छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलाज और पढ़ाई दोनों वेंटिलेटर पर
Umeshwari Baghel | Jun 28, 2026, 17:55 IST
छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में संकट
छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी गंभीर होती जा रही है। पिछले छह वर्षों में 550 से अधिक डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। इसका मुख्य कारण कम वेतन, समय पर प्रमोशन नहीं मिलना और ट्रांसफर को लेकर अनिश्चितता बताया जा रहा है।
समझें क्या है पूरा मामला
डॉक्टरों के इस्तीफे का सीधा असर एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई, क्लीनिकल ट्रेनिंग और अस्पताल सेवाओं पर पड़ रहा है। कई कॉलेजों में विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से विभागों का संचालन प्रभावित हो रहा है।
नौकरी छोड़ने के प्रमुख कारण
कई डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें पदोन्नति की प्रक्रिया में लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं ट्रांसफर नीति को लेकर स्थिरता नहीं होने से भी असंतोष बढ़ता है। इसके अलावा निजी और अन्य राज्यों में बेहतर अवसर भी एक कारण बन रहे हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, लगातार अस्थिर सेवा वातावरण से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थायी फैकल्टी बनाए रखना चुनौती बन गया है।
सीटें बढ़ीं, लेकिन फैकल्टी नहीं
इस असंतुलन के कारण कॉलेज प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की संख्या जरूरत के अनुसार नहीं बढ़ाई जा सकी है।
कई पद खाली, व्यवस्था पर दबाव
इन रिक्तियों के कारण न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है बल्कि अस्पतालों में मरीजों के इलाज की व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। कई विभागों में एक ही फैकल्टी पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ रही है।
भर्ती और प्रशासनिक चुनौतियां
इसके अलावा 2022 के बाद भर्ती प्रक्रिया में गति आई है, लेकिन जमीनी स्तर पर नियुक्तियों में देरी बनी हुई है। इससे नए डॉक्टरों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
प्रोमोशन और ट्रांसफर से जुड़ी स्थिति
इसके अलावा करीब 80 असिस्टेंट प्रोफेसर अभी प्रोबेशन पीरियड में हैं और कई कॉलेजों में प्रभारी व्यवस्था के तहत संचालन हो रहा है। चार मेडिकल कॉलेज फिलहाल प्रभारी डीन के भरोसे चल रहे हैं। इस तरह की प्रशासनिक अस्थिरता भी डॉक्टरों में असंतोष का कारण बन रही है।
नए मेडिकल कॉलेजों की चुनौती
पड़ोसी राज्यों से तुलना
छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में संकट
विभाग का पक्ष
IMP FACTS
छोड़ने वालों में नियमित और संविदा दोनों प्रकार के डॉक्टर शामिल हैं।
प्रमुख कारण: कम वेतन, प्रमोशन में देरी और ट्रांसफर की अनिश्चितता।
राज्य में एमबीबीएस सीटें बढ़ी हैं, लेकिन फैकल्टी सेटअप उसी अनुपात में नहीं बढ़ा।
प्रोफेसर के 241 पदों में 117 खाली हैं।
एसोसिएट प्रोफेसर के 399 में 196 पद रिक्त हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर के 644 में 332 पद खाली हैं।
सीनियर रेजिडेंट के 518 में 375 पद खाली हैं।
कई मेडिकल कॉलेज प्रभारी डीन के भरोसे चल रहे हैं।
हालिया भर्ती में 125 पदों के लिए विज्ञापन, करीब 60 चयनित हुए।
चयनित डॉक्टरों को अभी तक पोस्टिंग आदेश नहीं मिले हैं।
नए मेडिकल कॉलेजों की योजना है, लेकिन फैकल्टी की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
निष्कर्ष
FAQ
- छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टर क्यों नौकरी छोड़ रहे हैं?
डॉक्टर कम वेतन, समय पर प्रमोशन न मिलने और ट्रांसफर की अनिश्चित नीति के कारण नौकरी छोड़ रहे हैं। - कितने डॉक्टर पिछले 6 साल में नौकरी छोड़ चुके हैं?
पिछले छह वर्षों में 550 से अधिक डॉक्टर सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सेवा छोड़ चुके हैं। - क्या इससे मेडिकल शिक्षा और मरीजों पर असर पड़ रहा है?
हां, फैकल्टी की कमी से एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई और अस्पतालों में इलाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
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