NRDA के नोटिस से मचा हड़कंप, 35 घरों पर चस्पा हुए नोटिस, गांव में दहशत
VINAY VERMA | Jul 03, 2026, 23:23 IST
NRDA का नोटिस: टूटा गांव में घरों को लेकर दहशत
नकटी के बाद अब तूता गांव के 35 मकानों पर NRDA ने अतिक्रमण का नोटिस चस्पा किया है। 6 जुलाई तक जवाब न देने पर बुलडोजर कार्रवाई के डर से ग्रामीण दहशत में हैं।
रायपुर नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई का विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब राजधानी से लगे तूता गांव में नया बवाल खड़ा हो गया है। NRDA की टीम ने गांव के 35 मकानों पर नोटिस चस्पा कर दिए हैं। नोटिस में ग्रामीणों से 6 जुलाई तक जवाब मांगा गया है। लेकिन सवाल यह है कि जिन परिवारों ने 25 से 50 साल तक यहां जिंदगी गुजारी, क्या उन्हें अब अचानक अपने ही घर का सबूत देना पड़ेगा? यही सवाल अब तूता गांव की गलियों में गूंज रहा है।
30 जून 2026 को जारी NRDA के नोटिस में ग्रामीणों पर प्राधिकरण की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है। नोटिस में 6 जुलाई 2026 तक जवाब देने का समय दिया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय पर जवाब नहीं दिया गया तो एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
यही शब्द अब ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा डर बन गए हैं। उनका कहना है कि नकटी में भी पहले नोटिस लगे थे और उसके बाद बुलडोजर चला। इसलिए तूता में नोटिस को लोग महज कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि कार्रवाई की पहली सीढ़ी मान रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे 25 से 50 वर्षों से यहां रह रहे हैं। कई परिवारों की पूरी पीढ़ी इसी गांव में पली-बढ़ी है। बच्चों का जन्म यहीं हुआ, बुजुर्गों ने यहीं जिंदगी बिताई और अब अचानक उन्हें बताया जा रहा है कि उनका घर कथित अतिक्रमण पर बना है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन पर कब्जा अवैध था तो दशकों तक प्रशासन खामोश क्यों रहा? अब अचानक नोटिस देकर लोगों के सिर पर बेघर होने का खतरा क्यों मंडरा रहा है?
![NRDA के नोटिस से मचा हड़कंप]()
ग्रामीणों के मुताबिक NRDA ने एक-दो नहीं बल्कि 35 मकानों पर नोटिस चस्पा किए हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नोटिस मिलने से पूरे गांव का माहौल बदल गया है। हर गली, हर चौपाल और हर घर में सिर्फ इसी कार्रवाई की चर्चा है। महिलाएं बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं तो बुजुर्ग अपने जीवनभर की कमाई से बने घर को बचाने की चिंता में डूबे हैं।
ग्रामीणों को दिए गए नोटिस में कहा गया है कि उन्होंने NRDA की भूमि पर निर्माण कर अतिक्रमण किया है। एक नोटिस के अनुसार संबंधित व्यक्ति पर लगभग 700 वर्गफीट क्षेत्र में पक्का मकान बनाने का आरोप लगाया गया है। नोटिस में कहा गया है कि संबंधित पक्ष 6 जुलाई को सुबह 11 बजे कार्यालय में उपस्थित होकर अपना जवाब प्रस्तुत करे, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नकटी में हुई कार्रवाई के बाद अब तूता में नोटिस ने यह बहस फिर छेड़ दी है कि क्या विकास परियोजनाओं की कीमत गांवों को उजाड़कर चुकाई जाएगी? ग्रामीणों का कहना है कि वे कार्रवाई का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने और पुनर्वास का भरोसा मिलना चाहिए।
फिलहाल तूता गांव में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ नोटिस है या बुलडोजर आने से पहले की अंतिम चेतावनी? नकटी के बाद तूता में पसरा सन्नाटा यही कहानी बयां कर रहा है।
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बुलडोजर की दस्तक मान रहे ग्रामीण
यही शब्द अब ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा डर बन गए हैं। उनका कहना है कि नकटी में भी पहले नोटिस लगे थे और उसके बाद बुलडोजर चला। इसलिए तूता में नोटिस को लोग महज कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि कार्रवाई की पहली सीढ़ी मान रहे हैं।
50 साल पुराने आशियानों पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन पर कब्जा अवैध था तो दशकों तक प्रशासन खामोश क्यों रहा? अब अचानक नोटिस देकर लोगों के सिर पर बेघर होने का खतरा क्यों मंडरा रहा है?
35 घरों में चस्पा हुए नोटिस, पूरे गांव में बेचैनी
NRDA के नोटिस से मचा हड़कंप
ग्रामीणों के मुताबिक NRDA ने एक-दो नहीं बल्कि 35 मकानों पर नोटिस चस्पा किए हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नोटिस मिलने से पूरे गांव का माहौल बदल गया है। हर गली, हर चौपाल और हर घर में सिर्फ इसी कार्रवाई की चर्चा है। महिलाएं बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं तो बुजुर्ग अपने जीवनभर की कमाई से बने घर को बचाने की चिंता में डूबे हैं।
नोटिस में क्या लिखा है?
नकटी के बाद अब तूता... अगला कौन?
फिलहाल तूता गांव में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ नोटिस है या बुलडोजर आने से पहले की अंतिम चेतावनी? नकटी के बाद तूता में पसरा सन्नाटा यही कहानी बयां कर रहा है।
FAQ
- तुता गांव में किस सरकारी संस्था द्वारा नोटिस जारी किया गया है और इसका मुख्य कारण क्या है?
उ. यह नोटिस NRDA (नवा रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी / नई राजधानी विकास प्राधिकरण) द्वारा जारी किया गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि प्राधिकरण ने ग्रामीणों पर अपनी सुरक्षित या आवंटित भूमि पर अवैध रूप से निर्माण (अतिक्रमण) करने का गंभीर आरोप लगाया है। - प्राधिकरण (NRDA) ने यह नोटिस कब जारी किया है और ग्रामीणों को अपना पक्ष रखने के लिए कितनी समय-सीमा (डेडलाइन) दी गई है?
उ. NRDA द्वारा यह आधिकारिक नोटिस 30 जून 2026 को जारी किया गया है। इसके तहत प्रभावित ग्रामीणों को 6 जुलाई 2026 को सुबह 11:00 बजे तक प्राधिकरण के कार्यालय में उपस्थित होकर अपना लिखित या मौखिक जवाब प्रस्तुत करने की अंतिम समय-सीमा दी गई है। - तुता गांव के निवासी इस कार्रवाई का विरोध किस आधार पर कर रहे हैं और वे वहां कितने समय से बसे हुए हैं?
उ. ग्रामीणों का तर्क है कि वे इस जगह पर पिछले 25 से 50 वर्षों (दशकों) से रह रहे हैं और उनकी पूरी पीढ़ी यहीं पली-बढ़ी है। उनका सवाल यह है कि यदि उनका आशियाना अवैध था, तो इतने दशकों तक प्रशासन और संबंधित विभाग पूरी तरह खामोश क्यों रहा?
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