पति नहीं मांग सकता पत्नी की कॉल डिटेल्स,हाईकोर्ट ने खारिज की पति की याचिका
Harrison Masih | Jul 16, 2025, 19:01 IST
Husband cannot ask wife call details High Court rejects petition the sootr
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की कॉल डिटेल मांगने वाली पति की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा, वैवाहिक रिश्तों में भी निजता का अधिकार जरूरी है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम और संवेदनशील मामले में निजता के अधिकार को प्राथमिकता देते हुए एक पति की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपनी पत्नी की कॉल डिटेल्स (CDR) की मांग की थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह संबंधों में भी प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत गोपनीयता का अधिकार है, जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित किया गया है।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा पर उठाए सवाल, सरकार से मांगा जवाब
यह मामला दुर्ग जिले के निवासी युवक से जुड़ा है, जिसकी शादी 4 जुलाई 2022 को राजनांदगांव की युवती से हुई थी। शादी के कुछ ही समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया और मामला अलगाव तक पहुंच गया।
पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i) के तहत तलाक की याचिका दाखिल की। साथ ही धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए भी अर्जी दी।
उधर, पत्नी ने धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण की मांग की, और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति, सास-ससुर व देवर के खिलाफ भी कार्यवाही की।
इस कानूनी लड़ाई के दौरान पति ने आरोपों के समर्थन में पत्नी की कॉल डिटेल (Call Detail Records) प्राप्त करने के लिए एसएसपी, दुर्ग को आवेदन दिया, लेकिन जानकारी नहीं मिलने पर उसने पहले पारिवारिक न्यायालय और फिर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
ये खबर भी पढ़ें... मंदिर की संपत्ति पर पुजारी का अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने याचिका को सख्ती से खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना मान्यता वाले स्कूलों में नए एडमिशन पर लगाई रोक...
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की टिप्पणी, रिश्वत बरामदगी ही दोष सिद्ध करने के लिए काफी नहीं, मंडल संयोजक बरी
हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय द्वारा याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सही और वैध बताया। यह निर्णय सिर्फ इस मामले के लिए नहीं, बल्कि देश भर में वैवाहिक निजता के मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।
इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि विवाह संबंधों में भी व्यक्ति की निजता को कानूनी संरक्षण प्राप्त है। निजी डेटा और डिजिटल संवाद को साझा करना किसी का कानूनी कर्तव्य नहीं, बल्कि व्यक्तिगत निर्णय है। इस प्रकार की याचिकाओं के ज़रिए गोपनीयता का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
thesootr links
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃 🤝💬👩👦👨👩👧👧
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा पर उठाए सवाल, सरकार से मांगा जवाब
क्या है पूरा मामला ?
पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i) के तहत तलाक की याचिका दाखिल की। साथ ही धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए भी अर्जी दी।
उधर, पत्नी ने धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण की मांग की, और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति, सास-ससुर व देवर के खिलाफ भी कार्यवाही की।
पत्नी की कॉल डिटेल मांगने की याचिका
ये खबर भी पढ़ें... मंदिर की संपत्ति पर पुजारी का अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
- “विवाह, साझेदारी का संबंध है, स्वामित्व का नहीं।”
- “पति-पत्नी दोनों के पास अपने व्यक्तिगत जीवन, संचार और गोपनीयता का पूरा अधिकार है।”
- “किसी भी विवाहित व्यक्ति को उसकी पत्नी या पति को मोबाइल, बैंक पासवर्ड या कॉल डिटेल्स साझा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।”
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना मान्यता वाले स्कूलों में नए एडमिशन पर लगाई रोक...
अनुच्छेद 21: निजता का मूल अधिकार अदालत ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसमें निजता (privacy) भी शामिल है। इसमें मोबाइल पर हुई निजी बातचीत, कॉल डिटेल्स, और डिजिटल संवाद भी आते हैं। इनकी जानकारी बिना पर्याप्त कानूनी आधार के नहीं दी जा सकती।
| 1️⃣ पति की याचिका खारिज उच्च न्यायालय ने पत्नी की कॉल डिटेल मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया। 2️⃣ निजता का अधिकार प्राथमिक कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति को अनुच्छेद 21 के तहत गोपनीयता का अधिकार है। 3️⃣ रिश्ते में भी सीमाएं जरूरी कोर्ट ने माना कि विवाह साझेदारी है, स्वामित्व नहीं — निजता जरूरी है। 4️⃣ कानूनी आधार नहीं था पति ने व्यभिचार या संदेह का आरोप नहीं लगाया था, जिससे कॉल डिटेल की मांग अस्वीकार्य रही। 5️⃣ परिवार न्यायालय का फैसला बरकरार हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को सही मानते हुए याचिका रद्द कर दी। |
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की टिप्पणी, रिश्वत बरामदगी ही दोष सिद्ध करने के लिए काफी नहीं, मंडल संयोजक बरी
परिवार न्यायालय का निर्णय बरकरार
फैसले का महत्व
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃 🤝💬👩👦👨👩👧👧
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA