छत्तीसगढ़ में गुजरात की कंपनियों का बढ़ा इंट्रेस्ट, दस गुजराती उद्योगपति करेंगे इन्वेस्ट
Arun Tiwari | May 20, 2026, 14:11 IST
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छत्तीसगढ़ में खनिज और ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता के कारण गुजरात की बड़ी कंपनियां निवेश के लिए आगे आ रही हैं। अडानी, मित्तल समेत 10 गुजराती कंपनियों ने स्टील, ऊर्जा, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में उद्योग लगाने की तैयारी की है।
Raipur. छत्तीसगढ़ में खनिज का भंडार है। यहां सबसे ज्यादा लोहा और ऊर्जा का खजाना है। छत्तीसगढ़ में निवेश करने के लिए अब गुजरात की कंपनियों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है। गुजरात की अडानी और मित्तल जैसी मल्टीनेशनल कंपनियां तो पहले से ही यहां पर अपनी इंडस्ट्री लगा चुकी हैं। यह अपने उद्योगों को बढ़ाना चाहती है। इनके साथ ही 10 गुजराती कंपनियां यहां पर अपना उद्योग स्थापित करने जा रही हैं।
यह बड़े उद्योग छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में लगेंगे। इन कंपनियों ने सरकार के साथ इन्विटेशन टू इन्वेस्टमेंट साइन किया है। कंपनियों ने जिलों का चयन कर लिया है। ये कंपनियां ऊर्जा और स्टील के साथ अन्य क्षेत्रों में भी अपना प्लांट लगाने जा रही हैं।
खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ अब उद्योगों के लिए दिलचस्पी का राज्य बन गया है। राज्य में भरपूर मात्रा में लौह अयस्क, कोयला और ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता के चलते गुजरात की कई बड़ी कंपनियों ने यहां निवेश में रुचि दिखाई है। गुजरात के अडानी ग्रुप और मित्तल जैसी बड़ी कंपनियां पहले से ही छत्तीसगढ़ में अपने उद्योग संचालित कर रही हैं और अब वे अपने कारोबार का विस्तार करने की तैयारी में हैं। इनके साथ ही गुजरात की 10 नई कंपनियां भी राज्य में उद्योग स्थापित करने जा रही हैं।
इन कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ इन्विटेशन टू इन्वेस्टमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनियों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट के लिए जिलों का चयन भी कर लिया है। ये निवेश मुख्य रूप से स्टील, ऊर्जा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में किए जाएंगे। प्रस्तावित उद्योग राज्य के अलग-अलग इलाकों में स्थापित होंगे।
अडानी पॉवर,अहमदाबाद - ऊर्जा, छत्तीसगढ़ राज्य
अडानी एंटरप्रायजेज,अहमदाबाद - कैमिकल एवं अन्य,सरगुजा
आर्सेलर मित्तल निपॉन प्रायवेट लिमिटेड,सूरत - स्टील,बस्तर
सफायर सेमीकॉम प्रायवेट लिमिटेड, अहमदाबाद - इलेक्ट्रॅानिक्स,रायपुर
माला क्रियेशन प्रायवेट लिमिटेड, सूरत - ऊर्जा, रायपुर
टोरेंट पॉवर प्रायवेट लिमिटेड, अहमदाबाद - ऊर्जा,रायगढ़
टोरेंट फॉर्मास्युटिकल,अहमदाबाद - फॉर्मा, रायपुर
लाइसियम लाइफ साइंसेस प्रायवेट लिमिटेड,अहमदाबाद - फॉर्मा,रायपुर
ओनेक्स थ्री इनरसोल प्रायवेट लिमिटेड,राजकोट - ग्रीन हाइड्रोजन,रायपुर
अंबुजा सीमेंट लिमिटेड,अहमदाबाद - सीमेंट,बलौदाबाजार
उद्योग विभाग की जानकारी के मुताबिक कुल 132 कंपनियों ने छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाने में अपनी रुचि दिखाई है। इनमें से 7 उद्योगों ने अपना काम शुरु कर दिया है। कुछ में उत्पादन शुरु हो गया है। इनमें ऊर्जा,सीमेंट,स्टील,सोलर एनर्जी और फूड की कंपनियां शामिल हैं। इन उद्योगों ने करोड़ों का निवेश किया है।
अबरेल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड,महाराष्ट्र, मुंगेली,सोलर एनर्जी, 450 करोड़ रुपए
अल्ट्राटैक सीमेंट, बलौदाबाजार, 1540 करोड़ रुपए
अंबुजा सीमेंट, बलौदाबाजार,1700 करोड़ रुपए
ड्रूल्स पेट फूड प्रायवेट लिमिटेड, राजनांदगांव, 615 करोड़ रुपए
एपीआई इस्पात एंड पॉवर प्रायवेट लिमिटेड,बेमेतरा,सोलर एनर्जी, 147 करोड़ रुपए
हिंदोस्तान स्ट्रक्चरल पाइप्स लिमिटेड, बिलासपुर,स्टील,56 करोड़ रुपए
ओम स्पंज विस्तार परियोजना, रायपुर
सरताज कंपनी,जापान, 100 करोड़, फूड
एसएएस सान्वा कंपनी,जापान, 8.85 करोड़,फूड
एसएएस सान्वा कंपनी,जापान, 17.60 करोड़,इलेक्ट्रानिक्स
मार्डनटेक कार्पोरेशन,कोरिया, 100 करोड़,इलेक्ट्रानिक्स
