छत्तीसगढ़ में 20 हजार निकाय कर्मचारियों की हड़ताल, शहर में सफाई-पानी व्यवस्था ठप
VINAY VERMA | Aug 06, 2026, 14:37 IST
निकाय प्लेसमेंट कर्मचारियों की हड़ताल
छत्तीसगढ़ के 192 नगरीय निकायों के 20 हजार प्लेसमेंट कर्मचारी 'समान काम, समान वेतन' और संविदा दर की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर हैं। इससे शहरों में सफाई और पानी व्यवस्था चरमरा सकती है।
RAIPUR : छत्तीसगढ़ की नगरीय व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। प्रदेश के नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में काम करने वाले करीब 20 हजार प्लेसमेंट और आउटसोर्स कर्मचारी गुरुवार से बेमियादी हड़ताल पर उतर गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार एक ही विभाग में दो तरह की व्यवस्था चला रही है। कुछ कर्मचारियों को संविदा दर पर वेतन दिया जा रहा है, जबकि वर्षों से काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को आज भी कलेक्टर दर पर मजदूरी मिल रही है।
छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय प्लेसमेंट कर्मचारी महासंघ के बैनर तले आंदोलन की शुरुआत रायपुर के तूता धरना स्थल से हुई है। पहले चरण में संभाग स्तरीय प्रदर्शन रखा गया है, लेकिन इसका असर पूरे प्रदेश के 192 नगरीय निकायों तक पहुंचेगा। महासंघ ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार मांगों पर फैसला नहीं लेती, तब तक कर्मचारी काम पर नहीं लौटेंगे।
महासंघ का सबसे बड़ा सवाल सरकार से यही है। संगठन का कहना है कि नगरीय प्रशासन संचालनालय के यांत्रिकी प्रकोष्ठ में प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए रखे गए कंप्यूटर ऑपरेटर, वाहन चालक और अन्य कर्मचारियों को 24 अगस्त 2023 के आदेश के तहत संविदा दर से वेतन दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में 15 से 20 साल से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को आज भी कलेक्टर दर पर भुगतान किया जा रहा है। आखिर एक ही विभाग में दो नियम क्यों लागू हैं?
![निकाय कर्मचारियों की हड़ता]()
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने शहरों की व्यवस्था संभालने में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी। सफाई से लेकर जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, वाहन संचालन और कार्यालयीन काम तक हर जिम्मेदारी निभाई। इसके बावजूद उन्हें नियमित या संविदा कर्मचारियों के बराबर वेतन नहीं मिला। उनका कहना है कि सरकार काम तो स्थायी कर्मचारियों जैसा लेती है, लेकिन भुगतान दिहाड़ी मजदूर की तरह करती है।
अगर हड़ताल लंबी चली तो सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को होगी। शहरों में कचरा उठाने की व्यवस्था प्रभावित होगी। कई जगह सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है। पानी की सप्लाई, स्ट्रीट लाइट की मरम्मत, कार्यालयों का कामकाज और अन्य जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। प्रदेश के 14 नगर निगम, 54 नगर पालिका और 124 नगर पंचायतों की व्यवस्थाएं इस आंदोलन से प्रभावित हो सकती हैं।
महासंघ ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, सभी प्लेसमेंट कर्मचारियों को संचालनालय की तरह संविदा दर पर वेतन दिया जाए। दूसरी, नगरीय निकायों में नए श्रम कानूनों को पूरी तरह लागू किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि समान काम के बदले समान वेतन का अधिकार मांग रहे हैं।
यह आंदोलन सरकार के लिए सिर्फ कर्मचारियों की नाराजगी नहीं, बल्कि नगरीय प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो शहरों की मूलभूत सेवाएं प्रभावित होंगी। विपक्ष को भी सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मुद्दा मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार बातचीत से रास्ता निकालती है या आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।
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तूता से शुरू हुई आर-पार की लड़ाई
एक विभाग... फिर दो वेतनमान क्यों?
निकाय कर्मचारियों की हड़ता
15 साल की सेवा, फिर भी मजदूर जैसा दर्जा
अब शहरों पर पड़ेगा सीधा असर
सिर्फ दो मांगें, लेकिन फैसला बड़ा
सरकार की अग्निपरीक्षा शुरू
FAQ
- छत्तीसगढ़ में निकाय कर्मचारी हड़ताल पर क्यों हैं?
उत्तर: कर्मचारी समान काम के लिए समान वेतन और संविदा दर पर भुगतान की मांग कर रहे हैं। वे कलेक्टर दर पर मिल रहे वेतन का विरोध कर रहे हैं। - निकाय कर्मचारी हड़ताल से कौन-कौन सी सेवाएं प्रभावित होंगी?
उत्तर: हड़ताल से शहरों में कचरा उठान, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट मरम्मत और निकायों का दफ्तरी काम प्रभावित होगा। - छत्तीसगढ़ में निकाय कर्मचारी हड़ताल में कुल कितने कर्मचारी शामिल हैं?
उत्तर: इस बेमियादी आंदोलन में प्रदेश के 192 निकायों के लगभग 20 हजार प्लेसमेंट और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं।
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