पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में देश में दूसरे नंबर पर राजस्थान, MP में भी इजाफा, CG में 99 फीसदी की कमी
Arun Tiwari | Jun 02, 2026, 15:31 IST
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लोगों को जीने के लिए ऑक्सीजन चाहिए और यह ऑक्सीजन पर्यावरण से मिलती है। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस होता है। इस मौके पर हम आपको बताते हैं की मध्यप्रदेश,राजस्थान और छत्तीसगढ़ के लोग किस हद तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
Raipur : जीवन के लिए जरुरी होने के बाद भी लोग पर्यावरण का चीरहरण करने में लगे हुए है। हाल ही में आई एनसीआरबी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है पर्यावरण के प्रति अपराध करने में लोग बिल्कुल पीछे नहीं हैं।
इनवायरमेंटल अफेंस यानी पर्यावणीय अपराध में राजस्थान पूरे देश की सूची में नंबर दो पर है। वहीं मध्यप्रदेश में भी पर्यावरण के प्रति अपराध के मामले बढ़े हैं। छत्तीसगढ़ का ग्राफ थोड़ा नीचे आया है। लोगों का पर्यावरण के प्रति बर्ताव भले ही अशुद्ध हो लेकिन उनको हवा,पानी तो बिल्कुल शुद्ध चाहिए।
धरती मां कराह रही है, नदियां सूख रही हैं, जंगल सिसक रहे हैं और हवा का दम घुट रहा है। लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभार्थी इंसान ही पर्यावरण का सबसे बड़ा अपराधी भी बन चुका है। ताज़ा एनसीआरबी रिपोर्ट ने एक बार फिर यह सच्चाई सामने रख दी है
कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता सिर्फ भाषणों और फोटो अभियानों तक सीमित रह गई है। इस रिपोर्ट में साल 2024 की स्थिति बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में पर्यावरणीय अपराधों (Environmental Offences) में राजस्थान दूसरे स्थान पर है। पिछले साल के मुकाबले यहां पर 39 फीसदी का इजाफा हुआ है।
मध्यप्रदेश में 2 फीसदी की वृद्धि हुई है। जबकि छत्तीसगढ़ में 99 फीसदी की बड़ी कमी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, इन राज्यों में अवैध खनन, जंगलों की कटाई, नदियों में प्रदूषण फैलाने और अपशिष्ट निस्तारण जैसे अपराधों में सबसे अधिक उछाल आया है। यानी विकास की दौड़ में इंसान ने प्रकृति की सांसें ही छीन ली हैं।
एनसीआरबी की रिपोर्ट में यह पर्यावरणीय अपराध सिर्फ दर्ज मामलों के आधार पर दिखाए गए हैं। लेकिन जानकार कहते हैं कि पर्यावरण को नुकसान तो इनसे कहीं ज्यादा हैं। विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना भी एक तरह का अपराध है। विकास की कीमत हमारा पर्यावरण ही चुका रहा है।
गंगा में पीने लायक पानी नहीं है, धूल,धुआं और शोर ने हवा को विषैला कर दिया है। सड़क बनाने के लिए पेड़ काटे जा रहे है। इस रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में पर्यावरणीय अपराधों का आंकड़ा 10824 है। मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 366 और छत्तीसगढ़ में मात्र 2 है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन साल यानी 2022, 2023, 2024 में पर्यावरणीय अपराधों में अधिकांश राज्यों में वृद्धि हुई है। राजस्थान में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है और राजस्थान पिछले साल के मुकाबले तीसरे से दूसरे नंबर पर आ गया है।
राजस्थान के लिए यह स्थिति ज्यादा चिंताजनक इसलिए है क्योंकि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो जंगल हैं लेकिन राजस्थान इस तरह के घने जंगलों से महरुम है। आइए आपको बताते हैं तीन सालों में तीनों राज्यों की पर्यावरणीय अपराधों में क्या स्थिति रही।
राजस्थान : साल 2022 में यहां पर्यावरणीय अपराधों का आंकड़ा 9529 था। साल 2022 में यह आंकड़ा घटकर 7794 हो गया। 2023 में यह नंबर बढ़कर 10824 हो गए। यानी राजस्थान में 39 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गई।
मध्यप्रदेश : साल 2022 में यहां पर्यावरणीय अपराधों का आंकड़ा 79 था। साल 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 358 हो गया। 2024 में यह नंबर बढ़कर 366 हो गए। यानी मध्यप्रदेश में पिछले साल के मुकाबले दो फीसदी का इजाफा हो गया।
छत्तीसगढ़ : साल 2022 में यहां पर्यावरणीय अपराधों का आंकड़ा 87 था। साल 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 229 हो गया। 2024 में यह नंबर बढ़कर 2 हो गया। यानी छत्तीसगढ़ में अपराधों में 99 फीसदी की कमी आ गई।
