IPS राहुल बंसल केस: कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया अंतिम मौका, जुर्माना भी लगाया

Harrison Masih | Aug 19, 2026, 17:30 IST
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IPS राहुल बंसल केस
IPS राहुल बंसल केस

IPS राहुल बंसल रिश्वत मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आखिरी मौका दिया है। 10 हजार रुपए जमा करने की शर्त के साथ 25 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।

समझें क्या है पूरा मामला

प्रशिक्षु IPS और अंबिकापुर CSP राहुल बंसल पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोप से जुड़े मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया है। कोर्ट ने 10 हजार रुपए जुर्माना जमा करने की शर्त पर अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है।

यह प्रकरण विशेष न्यायाधीश (PC Act) दिनेश कुमार, CBI 11 की अदालत में लंबित है। याचिकाकर्ता आकाश कुमार ने BNSS की धारा 175(3) के तहत CBI को FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशिक्षु IPS अधिकारी ने हवाला के जरिए एक करोड़ रुपए की रिश्वत ली। यह आरोप अभी अप्रमाणित है और कोर्ट में विचाराधीन है।

साजिश में शामिल बताए गए दो अन्य पुलिसकर्मी

याचिका के मुताबिक इस कथित साजिश में ASI (Assistant Sub-Inspector) प्रवीण राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा भी शामिल थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की गंभीरता और अंतरराज्यीय लेन-देन को देखते हुए इसकी जांच CBI से कराई जानी चाहिए।

मंगलवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता साहिबा सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुईं। CBI की तरफ से विशेष लोक अभियोजक अवनीश चंद, राहुल बंसल की तरफ से अधिवक्ता मनीष तिवारी और प्रवीण राठौर व अंशुल शर्मा की तरफ से अधिवक्ता हर्षि गौर मौजूद थीं।

अधिकार क्षेत्र पर होनी है पहले बहस

न्यायाधीश ने शुरुआत में ही स्पष्ट किया कि पहले इस बात पर बहस होगी कि दिल्ली की इस अदालत को CBI को FIR दर्ज करने का निर्देश देने का अधिकार क्षेत्र है या नहीं।

पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने इसी बिंदु पर दलीलें मांगी थीं, लेकिन तब अधिवक्ता ने समय मांगा था। इस बार भी अधिवक्ता साहिबा सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के DGP से विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही बहस करना उचित होगा।

व्यक्तिगत बहस के लिए मांगा गया समय

अधिवक्ता साहिबा सिंह ने कहा कि वे इस समय मुंबई में एक अन्य मामले के सिलसिले में हैं और व्यक्तिगत रूप से बहस करना चाहती हैं, इसलिए तारीख आगे बढ़ाई जाए।

प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं ने समय देने का विरोध किया। उनके मुताबिक याचिकाकर्ता इस लंबित याचिका का इस्तेमाल मीडिया में प्रतिवादियों को बदनाम करने और अलग-अलग फोरम से अपने पक्ष में आदेश लेने के लिए कर रहा है। यह आरोप प्रतिवादी पक्ष का है, जिसकी पुष्टि अदालत में होनी बाकी है।

इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि प्रतिवादी साबित करें कि उनके पास ऐसा कोई प्रमाण है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इस स्तर पर किसी के आरोपों की जांच नहीं करेगा और सिर्फ याचिका पर ध्यान देगा।

10 हजार जमा करने पर मिला अंतिम मौका

कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि पिछली तारीख को भी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने व्यक्तिगत बहस के लिए समय मांगा था। लगातार दो तारीखों से बहस टल रही है।

न्याय के हित में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अधिकार क्षेत्र पर बहस करने का अंतिम अवसर दिया। लेकिन इसके साथ कोर्ट ने शर्त रखी कि अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 से पहले याचिकाकर्ता को 10,000 रुपए DLSA (District Legal Services Authority) केंद्रीय के पास शुल्क के रूप में जमा करने होंगे। कोर्ट के मुताबिक यह जुर्माना बार-बार हुए विलंब के कारण लगाया गया है।

सितंबर की मांग खारिज, 25 अगस्त को होगी सुनवाई

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने 10 हजार का जुर्माना अधिक बताते हुए सितंबर में तारीख देने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह आवेदन 1 जुलाई 2026 से लंबित है, इसलिए प्राथमिकता से सुनवाई जरूरी है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने यह भी बताया कि वे 31 अगस्त 2026 तक दिल्ली में उपलब्ध नहीं होंगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तारीख नहीं बदलेगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बहस की मिली छूट

हालांकि कोर्ट ने छूट दी कि अधिवक्ता 25 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बहस कर सकती हैं।

अब 25 अगस्त को कोर्ट सबसे पहले याचिका की सुनवाई योग्यता और अधिकार क्षेत्र पर दलीलें सुनेगा। इसके बाद ही CBI जांच के निर्देश पर निर्णय होगा।

अब आगे क्या

25 अगस्त की सुनवाई में यह तय होगा कि दिल्ली की यह अदालत CBI को FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए सक्षम है या नहीं। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।

फिलहाल राहुल बंसल, प्रवीण राठौर और अंशुल शर्मा के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप अप्रमाणित हैं और मामला पूरी तरह अदालत के विचाराधीन है।

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