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@अरुण तिवारी
Raipur. छत्तीसगढ़ में भगवान राम का धर्म के साथ बड़ा गहरा सियासी रिश्ता भी है। इसके बाद भी बीजेपी सरकार राम के काम में आराम कर रही है। दो साल बाद भी राम अपने ननिहाल नहीं पहुंच पाए हैं। सत्ता संभालते ही बीजेपी सरकार ने कहा था कि कौशल्या धाम में भगवान राम की 51 फीट की नई प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
जो प्रतिमा अभी वहां पर है उसमें राम की महिमा के हिसाब की झलक नजर नहीं आती। लेकिन इस बात को दो साल हो गए हैं लेकिन प्रतिमा कहां है और कब आएगी इसका कोई पता ही नहीं है। यह मामला इसलिए चर्चा में आया है क्योंकि इसको लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सीएम को चिट्ठी लिखी है।
वहीं विधानसभा के विशेष सत्र में अजय चंद्राकर ने यह मामला उठाया था। राम की नई प्रतिमा के साथ राम वनगमन पथ में हुए खर्च की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई है। अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया था कि भूपेश सरकार में राम के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। यह जांच अजय चंद्राकर कमेटी ही कर रही है।
राम के काम में आराम :
छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। यहां पर राम की माता कौशिल्या का मायका है। इसलिए यहां कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ का भांजा राम यानी राम छत्तीसगढ़ के भांजे हैं। राम के नाम के सहारे फर्श से अर्श पर पहुंची बीजेपी की छत्तीसगढ़ सरकार ही राम के काम में आराम बरत रही है।
राजधानी रायपुर के पास चंद्रखुरी स्थित माता कौशल्या धाम परिसर में भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची नई मूर्ति दो साल बाद भी नहीं लग पाई है। विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने मूर्ति के स्वरूप और राम वनगमन पथ निर्माण में घोटाले के मुद्दे को लेकर विधानसभा में सवाल उठाए थे। सत्ता में आने के बाद भी प्रभु श्रीराम की नई मूर्ति लगाने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। बीजेपी को सत्ता में आए दो साल गुजर जाने के बाद भी नई मूर्ति का अता-पता नहीं है।
भगवान राम की नई मूर्ति को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भी लिखा था। विधानसभा के 14 से 16 दिसंबर तक हुए विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ विजन 2047 की चर्चा के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने भी नई मूर्ति का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। तब विधानसभा में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सात दिनों में मूर्ति लगाने का वादा किया था, लेकिन उनका वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है।
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राम की प्रतिमा को लेकर विवाद :
कौशल्या धाम में प्रभु श्रीराम की मूर्ति को लेकर शुरू से विवाद रहा है। दरअसल तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय कौशल्या धाम परिसर का जीर्णोद्धार किया गया और वर्ष 2021 में 51 फीट ऊंची श्रीराम की प्रतिमा लगाई गई थी। उस समय राम वन पथ गमन और कौशल्या धाम जीर्णोद्धार को तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने एक ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में प्रचारित भी किया था।
उस समय विपक्ष में रही बीजेपी ने शुरू से ही भगवान राम की 51 फीट ऊंची मूर्ति को लेकर आपत्ति जताई थी। बीजेपी नेताओं ने कहा था कि यह प्रतिमा राम की तरह मनमोहक नहीं है। इसके लिए 51 फीट की नई प्रतिमा बनाने का काम ग्वालियर के मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा को दिया गया है।
