दुर्ग जिला अस्पताल में लापरवाही पर बड़ी करवाई : 4 कर्मचारी सस्पेंड

Umeshwari Baghel | Jun 28, 2026, 22:01 IST
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दुर्ग जिला अस्पताल में लापरवाही पर बड़ी करवाई
दुर्ग जिला अस्पताल में लापरवाही पर बड़ी करवाई

दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल पीड़ित युवती की मौत मामले में जांच के बाद 7 स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई हुई। 4 संविदाकर्मियों की सेवा समाप्त की गई। जांच में ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध होने के बावजूद समय पर प्रक्रिया में लापरवाही सामने आई।

समझें क्या है पूरा मामला

Durg। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल बीमारी से पीड़ित युवती दीपिका गाढ़ा की मौत के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। यह घटना 1 जून 2026 की है, जब इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि समय पर रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थिति बिगड़ गई और मरीज को बचाया नहीं जा सका। मामला सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए गए।

उच्च स्तरीय जांच टीम ने की जांच

घटना की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी को दी गई थी। जांच टीम ने लगभग 20 दिनों तक अस्पताल के रिकॉर्ड, ब्लड बैंक रजिस्टर, स्टाफ के बयान और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। इसके आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई।

जांच में क्या सामने आया

जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि घटना के समय ब्लड बैंक में लगभग 85 यूनिट रक्त उपलब्ध था। इसके बावजूद मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि मरीज के परिजनों को रक्त की व्यवस्था के लिए डोनर खोजने के लिए कहा गया था। परिजनों द्वारा डोनर उपलब्ध नहीं कराए जा सके, जिसके बाद भी रक्त ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाई।

जांच में यह भी पाया गया कि अस्पताल के विभिन्न स्तरों पर समन्वय की कमी रही, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई। इसी प्रशासनिक और चिकित्सा प्रबंधन की खामियों को जांच रिपोर्ट में प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने कुल सात स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें से चार संविदाकर्मियों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। सेवा समाप्त किए गए कर्मचारियों में दो लैब टेक्नीशियन और दो स्टाफ नर्स शामिल हैं, जो रेडक्रॉस और एनएचएम के तहत कार्यरत थे। इन सभी पर प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही के आरोप जांच रिपोर्ट में दर्ज किए गए हैं।

तीन कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई

इसके अलावा तीन अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। इनमें एक पीजी रेजिडेंट डॉक्टर, एक एनएचएम विशेषज्ञ डॉक्टर और एक स्टाफ नर्स शामिल हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित नियुक्तिकर्ता अधिकारी को पत्र भेज दिया गया है, जहां आगे की प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जाएगी।

वरिष्ठ अधिकारियों पर उठे सवाल

मामले में यह भी चर्चा में रहा कि ब्लड बैंक प्रभारी और आरएमओ के बयान जांच के दौरान कई बार बदलते रहे। हालांकि उनके नाम पर अभी अंतिम कार्रवाई सूची में कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या जिम्मेदारी सभी स्तरों पर समान रूप से तय की गई है या नहीं।

कर्मचारी संगठन की प्रतिक्रिया

एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। संगठन का कहना है कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर की गई है, जबकि निर्णय प्रक्रिया में शामिल वरिष्ठ स्तर की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं की गई है। संगठन ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने कलेक्टर से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की दोबारा समीक्षा की मांग उठाने की बात कही है।

IMP FACTS

दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल मरीज युवती की मौत हुई।

जांच में ब्लड बैंक में लगभग 85 यूनिट रक्त उपलब्ध पाया गया।

रक्त उपलब्ध होने के बावजूद समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

लगभग 20 दिन जांच चली और रिपोर्ट अपर कलेक्टर ने तैयार की।

जांच के बाद 7 स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की गई।

इनमें 4 संविदाकर्मियों की सेवा तत्काल समाप्त कर दी गई।

3 कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा हुई।

मामले में कर्मचारी संगठन ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है। आगे की कार्रवाई संबंधित विभागीय प्रक्रिया और जांच के अनुसार तय की जाएगी।

FAQ

  1. दुर्ग अस्पताल मामले में मौत का कारण क्या सामने आया?
    जांच में सामने आया कि समय पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जबकि ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध था।
  2. इस मामले में कितने लोगों पर कार्रवाई हुई?
    कुल 7 स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की गई है, जिनमें 4 की सेवा समाप्त कर दी गई है।
  3. क्या इस मामले में आगे भी जांच या कार्रवाई संभव है?
    हां, 3 कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है और आगे विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।

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