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NEWS IN SHORT
- कवर्धा जिले में करीब 7 करोड़ रुपए का धान गायब होने का मामला सामने आया है।
- संग्रहण केंद्र प्रभारी प्रीतेश पांडेय को निलंबित कर दिया गया है।
- जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा को भ्रामक बयान देने पर शोकॉज नोटिस जारी किया गया है।
- बाजार चारभांठा और बघर्रा धान खरीदी केंद्र से करीब 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई।
- कांग्रेस ने मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
NEWS IN DETAIL
कवर्धा जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2024–25 के दौरान धान संग्रहण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जिले के दो धान खरीदी केंद्रों से करीब 26 हजार क्विंटल धान खराब या गायब पाया गया है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 7 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस गंभीर मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए संग्रहण केंद्र प्रभारी प्रीतेश पांडेय को निलंबित कर दिया है।
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि कवर्धा ब्लॉक के बाजार चारभांठा और पंडरिया ब्लॉक के बघर्रा धान खरीदी केंद्र में भारी अनियमितता हुई है। धान की कमी उजागर होने के बाद पहले प्रीतेश पांडेय को प्रभारी पद से हटाया गया था, अब उन्हें निलंबन का आदेश जारी किया गया है। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है।
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DMO के बयान पर विवाद
इस बीच जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा द्वारा दिए गए बयान ने विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने मीडिया से कहा था कि धान चूहे, दीमक, कीड़े और मौसम की खराबी के कारण नष्ट हो सकता है। प्रशासन ने इस बयान को भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना मानते हुए उन्हें शोकॉज नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बाजार चारभांठा संग्रहण केंद्र में धान की कमी का मुख्य कारण ‘सूखत’ है, न कि चूहों या कीड़ों द्वारा धान खाया जाना। उन्होंने पिछले पांच वर्षों के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2024–25 में सूखत केवल 3.5 प्रतिशत रही है, जो पिछले पांच सालों में सबसे कम है।
विपक्ष का विरोध
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मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कलेक्टर और DMO से शिकायत की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला विपणन कार्यालय पहुंचकर नारेबाजी की और प्रतीकात्मक रूप से चूहा पकड़ने का पिंजरा सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है।
Sootr Knowledge
- धान संग्रहण के दौरान ‘सूखत’ एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें नमी कम होने से वजन घटता है।
- खरीफ विपणन वर्ष में धान की खरीदी और भंडारण की जिम्मेदारी जिला विपणन विभाग की होती है।
- धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ी सीधे किसानों और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाती है।
- जांच पूरी होने से पहले अधिकारियों के बयान प्रशासनिक अनुशासन के दायरे में आते हैं।
- ऐसे मामलों में निलंबन और शोकॉज नोटिस प्रारंभिक कार्रवाई मानी जाती है।
IMP FACTS
- कुल धान खरीदी केंद्र: 108
- प्रभावित केंद्र: बाजार चारभांठा और बघर्रा
- धान की कमी: करीब 26 हजार क्विंटल
- अनुमानित नुकसान: लगभग 7 करोड़ रुपए
- खरीफ विपणन वर्ष: 2024–25
आगे क्या
- जांच समिति दोनों केंद्रों की भौतिक और दस्तावेजी जांच करेगी।
- जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय की जाएगी।
- जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर या रिकवरी की कार्रवाई हो सकती है।
- DMO के जवाब के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय होगी।
- राज्य स्तर पर भी मामले की समीक्षा संभव है।
निष्कर्ष
कवर्धा धान घोटाला का यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का बड़ा उदाहरण बन गया है। 7 करोड़ रुपए के संभावित नुकसान ने न सिर्फ सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीति भी गर्मा दी है। अब सबकी नजरें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद तय होगा कि दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।
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