कुशाभाऊ ठाकरे विवि में फर्जीवाड़ा? कुलपति जोशी की पीएम मोदी से शिकायत

VINAY VERMA | Aug 18, 2026, 19:05 IST
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डॉ. सच्चिदानंद जोशी की पीएम मोदी से शिकायत
डॉ. सच्चिदानंद जोशी की पीएम मोदी से शिकायत

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय की शिक्षक भर्ती पर गंभीर सवाल उठे हैं। अयोग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाने और अंकों में कथित हेराफेरी के आरोप हैं। सांसद सुधाकर सिंह ने कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी की शिकायत पीएम मोदी से की है।

Raipur। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति अब सवालों के घेरे में है। मामला सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों को ज्यादा या कम अंक देने तक सीमित नहीं है। भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, अयोग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाने और चयन में कथित पक्षपात के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतों की जांच हुई और लोकायुक्त तक मामला पहुंचा। जांच में चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे। इस समय विवि के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी की भूमिका और संलिप्तता पर सवाल उठा है। बक्सर,बिहार के सांसद सुधाकर सिंह ने पीएम मोदी से शिकायत की है।

80-20 के नियम पर ही खेल

विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 5 मार्च 2005 की बैठक के निर्णय के मुताबिक भर्ती में अकादमिक उपलब्धि और अनुभव के लिए 80% अंक तथा इंटरव्यू के लिए 20% अंक निर्धारित थे। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने इस व्यवस्था का सही तरीके से पालन नहीं किया। इंटरव्यू से पहले विषयवार अंकों का स्पष्ट निर्धारण भी नहीं किया गया।

स्क्रूटनी में अयोग्य, फिर भी इंटरव्यू

सबसे बड़ा सवाल स्क्रूटनी प्रक्रिया पर है। जिन अभ्यर्थियों को स्क्रूटनी कमेटी ने निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने के कारण अयोग्य माना, उन्हें भी इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। आरोप है कि इनमें से कुछ अभ्यर्थी बाद में चयन सूची में भी शामिल हुए। यानी जिस प्रक्रिया में पहले ही योग्यता की जांच होनी थी, उसी के फैसले को दरकिनार कर आगे की प्रक्रिया बढ़ाई गई।

मण्डावी को अंक देने पर सवाल

व्याख्याता जनसंपर्क एवं विज्ञापन पद से जुड़े आशुतोष मण्डावी के मामले में भी अंकों को लेकर सवाल उठे। आरोप है कि तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर निर्धारित 5 अंक की जगह 8 अंक दिए गए। एक साल के अनुभव के बावजूद 2 अंक दिए गए, जबकि निर्धारित व्यवस्था के मुताबिक अनुभव के लिए 0.5 अंक प्रतिवर्ष का प्रावधान बताया गया है। अवार्ड, फेलोशिप और सेमिनार-कॉन्फ्रेंस के लिए भी दस्तावेजी आधार पर सवाल उठाए गए हैं।

अयोग्य पाण्डेय फिर चयनित

रीडर पत्रकारिता पद के अभ्यर्थी पंकज नयन पाण्डेय को स्क्रूटनी कमेटी ने अयोग्य घोषित किया था। इसके बावजूद उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और बाद में चयन किया गया। आरोप यह भी है कि शोध पत्र प्रकाशित नहीं होने के बावजूद पेपर पब्लिकेशन के लिए अंक दिए गए।

विभाष झा पर भी वही सवाल

रीडर जनसंपर्क पद के अभ्यर्थी विभाष झा को भी स्क्रूटनी कमेटी ने अयोग्य माना था। आरोप है कि निर्धारित योग्यता पूरी नहीं होने के बावजूद उन्हें इंटरव्यू में शामिल किया गया और चयन सूची में जगह मिली। इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए। विभाष झा बता रहे हैं कि मैं योग्यता रखता था, नेट भी क्वॉलिफाई था, लेकिन मुझतक समय पर जानकारी ही नहीं पहुंची। जब तक इन तमाम चीजों के बारे मे पता चलता बहुत देर हो चुकी थी। मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ।

शिकायतकर्ता को अनुभव का भी लाभ नहीं

शैलेन्द्र खण्डेलवाल की शिकायत में भी अंकों में भारी अंतर का आरोप है। 13 साल के अनुभव के आधार पर निर्धारित 5 अंकों की जगह सिर्फ 2 अंक दिए जाने की बात सामने आई। सेमिनार-कॉन्फ्रेंस, शोध पत्र, पुस्तक प्रकाशन और मीडिया प्रोडक्शन के लिए भी कम अंक देने का आरोप है। उनके पास चार शोध पत्र, तीन डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण, एनसीसी ‘सी’ प्रमाणपत्र और राष्ट्रीय फेलोशिप जैसी उपलब्धियां होने का दावा किया गया, लेकिन कई मदों में शून्य या बेहद कम अंक दिए गए।

जांच में उठी उंगलियां

तत्कालीन सचिव निधि छिब्बर की जांच रिपोर्ट और लोकायुक्त की कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया। उपलब्ध शिकायत और जांच संबंधी दस्तावेजों के अनुसार, तत्कालीन कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी की अध्यक्षता वाली चयन समिति पर अंकों के निर्धारण और भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात व हेराफेरी के आरोपों को गंभीर माना गया।

लोकायुक्त ने बताई आगे की राह

लोकायुक्त ने 80% अकादमिक अंकों का दोबारा मूल्यांकन कर नई मेरिट सूची तैयार करने की अनुशंसा की थी। साथ ही पुनर्मूल्यांकन में अयोग्य पाए जाने वाले पूर्व चयनित शिक्षकों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की बात कही गई। अब असली सवाल यही है कि भर्ती में नियमों की अनदेखी हुई तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? और जिन उम्मीदवारों को गलत तरीके से फायदा मिला, उनके चयन का क्या होगा?

कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय की यह भर्ती अब सिर्फ पुरानी नियुक्तियों का मामला नहीं रह गई है। यह सवाल विश्वविद्यालय की भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी है। जांच और लोकायुक्त की अनुशंसाओं के बाद अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि नियम सिर्फ कागज पर थे या वास्तव में लागू भी हुए।

FAQ

  1. कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय की भर्ती पर क्या आरोप हैं?
    भर्ती में नियमों की अनदेखी और अयोग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाने के आरोप हैं। अंकों के निर्धारण में कथित गड़बड़ी के सवाल भी उठे हैं।
  2. डॉ. सच्चिदानंद जोशी की शिकायत किससे की गई है?
    बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की है।
  3. लोकायुक्त ने भर्ती मामले में क्या अनुशंसा की थी?
    लोकायुक्त ने 80 प्रतिशत अकादमिक अंकों के पुनर्मूल्यांकन की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर नई मेरिट सूची तैयार करने की बात भी कही गई।

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