारियों के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा किया गया है।
कृषि पंप: किसानों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि, गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंपों के ऊर्जा प्रभार में मिलने वाली छूट को 30% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है।
EV चार्जिंग स्टेशन: पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए हाई वोल्टेज ईवी चार्जिंग के लिए टैरिफ 6.42 रुपए प्रति kVAh तय किया गया है।
आयोग का तर्क: बिजली वितरण कंपनी को 1 यूनिट बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में औसतन 7.13 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि वर्तमान दरों से उसे केवल 6.71 रुपए की आय हो रही थी। इस 42 पैसे के घाटे को पाटने के लिए यह आंशिक बढ़ोतरी जरूरी थी।
CSERC के सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला के अनुसार, इस बढ़ोतरी का आम जनता और कम आय वर्ग पर असर बेहद सीमित रहेगा। इसके पीछे निम्नलिखित राहतें और योजनाएं हैं:
बिजली बिल हाफ योजना : राज्य में 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की छूट मिलती रहेगी। प्रदेश के 70 से 75% घरेलू उपभोक्ता इसी श्रेणी में आते हैं। 'मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना' के कारण निम्न और मध्यम वर्ग पर वास्तविक नया बोझ सिर्फ 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट ही पड़ेगा।
रूफटॉप सोलर का विकल्प : जिन उपभोक्ताओं की खपत 400 यूनिट से अधिक है, वे 'पीएम सूर्यघर योजना' के तहत सोलर पैनल लगाकर अपनी ग्रिड निर्भरता कम कर सकते हैं।
आदिवासी क्षेत्रों और छात्रों को रियायत : बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों के हॉस्टलों (छात्रावासों) को अब कमर्शियल के बजाय घरेलू श्रेणी में रखा जाएगा, जिससे उनका बिल काफी कम हो जाएगा।
सरल नियम और अतिरिक्त छूट : लेट पेमेंट सरचार्ज अब पूरे महीने के बजाय सिर्फ वास्तविक देरी के दिनों के आधार पर लगेगा। साथ ही, 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक (कम लोड वाले) समय में बिजली इस्तेमाल करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की अतिरिक्त छूट मिलेगी।
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कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन और रणनीति
इस आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए कांग्रेस ने जिला, शहर और ब्लॉक कमेटियों के पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, मोर्चा संगठनों और सभी जनप्रतिनिधियों को सक्रिय रूप से शामिल होने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं और किसानों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।
क्या हैं नई बिजली दरें और क्यों बढ़ीं कीमतें?
छत्तीसगढ़ महंगी बिजली
टैरिफ में बदलाव की मुख्य बातें
कमर्शियल (व्यावसायिक) यूजर: व्यापारियों के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा किया गया है।
कृषि पंप: किसानों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि, गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंपों के ऊर्जा प्रभार में मिलने वाली छूट को 30% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है।
EV चार्जिंग स्टेशन: पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए हाई वोल्टेज ईवी चार्जिंग के लिए टैरिफ 6.42 रुपए प्रति kVAh तय किया गया है।
आयोग का तर्क: बिजली वितरण कंपनी को 1 यूनिट बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में औसतन 7.13 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि वर्तमान दरों से उसे केवल 6.71 रुपए की आय हो रही थी। इस 42 पैसे के घाटे को पाटने के लिए यह आंशिक बढ़ोतरी जरूरी थी।
आम जनता और किसानों पर कितना होगा असर?
बिजली बिल हाफ योजना : राज्य में 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की छूट मिलती रहेगी। प्रदेश के 70 से 75% घरेलू उपभोक्ता इसी श्रेणी में आते हैं। 'मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना' के कारण निम्न और मध्यम वर्ग पर वास्तविक नया बोझ सिर्फ 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट ही पड़ेगा।
रूफटॉप सोलर का विकल्प : जिन उपभोक्ताओं की खपत 400 यूनिट से अधिक है, वे 'पीएम सूर्यघर योजना' के तहत सोलर पैनल लगाकर अपनी ग्रिड निर्भरता कम कर सकते हैं।
आदिवासी क्षेत्रों और छात्रों को रियायत : बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों के हॉस्टलों (छात्रावासों) को अब कमर्शियल के बजाय घरेलू श्रेणी में रखा जाएगा, जिससे उनका बिल काफी कम हो जाएगा।
सरल नियम और अतिरिक्त छूट : लेट पेमेंट सरचार्ज अब पूरे महीने के बजाय सिर्फ वास्तविक देरी के दिनों के आधार पर लगेगा। साथ ही, 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक (कम लोड वाले) समय में बिजली इस्तेमाल करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की अतिरिक्त छूट मिलेगी।
FAQ
- प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरें कब से लागू हो रही हैं?
उत्तर: 1 जुलाई 2026 से। - छत्तीसगढ़ में बिजली दरों की समीक्षा और निर्धारण करने वाली संस्था का नाम क्या है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC - Chhattisgarh State Electricity Regulatory Commission)। - 'बिजली बिल हाफ योजना' (मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना) के तहत उपभोक्ताओं को क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: इस योजना के तहत राज्य में 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक के बिजली बिल में छूट मिलती है।
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