कवर्धा एसपी ने लगाया प्रमोशन में भेदभाव का आरोप, सीएम साय से की शिकायत
Arun Tiwari | Jan 28, 2026, 18:28 IST
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छत्तीसगढ़ पुलिस में पदोन्नति को लेकर विवाद सामने आया है। 2012 बैच के IPS अधिकारी और कवर्धा SP धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर प्रमोशन में भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
NEWS IN SHORT
- 2012 बैच के IPS धर्मेंद्र सिंह छवई ने पदोन्नति नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा।
- अधिकारी का आरोप है कि नियमों के बावजूद उन्हें जानबूझकर प्रमोशन से वंचित किया गया।
- लोकायुक्त जांच लंबित होने का हवाला देकर उनका प्रमोशन रोका गया, जबकि न चार्जशीट है न निलंबन।
- छवई ने गंभीर आरोप झेल रहे अन्य अधिकारियों को प्रमोशन दिए जाने पर भेदभाव का आरोप लगाया।
- पत्र ने पुलिस विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।
NEWS IN DETAIL
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 2012 बैच के कवर्धा एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री विष्णु देव को पत्र लिखकर अपने साथ हुए कथित अन्याय, भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की पीड़ा व्यक्त की है।
पत्र में अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नियमों के बावजूद उन्हें जानबूझकर पदोन्नति से वंचित किया गया।
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क्या लिखा है पत्र में :
IPS धर्मेंद्र सिंह छवई
और पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर जारी की गई पदोन्नति सूचियों (10 अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025) में उनके नाम पर विचार किया गया, लेकिन उन्हें पदोन्नत नहीं किया गया. इसका कारण बताया गया कि उनके विरुद्ध लोकायुक्त संगठन, भोपाल में जांच लंबित है।
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प्रमोशन में भेदभाव:
उन्हें पदोन्नति का लाभ दे दिया गया। जबकि उनके मामले में न तो चार्जशीट जारी हुई है और न ही कोई विभागीय कार्यवाही लंबित है।
गृह मंत्रालय के नियमों का हवाला:
आरोप पत्र जारी नहीं हुआ है और न्यायालय में आपराधिक मामला लंबित नहीं है, तो उसे पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता.।इसके बावजूद उन्हें वरिष्ठ वेतनमान और उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) के पद पर पदोन्नति नहीं दी गई।
पुलिस अधीक्षक ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत समान अवसर के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया है. पत्र में यह भी कहा गया है कि समान परिस्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया, जबकि उनके साथ भेदभाव किया गया, जिससे उनका मनोबल आहत हुआ है।
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निष्पक्षता पर सवाल:
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