छत्तीसगढ़ की करेंगुट्टा पहाड़ी बना देश का सबसे बड़ा IED डेथ ट्रैप
Aishwarya Dwivedi | May 10, 2026, 14:20 IST
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दंतेवाड़ा के करेंगुट्टा में सरेंडर नक्सली ने 1500 आईईडी दबे होने का खुलासा किया है। सुरक्षा बल अब बस्तर की कश्मीर घाटी कहे जाने वाले इस इलाके को बम मुक्त करने के चुनौतीपूर्ण मिशन में जुटे हैं।
NEWS IN SHORT
- करेंगुट्टा पहाड़ी पर 1500 से अधिक घातक आईईडी का जाल।
- हर 30 मीटर की दूरी पर बिछी है बारूदी सुरंग।
- सरेंडर नक्सली बारसा देवा ने किया खौफनाक साजिश का खुलासा।
- सुरक्षा बल डी-माइनिंग के लिए मानसून का कर रहे इंतजार।
- 5.5 करोड़ से निर्मित सड़क बनी बस्तर की कश्मीर घाटी।
NEWS IN DETAIL
हर 30 मीटर पर मौत का इंतजाम
क्या है आईईडी और क्यों है यह इतना घातक
यह पैर हटाने या तार खींचने पर सक्रिय होता है। इसे किसी भी डिब्बे, पाइप या गड्ढे में छिपाया जा सकता है, जिससे मेटल डिटेक्टरों को चकमा देना आसान हो जाता है।
ऑपरेशन डी-माइन: बारिश का इंतजार
1. मिट्टी की नरमी: बारिश के कारण जमीन नरम हो जाती है, जिससे विस्फोटक की गंध ऊपर आती है और खोजी कुत्तों (के-9 यूनिट) के लिए उसे ढूंढना आसान हो जाता है।
2. ब्लास्ट इंटेंसिटी: नमी के कारण बारूद की तीव्रता में थोड़ी कमी आती है, जो जवानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है।
बस्तर की कश्मीर घाटी की ओर बढ़ते कदम
चुनौती बड़ी है—एक तरफ विकास की पक्की सड़क है और दूसरी तरफ जमीन के नीचे दबा 1500 बमों का जखीरा। सुरक्षाबलों का लक्ष्य अब इस सुंदर घाटी को बारूद के बोझ से मुक्त कर पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित बनाना है।
FAQ
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली के अनुसार, यहाँ लगभग 50 किमी के दायरे में 1500 से ज्यादा आईईडी लगाए गए हैं, यानी हर 30 मीटर पर एक बम।
2. सुरक्षा बल बारिश का इंतजार क्यों कर रहे हैं?
बारिश में मिट्टी नरम होने से खोजी कुत्तों को विस्फोटकों की गंध आसानी से आती है और नमी की वजह से ब्लास्ट का असर भी कम हो जाता है।
3. बस्तर की कश्मीर घाटी कहाँ बन रही है?
गलगम से करेंगुट्टा तक 5.5 करोड़ की लागत से बन रही खूबसूरत घुमावदार सड़क और प्राकृतिक दृश्यों के कारण इसे 'बस्तर की कश्मीर घाटी' कहा जा रहा है।
4. आईईडी (IED) क्या होता है?
यह एक देसी बम है जिसे नक्सली खाद और जिलेटिन से तैयार करते हैं। यह पैर पड़ते ही या तार खींचने पर सक्रिय हो जाता है, जो बेहद जानलेवा है।
निष्कर्ष
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