छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला : कड़े पुलिस पहरे में बहन को विदा करेगा सजायाफ्ता भाई
Umeshwari Baghel | Jun 29, 2026, 22:32 IST
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का मानवीय फैसला
समरी : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 10 साल की सजा काट रहे मनीष बंसोर को बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी है। उसे अंतरिम जमानत नहीं मिली। वह 30 जून को सुबह 9 से शाम 5 बजे तक पुलिस सुरक्षा में विवाह स्थल पर रहेगा और रस्में पूरी करने के बाद जेल लौटेगा।
समझें क्या है पूरा मामला
मनीष बंसोर ने मांगी थी अंतरिम जमानत
मनीष की ओर से अधिवक्ता आदित्य भारद्वाज ने हाई कोर्ट में अंतरिम जमानत का आवेदन पेश किया। आवेदन में बताया गया कि मनीष की सगी बहन की शादी 29 जून 2026 को भिलाई के उमरपोटी स्थित श्री राधे-राधे पैलेस में होनी है। बहन की विदाई 30 जून को तय है।
परिवार में दूसरा भाई नहीं होने की दी दलील
मामले की सुनवाई जस्टिस राधाकृष्ण अग्रवाल की एकल पीठ में हुई। अदालत के सामने विवाह का निमंत्रण पत्र भी पेश किया गया। कोर्ट ने आवेदन में बताए गए पारिवारिक और सामाजिक पक्षों पर विचार किया।
राज्य सरकार ने जमानत का किया विरोध
राज्य की ओर से यह सुझाव भी दिया गया कि मानवीय आधार पर कैदी को पुलिस अभिरक्षा में बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने इस सुझाव को संतुलित मानते हुए अंतरिम जमानत की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन पुलिस सुरक्षा में समारोह में शामिल होने की अनुमति दे दी।
सुबह 9 से शाम 5 बजे तक रहेगा विवाह स्थल पर
वह शाम पांच बजे तक अपनी बहन की विदाई और संबंधित पारंपरिक रस्मों में शामिल हो सकेगा। तय समय पूरा होने के बाद पुलिस उसे तत्काल वापस जेल ले जाएगी। इस दौरान वह लगातार पुलिस निगरानी में रहेगा।
आवेदन में दर्ज गलत नाम भी सुधारा गया
मनीष की मुख्य आपराधिक अपील पर अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में आगे सुनवाई होने की संभावना है। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद वह पुलिस अभिरक्षा में अपनी बहन की विदाई की रस्म पूरी कर सकेगा।
IMP FACTS
हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार किया।
मनीष 10 साल की सश्रम कारावास की सजा काट रहा है।
वह 30 जून को सुबह 9 से शाम 5 बजे तक बाहर रहेगा।
पूरे समय मनीष कड़ी पुलिस अभिरक्षा में विवाह स्थल पर रहेगा।
विदाई की रस्म पूरी होने के बाद उसे वापस जेल ले जाया जाएगा।
परिवार में मनीष के अलावा बहन का कोई दूसरा भाई नहीं है।
अदालत ने पारिवारिक परंपरा और सुरक्षा के बीच संतुलित आदेश दिया।
जेल अधीक्षक और दुर्ग एसपी को सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश मिले।
मुख्य आपराधिक अपील पर अगस्त 2026 में सुनवाई संभव है।
FAQ
- क्या मनीष बंसोर को अंतरिम जमानत मिली है?
नहीं, हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत मंजूर नहीं की। उसे केवल पुलिस अभिरक्षा में बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी गई है। - मनीष बंसोर कितने समय तक विवाह स्थल पर रहेगा?
वह 30 जून 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक विवाह स्थल पर रहेगा। इसके बाद पुलिस उसे वापस जेल ले जाएगी। - हाई कोर्ट ने समारोह में शामिल होने की अनुमति क्यों दी?
परिवार में मनीष के अलावा कोई दूसरा भाई नहीं है। भाई की मौजूदगी में होने वाली पारंपरिक रस्मों को देखते हुए कोर्ट ने मानवीय आधार पर अनुमति दी।
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