संकट में छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज, लाखों के पैकेज पर भी नहीं मिले विशेषज्ञ डॉक्टर

Aishwarya Dwivedi | Jun 05, 2026, 13:03 IST
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छत्तीसगढ़ में 2 लाख 5 हजार तक के पैकेज और प्राइवेट प्रैक्टिस की छूट के बाद भी विशेषज्ञ डॉक्टर संविदा भर्ती के कारण नए मेडिकल कॉलेजों में जाने को तैयार नहीं हैं, जिससे 150 में से 149 पद खाली पड़े हैं।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ के पांच नए मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों का भारी अकाल।
  • ढाई लाख के भारी पैकेज के बाद भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिले।
  • विज्ञापन के बावजूद 150 पदों में से 149 पद आज भी खाली।
  • संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) भर्ती नीति बनी डॉक्टरों की बेरुखी की मुख्य वजह।
  • फैकल्टी की कमी से नए मेडिकल कॉलेजों की एनएमसी मान्यता पर संकट।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को शुरू करने के सरकार के दावों को बड़ा झटका लगा है। सरकार द्वारा ढाई लाख रुपये तक के भारी-भरकम सैलरी पैकेज और प्राइवेट प्रैक्टिस की छूट दिए जाने के बावजूद, विशेषज्ञ डॉक्टर इन कॉलेजों में जाने को तैयार नहीं हैं।

स्थिति इतनी गंभीर है कि एक महीने पहले निकाले गए 150 विशेषज्ञ पदों में से 149 पद आज भी खाली पड़े हैं। इसके चलते चिकित्सा शिक्षा विभाग को महज एक महीने के भीतर दोबारा विज्ञापन जारी करना पड़ा है।

संविदा भर्ती बनी सबसे बड़ी बाधा

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सोलंकी के अनुसार, डॉक्टरों की इस बेरुखी की सबसे बड़ी वजह संविदा नियुक्ति (कॉन्ट्रैक्ट बेसिस) होना है। डॉक्टर केवल एक साल की अस्थायी नौकरी के लिए अपने जमे-जमाए करियर को छोड़कर दूरदराज के इलाकों में नहीं जाना चाहते।

डॉ. सोलंकी ने बताया कि प्रदेश में डॉक्टरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन साल 2020 के बाद से मेडिकल कॉलेजों में लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से कोई नियमित भर्ती नहीं हुई है। यदि सरकार पीएससी के जरिए स्थायी (परमानेंट) पदों पर भर्ती निकाले, तो डॉक्टर तुरंत शामिल होने के लिए तैयार हैं।

आकर्षक पैकेज भी बेअसर

Attractive Packages Fail to Entice
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सरकार ने विशेष रूप से अनुसूचित और दूरस्थ क्षेत्रों (दंतेवाड़ा, जशपुर, मनेंद्रगढ़) में डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए बड़ा वित्तीय ऑफर दिया था, जो इस प्रकार है:

  • प्रोफेसर (प्राध्यापक) - 2 लाख 25 हजार प्रति माह
  • सह-प्राध्यापक - 1 लाख 85 हजार प्रति माह
  • सहायक प्राध्यापक - 1,25,000 प्रति माह
  • सीनियर रेजिडेंट - 95,000 प्रति माह

शून्य रहा भर्ती का नतीजा

Recruitment Outcome
Recruitment Outcome


चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 5 मई 2026 को विज्ञापन जारी कर 15 और 16 मई को राजधानी रायपुर में वॉक-इन-इंटरव्यू आयोजित किए थे। उम्मीद थी कि बड़े पैकेज को देखकर पद भर जाएंगे, लेकिन 3 जून को विभाग द्वारा दोबारा जारी किए गए विज्ञापन ने हकीकत बयां कर दी:

  • प्रोफेसर : 35 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया, एक भी नहीं मिला (35 पद अब भी खाली)।
  • सह-प्राध्यापक : 40 पदों में से एक भी पद नहीं भरा जा सका।
  • सहायक प्राध्यापक : 50 पदों में से एक भी डॉक्टर ने जॉइन नहीं किया*।
  • सीनियर रेजिडेंट : 25 पदों में से सिर्फ 1 पद भरा जा सका (24 पद खाली)।
  • कुल स्थिति : 150 पदों में से 149 पद जस के तस खाली हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