अब हम आपको बताते हैं कि पर्यावरणीय अपराधों से क्या ताल्लुक है। वे कानून जिनके उल्लंघन पर मामला दर्ज होता है और यह पर्यावरण अपराधों की श्रेणी में आते हैं। फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट,वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, द इन्वायरमेंटल एक्ट, द एयर एंड द वॉटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन एक्ट,द सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट,नॉइज पॉल्यूशन एक्ट,एनजीटी एक्ट, एनवायरमेंटल संबंधी एक्ट।
इन सभी कानूनों के उल्लंघन के आधार पर लोगों पर मामला दर्ज होता है। इन तीनों राज्यों में सबसे ज्यादा नोइज पॉल्यूशन के मामले दर्ज हैं। इन राज्यों में अवैध खनन, जंगलों की कटाई, नदियों में प्रदूषण फैलाने और अपशिष्ट निस्तारण जैसे अपराधों में सबसे अधिक उछाल आया है। यानी विकास की दौड़ में इंसान प्रकृति का चीरहरण कर रहा है।
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इनवायरमेंटल अफेंस यानी पर्यावणीय अपराध में राजस्थान पूरे देश की सूची में नंबर दो पर है। वहीं मध्यप्रदेश में भी पर्यावरण के प्रति अपराध के मामले बढ़े हैं। छत्तीसगढ़ का ग्राफ थोड़ा नीचे आया है। लोगों का पर्यावरण के प्रति बर्ताव भले ही अशुद्ध हो लेकिन उनको हवा,पानी तो बिल्कुल शुद्ध चाहिए।
कुदरत के कातिल
कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता सिर्फ भाषणों और फोटो अभियानों तक सीमित रह गई है। इस रिपोर्ट में साल 2024 की स्थिति बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में पर्यावरणीय अपराधों (Environmental Offences) में राजस्थान दूसरे स्थान पर है। पिछले साल के मुकाबले यहां पर 39 फीसदी का इजाफा हुआ है।
मध्यप्रदेश में 2 फीसदी की वृद्धि हुई है। जबकि छत्तीसगढ़ में 99 फीसदी की बड़ी कमी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, इन राज्यों में अवैध खनन, जंगलों की कटाई, नदियों में प्रदूषण फैलाने और अपशिष्ट निस्तारण जैसे अपराधों में सबसे अधिक उछाल आया है। यानी विकास की दौड़ में इंसान ने प्रकृति की सांसें ही छीन ली हैं।
यह है तीनों राज्यों की स्थिति
गंगा में पीने लायक पानी नहीं है, धूल,धुआं और शोर ने हवा को विषैला कर दिया है। सड़क बनाने के लिए पेड़ काटे जा रहे है। इस रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में पर्यावरणीय अपराधों का आंकड़ा 10824 है। मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 366 और छत्तीसगढ़ में मात्र 2 है।
तीन साल में इतना इजाफा
राजस्थान के लिए यह स्थिति ज्यादा चिंताजनक इसलिए है क्योंकि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो जंगल हैं लेकिन राजस्थान इस तरह के घने जंगलों से महरुम है। आइए आपको बताते हैं तीन सालों में तीनों राज्यों की पर्यावरणीय अपराधों में क्या स्थिति रही।
राजस्थान : साल 2022 में यहां पर्यावरणीय अपराधों का आंकड़ा 9529 था। साल 2022 में यह आंकड़ा घटकर 7794 हो गया। 2023 में यह नंबर बढ़कर 10824 हो गए। यानी राजस्थान में 39 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गई।
मध्यप्रदेश : साल 2022 में यहां पर्यावरणीय अपराधों का आंकड़ा 79 था। साल 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 358 हो गया। 2024 में यह नंबर बढ़कर 366 हो गए। यानी मध्यप्रदेश में पिछले साल के मुकाबले दो फीसदी का इजाफा हो गया।
छत्तीसगढ़ : साल 2022 में यहां पर्यावरणीय अपराधों का आंकड़ा 87 था। साल 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 229 हो गया। 2024 में यह नंबर बढ़कर 2 हो गया। यानी छत्तीसगढ़ में अपराधों में 99 फीसदी की कमी आ गई।
पर्यावरणीय अपराधों में इन कानूनों का उल्लंघन
इन सभी कानूनों के उल्लंघन के आधार पर लोगों पर मामला दर्ज होता है। इन तीनों राज्यों में सबसे ज्यादा नोइज पॉल्यूशन के मामले दर्ज हैं। इन राज्यों में अवैध खनन, जंगलों की कटाई, नदियों में प्रदूषण फैलाने और अपशिष्ट निस्तारण जैसे अपराधों में सबसे अधिक उछाल आया है। यानी विकास की दौड़ में इंसान प्रकृति का चीरहरण कर रहा है।
FAQ
- राजस्थान में पर्यावरणीय अपराध क्यों ज्यादा हैं?
राजस्थान में अवैध खनन, जंगल कटाई और नदी प्रदूषण की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। कम जंगल होने के बावजूद विकास के नाम पर पर्यावरणीय नुकसान अधिक है। - मध्यप्रदेश में अपराधों की वृद्धि कितनी हुई?
मध्यप्रदेश में पिछले साल के मुकाबले पर्यावरणीय अपराधों में 2% की हल्की वृद्धि हुई है। अवैध खनन, नदी प्रदूषण और जंगल कटाई मामले दर्ज हुए हैं। - छत्तीसगढ़ में अपराधों में इतनी कमी कैसे आई?
छत्तीसगढ़ में 2024 में अपराधों में 99% कमी आई है। यह जंगलों और नदियों के बेहतर संरक्षण, सख्त नियमों और निगरानी के कारण संभव हुआ।
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