उपभोक्ता फोरम की साख पर सवाल ; सालों चली कानूनी लड़ाई, जीत के बाद भी खाली हाथ खड़े हैं पीड़ित
Aishwarya Dwivedi | Apr 25, 2026, 17:40 IST
Aishwarya (55)
छत्तीसगढ़ में उपभोक्ता फोरम के आदेश के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल रही। हजारों मामलों में भुगतान लंबित है, जिससे उपभोक्ता दोबारा कानूनी प्रक्रिया में उलझ रहे हैं।
NEWS IN SHORT
- आदेश के बाद भी उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल पा रही
- हजारों मामलों में भुगतान लंबित, लोग दोबारा फोरम पहुंच रहे
- नियम 90 दिन, लेकिन केस 10 साल तक लंबित रहते
- दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर में सबसे ज्यादा निष्पादन मामले लंबित
- कानून में सजा प्रावधान, फिर भी आदेश पालन में ढिलाई
NEWS IN DETAIL
चौंकाने वाली बात यह है कि फोरम का आदेश आने के बाद भी कंपनियां, बिल्डर और बीमा एजेंसियां इसे गंभीरता से नहीं ले रही हैं, जिसके कारण प्रदेश में हजारों उपभोक्ता अपनी ही जीती हुई राशि पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
फैसला तो हुआ, पर भुगतान नहीं
आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में लगभग 2,235 मामले ऐसे लंबित हैं, जिनमें कोर्ट ने फैसला सुना दिया है, लेकिन अब तक उन आदेशों का पालन नहीं हुआ है। उपभोक्ता अब 'निष्पादन आवेदन' (Execution Application) लगाकर कोर्ट से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें उनका हक दिलाया जाए।
दुर्ग और रायपुर में सबसे बुरा हाल
दुर्ग: यहाँ सबसे ज्यादा 1106 मामले ऐसे हैं जिनमें आदेश के बाद भी राहत नहीं मिली।
रायपुर: राजधानी होने के बावजूद यहाँ 331 मामले निष्पादन की बाट जोह रहे हैं।
बिलासपुर: न्यायधानी में भी 206 उपभोक्ताओं को आदेश के बाद भी भटकना पड़ रहा है।
इसके अलावा राजनांदगांव, रायगढ़, कोरिया और कोरबा जैसे जिलों में भी सैकड़ों मामले फाइलों में दबे पड़े हैं।
बीमा और बिल्डर दे रहे सबसे ज्यादा दर्द
वहीं, तेलीबांधा के एक पीड़ित ने 2014 में फ्लैट बुक किया था। 11 साल बीत जाने के बाद सितंबर 2025 में फोरम ने बिल्डर को 12% ब्याज के साथ रकम लौटाने का आदेश दिया, लेकिन आज भी उपभोक्ता के हाथ में एक रुपया नहीं आया है।
कानून में सख्ती, पर अमल में ढिलाई
वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि जब तक फोरम अपने अधिकारों का प्रयोग कर दोषियों को जेल भेजने या उनकी संपत्ति कुर्क करने जैसे कड़े कदम नहीं उठाएगा, तब तक उपभोक्ताओं को वास्तविक न्याय मिलना नामुमकिन है। फिलहाल, छत्तीसगढ़ के हजारों उपभोक्ता कागजी जीत हाथ में लिए सिस्टम की चौखट पर न्याय की आस लगाए बैठे हैं।
निष्कर्ष
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