लेकिन अब तक यह सिर्फ जुबानी जमा खर्च ही साबित हुआ है। बीजेपी ने प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे। अब बीजेपी की सरकार है, लेकिन सरकार के दो साल बीतने के बाद भी नई मूर्ति नहीं लग पाने से बीजेपी नेताओं में नाराजगी है। अब कार्यकर्ता भी सवाल उठा रहे हैं।
मूर्तिकार को नहीं हुआ पूरा भुगतान :
छत्तीसगढ़ सरकार के श्री राम वन पथ गमन प्रोजेक्ट में और ज्यादा देरी होने की स्थिति बन गई है। कहा जा रहा है कि मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा ने ठेकेदार के सामने शर्त रखी है कि उन्हें चंद्रखुरी स्थित कौशल्या मन्दिर में मूर्ति स्थापना की जगह पूरी तरह साफ चाहिए। ठेकेदार को बताया गया है कि मौके पर स्थापित भगवान राम की मूर्ति को हटाकर ही वनवासी स्वरूप वाली इस मूर्ति को स्थापित किया जा सकेगा।
ऐसे में यदि पुरानी मूर्ति नहीं हटाई गई तो यह नई मूर्ति स्थापित होने में देरी होगी। अभी तक कौशल्या धाम में पहले लगी भगवान राम की 51 फीट की प्रतिमा को कब हटाया जाएगा और इतनी विशाल प्रतिमा को कहां रखा जाएगा इसको लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
जांच भी ठंडे बस्ते में :
सरकार ने इन सभी कामों की जांच के लिए अजय चंद्राकर की अध्यक्षता में सात सदस्यों की कमेटी गठित की है। यह कमेटी हर स्थान का फिजिकल वैरीफिकेशन करेगी।
ये है अजय चंद्राकर कमेटी :
अजय चंद्राकर _ अध्यक्ष
सदस्य _ राघवेंद्र कुमार सिंह विधायक
डॉ एलएस निगम _ वरिष्ठ इतिहासकार
पीसी पारिख _ उप संचालक,पुरातत्व संचालनालय
प्रभात कुमार _ पुरातत्ववेत्ता
एसके टीकाम_जल संसाधन विभाग
शशांक सिंह _ जल संसाधन विभाग
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छत्तीसगढ़ में वनवास के दौरान भगवान राम ने लंबा वक्त बिताया है। छत्तीसगढ़ में ही राम का ननिहाल भी है। राम के नाम का यह दोहरा पुण्य छत्तीसगढ़ के हिस्से में आया है। वनवास के दौरान जहां जहां राम के चरण पड़े वो राम वन गमन पथ कहलाता है। भूपेश सरकार ने राम वन गमन पथ पर 81 करोड़ खर्च किए। बाकी इसके आयोजनों पर भी खूब खर्च किया गया।
छत्तीसगढ़ में ऐसे दस स्थानों को चिन्हित किया गया जहां से श्रीराम गुजरे थे। इन स्थानों के विकास पर ही यह पैसा खर्च किया गया। लेकिन पिछली सरकार के पांच साल में राम का काम आधा अधूरा ही हो पाया। राम के वनवास के नाम पर चंद एजेंसियां मालामाल हो गईं। राम के नाम पर इन एजेंसियों ने 71 करोड़ रुपए कमा लिए।
यहीं से राम नाम पर हुए खर्च पर सवाल उठने लगे। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएँ हुईं, जिनमें से कुछ एजेंसियों को भुगतान पहले ही कर दिया गया था, जबकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण नहीं किया गया।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि जिन कंपनियों को काम सौंपा गया था, वे कांग्रेस नेताओं के करीबियों से ताल्लुक रखती थीं और इन कंपनियों ने पेटी कांट्रैक्ट के जरिए काम कराया, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई।
सरकार का दावा जल्द लगेगी प्रतिमा :
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल कहते हैं कि भगवान राम की पुरानी मूर्ति की जगह नई मूर्ति लगानी है। ठेकेदार को मूर्ति का पूरा भुगतान हो चुका है। मूर्तिकार को जब आदेश होगा, तब मूर्ति स्थापित कर दी जाएगी। चूंकि अभी खरमास चल रहा है, इसलिए खरमास के बाद नई मूर्ति की स्थापना की जाएगी। मूर्ति के ऊंचाई कम नहीं की गई है।
नई मूर्ति अलग-अलग हिस्सों में तैयार की गई है, जिसे जोड़कर स्थापित किया जाएगा। पुरानी मूर्ति को कहां स्थापित किया जाएगा इस पर भी विचार विमर्श किया गया है।
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