राज्य स्तरीय बाबुओं को विधायक नहीं कर पाएंगे अटैच, सांसदों को विशेष छूट
VINAY VERMA | Jun 11, 2026, 16:46 IST
GAD के नए आदेश से हड़कंप
छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब विधायक राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों को अटैच नहीं कर पाएंगे। यह बदलाव 2019 के नियम में संशोधन के बाद लागू हुआ है।
Raipur। छत्तीसगढ़ की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में एक बड़ा प्रशासनिक फैसला चर्चा का विषय बन गया है। राज्य सरकार ने विधायकों की पसंद पर कर्मचारियों के अटैचमेंट की परंपरा पर रोक लगा दी है।ये व्यवस्था बरसों से चल रही थी।
यानी अब राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी किसी विधायक की सचिवालयीन सहायता के लिए अटैच नहीं किए जा सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सरकार द्वारा जारी आदेश में वर्ष 2019 के उस परिपत्र में संशोधन किया गया है, जिसके तहत सांसदों और विधायकों को सचिवालयीन कार्यों के लिए सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान था।
इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर कई जनप्रतिनिधि अपने प्रभाव के आधार पर मंत्रालय, संचालनालय और राज्य स्तरीय कार्यालयों से कर्मचारियों को अटैच करा लेते थे। अब इस व्यवस्था को सीमित करते हुए स्पष्ट कर दिया गया है कि विधायक केवल जिला स्तर पर पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं ही ले सकेंगे।
संशोधित आदेश के अनुसार, राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों को किसी विधायक के साथ अटैच नहीं किया जा सकेगा। विधायक राज्य के किसी भी जिले में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं
लेकिन मंत्रालय, संचालनालय, आयुक्त कार्यालय और अन्य राज्य स्तरीय संस्थानों में पदस्थ कर्मचारियों को उनके साथ नहीं जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे मूल कार्यालयों का कामकाज प्रभावित होने से बचेगा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
इस आदेश का सबसे चर्चित पहलू यह है कि यह प्रतिबंध केवल विधायकों पर लागू किया गया है। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि सांसदों के मामलों में यह रोक लागू नहीं होगी।
यानी सांसद अब भी राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं सचिवालयीन सहायता के लिए प्राप्त कर सकेंगे। इसी बिंदु को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि यह फैसला केवल सचिवालयीन व्यवस्था तक सीमित नहीं है। लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली कर्मचारी विधायकों के साथ अटैच होकर ट्रांसफर-पोस्टिंग, फाइल मूवमेंट और विभागीय समन्वय में अहम भूमिका निभाते थे।
ऐसे में नए आदेश को लॉबिंग सिस्टम पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। इससे राजधानी में बैठकर रसूख के दम पर चलने वाले कई अनौपचारिक नेटवर्क कमजोर पड़ सकते हैं।
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सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश की प्रतिलिपि सभी कलेक्टरों, संभागायुक्तों, विभागाध्यक्षों, निगम-मंडलों, आयोगों, विधानसभा सचिवालय और राजभवन तक भेज दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह आदेश जमीन पर भी उतनी ही सख्ती से लागू होगा, जितनी सख्ती से जारी किया गया है। फिलहाल इतना तय है कि सरकार के इस फैसले ने सत्ता और प्रशासन के बीच वर्षों से चली आ रही एक प्रभावशाली व्यवस्था को बड़ा झटका दे दिया है।
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यानी अब राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी किसी विधायक की सचिवालयीन सहायता के लिए अटैच नहीं किए जा सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
2019 के नियम में बदलाव, नई व्यवस्था लागू
इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर कई जनप्रतिनिधि अपने प्रभाव के आधार पर मंत्रालय, संचालनालय और राज्य स्तरीय कार्यालयों से कर्मचारियों को अटैच करा लेते थे। अब इस व्यवस्था को सीमित करते हुए स्पष्ट कर दिया गया है कि विधायक केवल जिला स्तर पर पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं ही ले सकेंगे।
नया नियम क्या कहता है?
लेकिन मंत्रालय, संचालनालय, आयुक्त कार्यालय और अन्य राज्य स्तरीय संस्थानों में पदस्थ कर्मचारियों को उनके साथ नहीं जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे मूल कार्यालयों का कामकाज प्रभावित होने से बचेगा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
सांसदों को छूट, विधायकों पर रोक
यानी सांसद अब भी राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं सचिवालयीन सहायता के लिए प्राप्त कर सकेंगे। इसी बिंदु को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
ट्रांसफर-पोस्टिंग पर असर?
ऐसे में नए आदेश को लॉबिंग सिस्टम पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। इससे राजधानी में बैठकर रसूख के दम पर चलने वाले कई अनौपचारिक नेटवर्क कमजोर पड़ सकते हैं।
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राजभवन से विधानसभा तक पहुंची चिट्ठी
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह आदेश जमीन पर भी उतनी ही सख्ती से लागू होगा, जितनी सख्ती से जारी किया गया है। फिलहाल इतना तय है कि सरकार के इस फैसले ने सत्ता और प्रशासन के बीच वर्षों से चली आ रही एक प्रभावशाली व्यवस्था को बड़ा झटका दे दिया है।
FAQ
- विधायक अब राज्य स्तरीय कर्मचारियों को अटैच क्यों नहीं कर पाएंगे?
सरकार ने सचिवालयीन अटैचमेंट नियमों में संशोधन किया है। अब विधायक केवल जिला स्तर पर कर्मचारियों की सेवाएं ले सकते हैं ताकि प्रशासनिक दक्षता और मूल कार्यालयों का कामकाज प्रभावित न हो। - सांसदों पर क्या असर होगा?
संसद पर यह रोक लागू नहीं होगी। सांसद अब भी राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं सचिवालयीन सहायता के लिए प्राप्त कर सकते हैं। - आदेश की जानकारी किन-किन कार्यालयों तक पहुंचाई गई है?
आदेश की प्रतिलिपि सभी कलेक्टरों, संभागायुक्तों, विभागाध्यक्षों, निगम-मंडलों, आयोगों, विधानसभा सचिवालय और राजभवन तक भेज दी गई है।
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