दांव पर लगी है NMसी की मान्यता

इन पांचों नए मेडिकल कॉलेजों—दंतेवाड़ा, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, मनेंद्रगढ़ और कुनकुरी—के संचालन के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की हरी झंडी मिलना अनिवार्य है। एनएमसी के नियमों के मुताबिक, कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी और प्रोफेसरों का होना अनिवार्य है।

यदि तय समय सीमा में इन पदों को नहीं भरा गया, तो एनएमसी इन कॉलेजों को 'जीरो ईयर' घोषित कर सकता है, जिससे सत्र की शुरुआत अधर में लटक जाएगी। यही कारण है कि विभाग ने आनन-फानन में दोबारा विज्ञापन जारी कर 15 जून तक फिर से आवेदन मंगाए हैं।

इन 8 प्रमुख विभागों में होनी है नियुक्तियां

कुल 149 रिक्त पदों पर एनॉटामी, फिजियोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी लैब, माइक्रोबायोलॉजी, फोरेंसिक मेडिसिन और कम्युनिटी मेडिसिन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में प्रोफेसरों से लेकर सीनियर रेजिडेंट्स की तैनाती की जानी है। अब देखना यह होगा कि क्या जून के इस दोबारा प्रयास में डॉक्टर संविदा शर्तों के साथ इन कॉलेजों का रुख करते हैं या सरकार को अपनी नीति बदलनी पड़ेगी।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में भारी सैलरी पैकेज के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की भर्ती पूरी तरह विफल रही है। इसका मुख्य कारण संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) नीति है, जिससे विशेषज्ञ असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यदि सरकार ने जल्द ही पीएससी के माध्यम से स्थायी भर्ती शुरू नहीं की, तो नए कॉलेजों की एनएमसी मान्यता रद्द हो सकती है।

FAQ

  1. छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में अभी क्या समस्या चल रही है?
    उत्तर: छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों (दंतेवाड़ा, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, मनेंद्रगढ़ और कुनकुरी) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी हो गई है। सरकार ने ढाई लाख रुपये तक के भारी सैलरी पैकेज और प्राइवेट प्रैक्टिस की छूट देने का दावा किया था, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर यहाँ काम करने को तैयार नहीं हैं। एक महीने पहले निकाले गए 150 पदों में से 149 पद आज भी खाली पड़े हैं।
  2. मई में हुए वॉक-इन-इंटरव्यू का अंतिम परिणाम क्या रहा?
    उत्तर: भारी-भरकम सैलरी पैकेज के बावजूद भर्ती का नतीजा पूरी तरह शून्य रहा। प्रोफेसर के 35, सह-प्राध्यापक के 40 और सहायक प्राध्यापक के 50 पदों पर एक भी डॉक्टर ने जॉइन नहीं किया। सीनियर रेजिडेंट के 25 पदों में से सिर्फ 1 पद भरा जा सका। इसी कारण चिकित्सा शिक्षा विभाग को महज एक महीने के भीतर 3 जून को दोबारा विज्ञापन जारी करना पड़ा है।
  3. यदि डॉक्टरों के पद खाली रहे, तो मेडिकल कॉलेजों पर क्या असर पड़ेगा?
    उत्तर: अगर 15 जून की नई समय सीमा तक ये पद नहीं भरे गए, तो इन पांचों नए मेडिकल कॉलेजों की एनएमसी (NMC) मान्यता रद्द हो सकती है। नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के अनुसार कॉलेजों के संचालन के लिए पर्याप्त फैकल्टी और प्रोफेसर होना अनिवार्य है। डॉक्टरों की कमी के कारण एनएमसी इन्हें 'जीरो ईयर' घोषित कर सकता है, जिससे यहाँ इस साल नया शैक्षणिक सत्र (सत्र की शुरुआत) अधर में लटक जाएगा।

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