छत्तीसगढ़ की सरकारी लैब संभालेगी निजी कंपनी, युवाओं के रोजगार पर खतरा
VINAY VERMA | Jun 24, 2026, 09:13 IST
HLL ने सरकारी लैब का कामकाज संभाला, युवाओं की नौकरियां खतरे में
सरकारी अस्पतालों में जांच व्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय विभाग ने इसे निजी कंपनी के हाथों सौंप दिया है। सरकारी मशीनें और सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद जांच सेवाएं निजी कंपनी को देने पर विवाद खड़ा हो गया है। इस पर सरकार के सालाना 240 करोड़ रुपए खर्च होंगे
समझें क्या है पूरा मामला
- HLL कंपनी से 240 करोड़ का अनुबंध
- अस्पतालों में 136 जांचें निजी हाथों में
- छत्तीसगढ़ के 6 हजार कर्मचारी प्रभावित
- मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भी होंगे टेस्ट
- युवाओं के रोजगार और गुणवत्ता पर सवाल
जांच सेवाएं निजी संस्था को सौंपी
240 करोड़ में अनुबंध
सरकारी मशीनें, निजी कर्मचारी
गांव से शहर तक बदलेगी व्यवस्था
मानव संसाधन की भारी कमी
मेडिकल कॉलेज भी नहीं बचे
6 हजार कर्मचारियों के सामने संकट
नियमित कर्मचारी भी असमंजस में
पंजीयन नियम पर भी विवाद
मेडिकल शिक्षा पर पड़ सकता है असर
स्वास्थ्य विभाग का तर्कस्वास्थ्य संचालक संजीव झा बस इतना कह पा रहे हैं कि जांच के लिए नई कंपनी से अनुबंध हुआ है इससे मरीजों को लाभ मिलेगा, कंपनी नई मशीने ला रही, जो ज्यादा सटीक रिपोर्ट देंगी,
निजीकरण की ओर बढ़ता कदम?
निष्कर्ष
FAQ
- छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी लैब के संचालन के लिए किस कंपनी से समझौता किया है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग ने केरल की प्रसिद्ध सरकारी/निजी क्षेत्र की एचएलएल (HLL) कंपनी के साथ एक समझौता किया है। इस अनुबंध के तहत अब प्रदेशभर के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और मेडिकल कॉलेजों की प्रयोगशालाओं (Labs) व जांच सेवाओं के प्रबंधन और संचालन की पूरी जिम्मेदारी इसी कंपनी की होगी। - स्वास्थ्य अनुबंध कितने रुपये और कितने वर्षों के लिए किया गया है?
उत्तर: यह पूरा अनुबंध 5 वर्षों की अवधि के लिए कुल ₹240 करोड़ में किया गया है। स्वास्थ्य विभाग जहाँ इसे वर्तमान लचर व्यवस्था को सुधारने वाला कदम बता रहा है, वहीं स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का आरोप है कि प्रदेशभर की जांच व्यवस्था को सरकारी स्तर पर सुचारू रूप से चलाने के लिए सालाना सिर्फ ₹50 करोड़ के केमिकल और रिएजेंट ही काफी थे, ऐसे में ₹240 करोड़ का भारी-भरकम बजट देना वित्तीय बर्बादी है। - लैब टेक्नीशियनों के समायोजन (Adjustment) और काउंसिल पंजीयन को लेकर क्या नया विवाद खड़ा हुआ है?
उत्तर: विवाद यह है कि निजी कंपनी अपने स्तर पर नए कर्मचारियों की भर्ती करेगी, जिसके लिए राज्य की संबंधित काउंसिल में पंजीयन (Registration) की अनिवार्यता को समाप्त किए जाने का आरोप है, जिससे जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, वर्तमान सरकारी लैब टेक्नीशियनों को बिना स्पष्ट आदेश के फूड एंड ड्रग विभाग में अटैच करने की चर्चा है, जबकि वे खाद्य और दवाओं की जांच के विशेषज्ञ नहीं हैं।
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