कोरबा मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नदारद, दोस्त बना डॉक्टर, ड्रेसिंग करते वीडियो वायरल
VINAY VERMA | May 09, 2026, 11:29 IST
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कोरबा मेडिकल कॉलेज में बड़ी लापरवाही सामने आई है। ड्यूटी से स्टाफ गायब रहने पर दोस्त ने मरीज की ड्रेसिंग की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
छत्तीसगढ़ के कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी दावों की चमक उतार दी है। जहां मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां एक मरीज के दोस्त को खुद ड्रेसिंग करनी पड़ी। वजह यह थी कि जिम्मेदार स्टाफ नदारद था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि मरीज का साथी ही मेडिकल सामग्री लेकर ड्रेसिंग कर रहा है, जबकि अस्पताल का सिस्टम तमाशबीन बना हुआ है।
रामपुर निवासी हुकुम कुमार का कुछ दिन पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पथरी का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद टांकों में दर्द और परेशानी बढ़ने लगी, जिसके बाद वह अपने दोस्त चंदन कुमार के साथ अस्पताल पहुंचा। पट्टी खोलकर डॉक्टर ने जांच की और दोबारा ड्रेसिंग कराने के लिए ड्रेसिंग रूम भेजा गया।
लेकिन वहां लंबे समय तक कोई जिम्मेदार स्टाफ नहीं मिला। कई बार बुलाने के बाद भी कोई स्टाफ नहीं आया। मौजूद लोग या तो मेरा काम नहीं कहकर पल्ला झाड़ लेते या इंतजार करने की सलाह दे देते। ऐसे में मरीज दर्द से कराहता रहा। आखिरकार दोस्त चंदन कुमार ने खुद ही मरीज की ड्रेसिंग शुरू कर दी। इसी दौरान किसी ने पूरा घटनाक्रम मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। अब यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
मामला तूल पकड़ने के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सह अधीक्षक रविकांत जाटवर मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कराई। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से सफाई दी गई कि ड्रेसिंग रूम में कर्मचारी मौजूद था और उसने मरीज के दोस्त को ऐसा करने से मना भी किया था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कर्मचारी मौजूद था तो मरीज का दोस्त ड्रेसिंग कैसे करने लगा? क्या अस्पताल में मरीजों की निगरानी और सुरक्षा का कोई सिस्टम नहीं है? क्या कोई भी व्यक्ति इलाज कक्ष में घुसकर मेडिकल प्रक्रिया कर सकता है? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रशासन फिलहाल देने से बचता नजर आ रहा है।
यह घटना सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की असली तस्वीर है। करोड़ों रुपए खर्च करने के दावे करने वाले अस्पतालों में यदि मरीजों को खुद या उनके परिजनों को इलाज करना पड़े, तो फिर सिस्टम पर भरोसा कैसे किया जाए?
मरीजों का कहना है कि अस्पताल में अक्सर स्टाफ की कमी, लापरवाही और अव्यवस्था देखने को मिलती है। कई बार मरीज घंटों तक इंतजार करते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी अपनी सीट से गायब रहते हैं।
फिलहाल अस्पताल प्रबंधन जांच की बात कह रहा है, लेकिन ऐसे मामलों में अक्सर जांच फाइलों में दब जाती है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती। वायरल वीडियो ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही भी ICU में पहुंच चुकी है।
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पथरी का हुआ था ऑपरेशन
लेकिन वहां लंबे समय तक कोई जिम्मेदार स्टाफ नहीं मिला। कई बार बुलाने के बाद भी कोई स्टाफ नहीं आया। मौजूद लोग या तो मेरा काम नहीं कहकर पल्ला झाड़ लेते या इंतजार करने की सलाह दे देते। ऐसे में मरीज दर्द से कराहता रहा। आखिरकार दोस्त चंदन कुमार ने खुद ही मरीज की ड्रेसिंग शुरू कर दी। इसी दौरान किसी ने पूरा घटनाक्रम मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। अब यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
वीडियो वायरल होते ही अधिकारियों की नींद टूटी
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कर्मचारी मौजूद था तो मरीज का दोस्त ड्रेसिंग कैसे करने लगा? क्या अस्पताल में मरीजों की निगरानी और सुरक्षा का कोई सिस्टम नहीं है? क्या कोई भी व्यक्ति इलाज कक्ष में घुसकर मेडिकल प्रक्रिया कर सकता है? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रशासन फिलहाल देने से बचता नजर आ रहा है।
अस्पताल में इलाज या भगवान भरोसे व्यवस्था
मरीजों का कहना है कि अस्पताल में अक्सर स्टाफ की कमी, लापरवाही और अव्यवस्था देखने को मिलती है। कई बार मरीज घंटों तक इंतजार करते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी अपनी सीट से गायब रहते हैं।
जांच का भरोसा, लेकिन कार्रवाई पर सवाल
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