ब्रेकिंग न्यूज: झीरम घाटी नक्सली हमले के सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा
Arun Tiwari | Sept 16, 2026, 17:34 IST
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छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में जगदलपुर की विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने सभी 10 दोषी ठहराए गए आरोपियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और दर्दनाक झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल के लंबे इंतजार के बाद जगदलपुर स्थित विशेष राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) अदालत का फैसला आ गया है। इस वीभत्स कांड की सुनवाई पूरी करते हुए विशेष अदालत ने मामले में दोषी सभी 10 नक्सलियों को मृत्युदंड का फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद मृत्युदंड दिया जाएगा। इस नक्सली हमले में कांग्रेस की एक पूरी पीढ़ी को खत्म कर दिया था। झीरम कांड में महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल और विद्याचरण शुक्ला जैसे दिग्गज नेता मारे गए थे।
25 मई 2013 को बस्तर जिले के दरभा घाटी (झीरम घाटी) क्षेत्र में यह नरसंहार हुआ था। उस समय छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी 'परिवर्तन यात्रा' निकाल रही थी। जब कांग्रेस नेताओं का काफ़िला सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रहा था, तभी सैकड़ों की संख्या में मौजूद भारी हथियारों से लैस नक्सलियों ने झीरम घाटी के संकरे मोड़ पर अंधाधुंध हमला कर दिया था।
नक्सलियों ने पहले आईईडी (IED) ब्लास्ट कर सड़क को क्षतिग्रस्त किया ताकि गाड़ियों की आवाजाही रुक जाए और फिर पहाड़ियों से पूरे काफिले पर अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस कायरतापूर्ण हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत लगभग 29 से 31 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें कई सुरक्षाकर्मी और ग्रामीण भी शामिल थे। इस घटना ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को एक झटके में समाप्त कर दिया था।
घटना के तुरंत बाद राज्य पुलिस और बाद में एनआईए ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू की थी। एनआईए ने मामले में आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र दाखिल कर 35 से अधिक नक्सलियों और उनके सहयोगियों को नामजद किया था। Trial के दौरान कुल 11 आरोपी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई।
विशेष अदालत में अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए और फॉरेंसिक साक्ष्यों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी सबूत पेश किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और अंतिम बहस पूरी होने के बाद सभी 10 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया।
13 साल बाद आए इस अदालती फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ नेताओं और शहीद नेताओं के परिजनों ने इसे राहत भरा तो बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पूर्ण न्याय अभी बाकी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि झीरम कांड के पीछे की
राजनीतिक साजिश और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। उनका मानना है कि जब तक इस घटना के पीछे के मुख्य षड्यंत्रकारियों के नामों का पूरी तरह से खुलासा नहीं हो जाता, तब तक यह न्याय अधूरा ही रहेगा।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने मीडिया को बताया कि वे निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में अपील दायर करेंगे।
झीरम घाटी का यह मामला भारतीय लोकतंत्र और बस्तर के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है। अदालत के इस फैसले ने पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मलहम लगाने का काम किया है और यह संदेश भी दिया है कि कानून के हाथ चाहे कितने भी देर से पहुंचे, दोषियों को उनके कर्मों की सजा जरूर मिलती है।
झीरम मामले में NIA की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला, 27 लोगों की हत्या पर NIA की विशेष अदालत ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। सभी दोषी 30 दिन के अंदर फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील कर सकते है।
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क्या था झीरम घाटी का भयावह कांड:
नक्सलियों ने पहले आईईडी (IED) ब्लास्ट कर सड़क को क्षतिग्रस्त किया ताकि गाड़ियों की आवाजाही रुक जाए और फिर पहाड़ियों से पूरे काफिले पर अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस कायरतापूर्ण हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत लगभग 29 से 31 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें कई सुरक्षाकर्मी और ग्रामीण भी शामिल थे। इस घटना ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को एक झटके में समाप्त कर दिया था।
कानूनी प्रक्रिया और अदालत की कार्यवाही:
विशेष अदालत में अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए और फॉरेंसिक साक्ष्यों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी सबूत पेश किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और अंतिम बहस पूरी होने के बाद सभी 10 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया।
इनको सज़ा ए मौत :
- प्रमिला मोडियाम
- सुमित्रा पुनेम
- मुक्का मांडवी
- मड़कामी देवा
- कोसा कवासी
- आयत मरकाम
- बेंजामी सेना
- चैतू लेकाम
- जोगा मड़कामी
- महादेव नाग
फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं:
राजनीतिक साजिश और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। उनका मानना है कि जब तक इस घटना के पीछे के मुख्य षड्यंत्रकारियों के नामों का पूरी तरह से खुलासा नहीं हो जाता, तब तक यह न्याय अधूरा ही रहेगा।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने मीडिया को बताया कि वे निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में अपील दायर करेंगे।
झीरम घाटी का यह मामला भारतीय लोकतंत्र और बस्तर के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है। अदालत के इस फैसले ने पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मलहम लगाने का काम किया है और यह संदेश भी दिया है कि कानून के हाथ चाहे कितने भी देर से पहुंचे, दोषियों को उनके कर्मों की सजा जरूर मिलती है।
झीरम मामले में NIA की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला, 27 लोगों की हत्या पर NIA की विशेष अदालत ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। सभी दोषी 30 दिन के अंदर फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील कर सकते है।
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रायपुर में 8 महीने में 26 मर्डर, पुलिस कमिश्नर सिस्टम पर उठ रहे सवाल
भूपेश बोले प्यादों को मिली सजा, सीएम ने कहा दिमागी नक्सलियों का आतंक को आसरा
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