वहीं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन कहते हैं कि नई उद्योगनीति के बाद यहां निवेशकों का रुझान बढ़ा है। 132 उद्योगपति यहां उद्योग लगाने जा रहे हैं। उनके साथ सरकार का इन्विटेशन टू इन्वेस्टमेंट साइन हुआ है। इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य के लिए यह निवेश अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है। एक ओर जहां बड़े उद्योगों से रोजगार का दावा किया जा रहा है लेकिन दूसरी ओर पर्यावरण और सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।
छत्तीसगढ़ की पहचान देश में खनिज संपदा के भंडार के रूप में रही है। यहां कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यही वजह है कि पावर और स्टील सेक्टर के उद्योग यहां सबसे अधिक आ रहे हैं। राज्य सरकार का भी फोकस औद्योगिक निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने पर है।
इन प्रस्तावित परियोजनाओं को लेकर विरोध की आवाजें भी उठ रही हैं। खासकर बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में स्थानीय समुदायों ने पहले भी खनन और उद्योगों का विरोध किया है। उनका कहना है कि बड़े उद्योगों के आने से जल, जंगल और जमीन पर असर पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका और पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित होती है।
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यह बड़े उद्योग छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में लगेंगे। इन कंपनियों ने सरकार के साथ इन्विटेशन टू इन्वेस्टमेंट साइन किया है। कंपनियों ने जिलों का चयन कर लिया है। ये कंपनियां ऊर्जा और स्टील के साथ अन्य क्षेत्रों में भी अपना प्लांट लगाने जा रही हैं।
10 गुजराती उद्योगपति करेंगे बड़ा निवेश :
इन कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ इन्विटेशन टू इन्वेस्टमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनियों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट के लिए जिलों का चयन भी कर लिया है। ये निवेश मुख्य रूप से स्टील, ऊर्जा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में किए जाएंगे। प्रस्तावित उद्योग राज्य के अलग-अलग इलाकों में स्थापित होंगे।
ये गुजराती कंपनियां भी लगाएंगी बड़े उद्योग :
अडानी एंटरप्रायजेज,अहमदाबाद - कैमिकल एवं अन्य,सरगुजा
आर्सेलर मित्तल निपॉन प्रायवेट लिमिटेड,सूरत - स्टील,बस्तर
सफायर सेमीकॉम प्रायवेट लिमिटेड, अहमदाबाद - इलेक्ट्रॅानिक्स,रायपुर
माला क्रियेशन प्रायवेट लिमिटेड, सूरत - ऊर्जा, रायपुर
टोरेंट पॉवर प्रायवेट लिमिटेड, अहमदाबाद - ऊर्जा,रायगढ़
टोरेंट फॉर्मास्युटिकल,अहमदाबाद - फॉर्मा, रायपुर
लाइसियम लाइफ साइंसेस प्रायवेट लिमिटेड,अहमदाबाद - फॉर्मा,रायपुर
ओनेक्स थ्री इनरसोल प्रायवेट लिमिटेड,राजकोट - ग्रीन हाइड्रोजन,रायपुर
अंबुजा सीमेंट लिमिटेड,अहमदाबाद - सीमेंट,बलौदाबाजार
कुल 132 उद्योगों की रुचि, 7 शुरु किया काम :
इन कंपनियों ने शुरु किया प्रोडक्शन :
अल्ट्राटैक सीमेंट, बलौदाबाजार, 1540 करोड़ रुपए
अंबुजा सीमेंट, बलौदाबाजार,1700 करोड़ रुपए
ड्रूल्स पेट फूड प्रायवेट लिमिटेड, राजनांदगांव, 615 करोड़ रुपए
एपीआई इस्पात एंड पॉवर प्रायवेट लिमिटेड,बेमेतरा,सोलर एनर्जी, 147 करोड़ रुपए
हिंदोस्तान स्ट्रक्चरल पाइप्स लिमिटेड, बिलासपुर,स्टील,56 करोड़ रुपए
ओम स्पंज विस्तार परियोजना, रायपुर
इन विदेशी कंपनियों ने भी दिखाई रुचि :
एसएएस सान्वा कंपनी,जापान, 8.85 करोड़,फूड
एसएएस सान्वा कंपनी,जापान, 17.60 करोड़,इलेक्ट्रानिक्स
मार्डनटेक कार्पोरेशन,कोरिया, 100 करोड़,इलेक्ट्रानिक्स
अब आगे क्या :
निष्कर्ष :
आदिवासियों का विरोध :
इन प्रस्तावित परियोजनाओं को लेकर विरोध की आवाजें भी उठ रही हैं। खासकर बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में स्थानीय समुदायों ने पहले भी खनन और उद्योगों का विरोध किया है। उनका कहना है कि बड़े उद्योगों के आने से जल, जंगल और जमीन पर असर पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका और पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित होती है।
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