सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश: हर तीन साल में बदलेगी कुर्सी, अफसरों पर सरकार सख्त
VINAY VERMA | Aug 04, 2026, 17:13 IST
हर तीन साल में ऑर्डर डेस्क रोटेशन
छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने हर तीन साल में अधिकारियों-कर्मचारियों का कार्य-पटल बदलना अनिवार्य कर दिया है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, मनमानी रुकेगी और प्रशासनिक कामकाज में जवाबदेही तय होगी।
RAIPUR : कुर्सी के लिए जमी-जमाई व्यवस्था पर सरकार सख्त हो गई है। एक आदेश निकालकर छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को एक ही डेस्क पर अनिश्चितकाल तक नहीं बैठाया जाएगा। GAD ने जारी पत्र में हर तीन साल में अनिवार्य रिशफलिंग का आदेश दिया है। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सरकार के आदेश के मुताबिक राज्य के सभी विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संभाग आयुक्त कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालयों और अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य-पटल का हर तीन साल में परिवर्तन करना अनिवार्य होगा। यानी लंबे समय से एक ही शाखा, एक ही सीट या एक ही संवेदनशील काम संभाल रहे कर्मचारियों को अब दूसरी जिम्मेदारी दी जाएगी।
सरकारी गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि कई कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी वर्षों तक एक ही सीट पर बने रहते हैं। इससे कामकाज में पारदर्शिता प्रभावित होने और प्रभावशाली नेटवर्क बनने की आशंका रहती है। माना जा रहा है कि सरकार का यह फैसला संवेदनशील शाखाओं में जवाबदेही बढ़ाने और संभावित अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम है।
परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को उसी कार्य-पटल पर बनाए रखना प्रशासनिक दृष्टि से बेहद आवश्यक हो तो केवल मौखिक आदेश से काम नहीं चलेगा। इसके लिए सक्षम अधिकारी का लिखित और कारणयुक्त अनुमोदन अनिवार्य होगा। यानी अब किसी को मनमाने तरीके से एक ही सीट पर बनाए रखना आसान नहीं रहेगा।
सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिया है कि आदेश का समयबद्ध और प्रभावी पालन सुनिश्चित करें। साथ ही कार्य-पटल परिवर्तन से जुड़े सभी अभिलेखों का संधारण भी कार्यालय स्तर पर किया जाएगा, ताकि भविष्य में इसकी समीक्षा की जा सके।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से विभागों में कार्य संस्कृति बदल सकती है। एक ही सीट पर वर्षों से जमे कर्मचारियों की व्यवस्था टूटेगी, जवाबदेही बढ़ेगी और नए अधिकारियों को अलग-अलग शाखाओं में काम करने का अनुभव मिलेगा। वहीं, सरकार को उम्मीद है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यों का बेहतर वितरण होगा और कार्यालयों में जवाबदेह प्रशासन की दिशा मजबूत होगी। कुल मिलाकर, राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब एक सीट, एक चेहरा, कई साल वाली व्यवस्था धीरे-धीरे इतिहास बनने जा रही है।
सरकार के आदेश के मुताबिक राज्य के सभी विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संभाग आयुक्त कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालयों और अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य-पटल का हर तीन साल में परिवर्तन करना अनिवार्य होगा। यानी लंबे समय से एक ही शाखा, एक ही सीट या एक ही संवेदनशील काम संभाल रहे कर्मचारियों को अब दूसरी जिम्मेदारी दी जाएगी।
सरकारी गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि कई कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी वर्षों तक एक ही सीट पर बने रहते हैं। इससे कामकाज में पारदर्शिता प्रभावित होने और प्रभावशाली नेटवर्क बनने की आशंका रहती है। माना जा रहा है कि सरकार का यह फैसला संवेदनशील शाखाओं में जवाबदेही बढ़ाने और संभावित अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम है।
परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को उसी कार्य-पटल पर बनाए रखना प्रशासनिक दृष्टि से बेहद आवश्यक हो तो केवल मौखिक आदेश से काम नहीं चलेगा। इसके लिए सक्षम अधिकारी का लिखित और कारणयुक्त अनुमोदन अनिवार्य होगा। यानी अब किसी को मनमाने तरीके से एक ही सीट पर बनाए रखना आसान नहीं रहेगा।
सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिया है कि आदेश का समयबद्ध और प्रभावी पालन सुनिश्चित करें। साथ ही कार्य-पटल परिवर्तन से जुड़े सभी अभिलेखों का संधारण भी कार्यालय स्तर पर किया जाएगा, ताकि भविष्य में इसकी समीक्षा की जा सके।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से विभागों में कार्य संस्कृति बदल सकती है। एक ही सीट पर वर्षों से जमे कर्मचारियों की व्यवस्था टूटेगी, जवाबदेही बढ़ेगी और नए अधिकारियों को अलग-अलग शाखाओं में काम करने का अनुभव मिलेगा। वहीं, सरकार को उम्मीद है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यों का बेहतर वितरण होगा और कार्यालयों में जवाबदेह प्रशासन की दिशा मजबूत होगी। कुल मिलाकर, राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब "एक सीट, एक चेहरा, कई साल" वाली व्यवस्था धीरे-धीरे इतिहास बनने जा रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने दी 50 करोड़ के पेड़ काटने की अनुमति, 1 लाख पर चली आरी
मद्रास IIT का सहारा, सड़क हादसों पर छत्तीसगढ़ सरकार ने किया करार
फडणवीस ने लिया ज़मीन फर्जीवाड़े पर संज्ञान, छत्तीसगढ़ सरकार ने नहीं दिया ध्यान
छत्तीसगढ़ सरकार पर कानूनी संकट, शासन के रिकॉर्ड में नहीं जिम्मेदारियों का बंटवारा
नहीं चलेगी एक ही डेस्क की व्यवस्था
संवेदनशील सीटों पर नजर
छूट मिलेगी, लेकिन आसान नहीं
कार्यालय प्रमुखों की बढ़ी जिम्मेदारी
क्या होगा असर?
अब नहीं चलेगी 'एक ही डेस्क' की व्यवस्था
संवेदनशील सीटों पर नजर
छूट मिलेगी, लेकिन आसान नहीं
कार्यालय प्रमुखों की बढ़ी जिम्मेदारी
क्या होगा असर?
यह खबरें भी पढ़ें...
मद्रास IIT का सहारा, सड़क हादसों पर छत्तीसगढ़ सरकार ने किया करार
फडणवीस ने लिया ज़मीन फर्जीवाड़े पर संज्ञान, छत्तीसगढ़ सरकार ने नहीं दिया ध्यान
छत्तीसगढ़ सरकार पर कानूनी संकट, शासन के रिकॉर्ड में नहीं जिम्मेदारियों का बंटवारा
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari