मंत्रालय में फूटा कर्मचारियों का गुस्सा: 700 कर्मियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
VINAY VERMA | Jun 25, 2026, 21:39 IST
मंत्रालय कर्मचारियों की आंदोलन की चेतावनी 2026
छत्तीसगढ़ मंत्रालय में कर्मचारियों का असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। महानदी भवन में आयोजित मंत्रालय कर्मचारी संघ की आम सभा में करीब 700 कर्मचारियों ने हिस्सा लेकर लंबित सेटअप आदेश, ई-ऑफिस के कारण बढ़े कार्यभार पर नाराजगी जताई।
छत्तीसगढ़ मंत्रालय में कर्मचारियों का असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। महानदी भवन में छत्तीसगढ़ मंत्रालय कर्मचारी संघ की आम सभा में करीब 700 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। सभा में कर्मचारियों ने शासन की नीतियों और कुछ अधिकारियों की कार्यशैली के खिलाफ नाराजगी जताई। कर्मचारियों के तेवर देखकर साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में मंत्रालय में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
कर्मचारियों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण विधानसभा से पारित होने के बावजूद लंबित पड़े सेटअप आदेश हैं। मंत्रालय में नए सेटअप को केंद्रीय सचिवालय की तर्ज पर लागू करने की तैयारी चल रही है। लेकिन इसे लेकर कर्मचारियों के बीच कई तरह की आशंकाएं हैं।
सभा में कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से इस मामले में स्पष्टता नहीं है। इससे कर्मचारियों में भ्रम और असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि शासन को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
आम सभा में सामान्य प्रशासन विभाग के एक उप सचिव के खिलाफ भी खुलकर नाराजगी सामने आई। कर्मचारियों ने उन पर कर्मचारी-विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। सभा में उनके स्थानांतरण की मांग प्रमुखता से उठी।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने मांग की कि सामान्य प्रशासन विभाग के महत्वपूर्ण कक्ष-8 में अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की पदस्थापना की जाए। कर्मचारियों का कहना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया बेहतर होगी और समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा।
कर्मचारियों का गुस्सा केवल सेटअप तक सीमित नहीं है। ई-ऑफिस के जरिए लगातार जारी हो रहे पत्रों और बढ़ते कार्यभार को लेकर भी नाराजगी सामने आई। वहीं विभागों में बढ़ रही आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर भी कर्मचारियों ने कड़ा विरोध जताया।
कर्मचारियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग के कारण नियमित पदों का महत्व कम हो रहा है। इससे विभागीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों को भी भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस हो रही है।
द सूत्र ने पहले ही मंत्रालय और विभागों में बढ़ती संविदा एवं आउटसोर्सिंग भर्तियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। खबरों में बताया गया था कि लगातार आउटसोर्सिंग बढ़ने से नियमित भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसका असर सीधे युवाओं पर पड़ सकता है। सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के अवसर कम हो सकते हैं। वहीं नियमित कर्मचारियों में भी असंतोष बढ़ सकता है। अब मंत्रालय कर्मचारी संघ की आम सभा में उठी नाराजगी ने द सूत्र की उन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।
आम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। कर्मचारियों ने शासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
कर्मचारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर मंत्रालय में तालाबंदी जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। ऐसे में अब सबकी नजर शासन के अगले कदम पर है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो मंत्रालय की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और सरकार को नए संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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लंबित सेटअप आदेश बना मुद्दा
सभा में कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से इस मामले में स्पष्टता नहीं है। इससे कर्मचारियों में भ्रम और असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि शासन को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
उप सचिव को हटाने की मांग
इसके साथ ही कर्मचारियों ने मांग की कि सामान्य प्रशासन विभाग के महत्वपूर्ण कक्ष-8 में अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की पदस्थापना की जाए। कर्मचारियों का कहना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया बेहतर होगी और समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा।
आउटसोर्सिंग और ई-ऑफिस ने बढ़ाया असंतोष
कर्मचारियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग के कारण नियमित पदों का महत्व कम हो रहा है। इससे विभागीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों को भी भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस हो रही है।
द सूत्र ने पहले ही उठाया था मुद्दा
इसका असर सीधे युवाओं पर पड़ सकता है। सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के अवसर कम हो सकते हैं। वहीं नियमित कर्मचारियों में भी असंतोष बढ़ सकता है। अब मंत्रालय कर्मचारी संघ की आम सभा में उठी नाराजगी ने द सूत्र की उन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।
मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन
कर्मचारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर मंत्रालय में तालाबंदी जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। ऐसे में अब सबकी नजर शासन के अगले कदम पर है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो मंत्रालय की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और सरकार को नए संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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