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News In Short
परीक्षा में कोई न्यूनतम क्वालीफाइंग मार्क्स तय नहीं थे, जिससे शून्य से नीचे नंबर पाने वाले भी सफल हो गए।
100 अंकों की टियर-1 परीक्षा में सिर्फ एक अंक पाने वाले उम्मीदवार भी अगले दौर के लिए चयनित हो गए।
स्टाफ नर्स पद के लिए कटऑफ माइनस 13.333 तक पहुंचा, जिससे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
कुल 7,267 पदों के लिए देशभर के 690 स्कूलों में नियुक्तियां की जानी हैं।
शिक्षा जगत में गुणवत्ता से समझौते पर चिंता जताई जा रही है, और न्यूनतम मानकों की मांग बढ़ रही है।
News In Detail
एकलव्य आवासीय विद्यालय (EMRS) स्टाफ सिलेक्शन एग्जाम 2025 के टियर-1 के रिजल्ट चर्चा और विवादों के केंद्र में हैं। भर्ती परीक्षा के नतीजों ने योग्यता के मानकों पर एक नई बहस छेड़ दी है। क्योंकि महज एक नंबर पाने वाले अभ्यर्थी भी अब प्रिंसिपल जैसे महत्वपूर्ण पद की दौड़ में शामिल हैं।
एक नंबर पर साहब बनने की तैयारी
एकलव्य आवासीय विद्यालय (EMRS) भर्ती के टियर-1 रिजल्ट में ट्रांसपेरेंसी और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, प्रिंसिपल पद के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के एक उम्मीदवार ने सिर्फ एक अंक हासिल किया, फिर भी उसे टियर-2 परीक्षा के लिए योग्य घोषित कर दिया गया है।
वहीं, अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए कटऑफ महज चार अंक था। अगर ये उम्मीदवार अंत में चयनित हो जाते हैं, तो इनका शुरुआती मासिक वेतन भत्तों के साथ एक लाख रुपए से भी ज्यादा होगा।
माइनस मार्किंग का खेल
भर्ती का सबसे हैरान करने वाला पहलू फीमेल स्टाफ नर्स पद के नतीजों में दिखा। यहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कटऑफ माइनस 13.333 तक गिर गया।
परीक्षा में गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक काटने का नियम था। इसके कारण कई उम्मीदवारों का स्कोर शून्य से भी नीचे चला गया। इसके बावजूद, क्योंकि न्यूनतम योग्यता अंक तय नहीं किए गए थे, इन्हें अगले दौर के लिए चुन लिया गया।
सिलेक्शन प्रोसेस क्या है
साल 2025 की इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 7,267 पदों को भरा जाना है, जिसमें पीजीटी, टीजीटी, हॉस्टल वार्डन, अकाउंटेंट और लैब अटेंडेंट जैसे पद शामिल हैं। प्रिंसिपल पद के लिए 225 वैकेंसी हैं, लेकिन इसके मुकाबले 10 गुना यानी 2,250 उम्मीदवारों को टियर-2 के लिए बुलाया गया है। प्रिंसिपल का चयन तीन चरणों में होगा - टियर-1, टियर-2 और इंटरव्यू। वहीं, बाकी पदों के लिए केवल दो ही चरण रखे गए हैं।
एक्सपर्ट्स का क्या कहना है
प्रशासनिक एक्सपर्ट्स और शिक्षाविदों ने इस भर्ती प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है। पूर्व अपर मुख्य सचिव बी.के. सरे का मानना है कि किसी भी भर्ती में न्यूनतम मानक होना जरूरी है। उनका कहना है कि जब बेंचमार्क तय नहीं होते, तो चयन प्रक्रिया सिर्फ संख्या भरने की औपचारिकता बनकर रह जाती है। इससे भविष्य में स्कूलों के काम और शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ सकता है।
सिलेक्टेड कैंडिडेट्स की सैलरी कितनी होगी
एकलव्य स्कूल के इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान दिया जाएगा-
प्रिंसिपल: लेवल 12 (78 हजार से 2 लाख 9 हजार 200 रुपए) - कुल वेतन 1 लाख+ प्रतिमाह।
पीजीटी: लेवल 8 (47 हजार 600 से 1 लाख 51 हजार 100 रुपए)।
टीजीटी: लेवल 7 (44 हजार 900 से 1 लाख 42 हजार 400 रुपए)।
स्टाफ नर्स व वार्डन: लेवल 5 (29 हजार 200 से 92 हजार 300 रुपए)।
देशभर के करीब 690 एकलव्य विद्यालयों (जैसे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा) में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी इन्हीं कंधों पर होगी, जिससे इस विवाद की गंभीरता और बढ़ जाती है।
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