छत्तीसगढ़ में 10 करोड़ का कृषि घोटाला, खिलौने के टेंडर से खरीदी गई खाद

Aishwarya Dwivedi | Aug 06, 2026, 10:21 IST
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ऑर्गेनिक खेती में खाद खरीद का घोटाला
ऑर्गेनिक खेती में खाद खरीद का घोटाला

छत्तीसगढ़ में जैविक खेती के 10 करोड़ के बजट में बड़ा घोटाला हुआ है। अफसरों ने टेंडर की कैटेगरी बदलकर बीज निगम से दोगुने-तिगुने दामों पर खाद और कृषि सामग्री खरीदी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जैविक खेती के बजट में बड़ा घोटाला आया सामने।
  • बीज निगम से दोगुने दाम पर खरीदी गई खाद।
  • खिलौने और गिफ्ट कैटेगरी में निकाला खाद टेंडर।
  • अफसरों की साठगांठ से चहेतों को बांटे करोड़ों।
  • नियमों को ताक पर रखकर दिया गया ठेका।

10 करोड़ का बजट और अफसरों का खेल

छत्तीसगढ़ में परंपरागत कृषि विकास योजना और जैविक खेती मिशन में बड़ा घोटाला सामने आया है। वर्ष 2026-27 के लिए जिलों को 10 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इस बजट का उपयोग जैविक खेती से जुड़ी सामग्री खरीदने के लिए होना था। लेकिन अधिकारियों और चुनिंदा कंपनियों ने मिलकर इस राशि में भारी बंदरबांट कर डाली।

टेंडर की कैटेगरी बदलकर प्रतिस्पर्धा खत्म की

इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए टेंडर प्रक्रिया में ही बड़ी गड़बड़ी की गई। जिलों में टेंडर निकालते समय खाद और कृषि सामग्री की सही कैटेगरी दर्ज नहीं की गई। इसकी जगह दिव्यांगजन सामग्री, उपहार सामग्री और बैडमिंटन रैकेट जैसी अनुचित श्रेणियां चुनी गईं। इसका सीधा उद्देश्य अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर रखना था।

दो चहेती कंपनियों में बांटे गए सात जिलों के टेंडर

कैटेगरी बदलने की वजह से सामान्य कृषि आपूर्तिकर्ता कंपनियों को टेंडर का पता ही नहीं चल सका। सिर्फ वही कंपनियां टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सकीं, जिन्हें इसकी पहले से जानकारी थी। इस तरीके से प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। इसके बाद सात जिलों के टेंडर सिर्फ दो चहेती कंपनियों में बांट दिए गए।

बीज निगम से दोगुने-तीन गुने रेट पर खरीदी

सरकारी नियमों के तहत कृषि सामग्री की खरीदी राज्य बीज निगम के तय दरों के अनुसार होनी चाहिए। लेकिन गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM – Government e Marketplace) के जरिए की गई इस खरीदी में सभी सामान बीज निगम की दरों से दोगुने या तीन गुने अधिक रेट पर खरीदे गए।

जैविक खेती में करोड़ों का घोटाला
जैविक खेती में करोड़ों का घोटाला


खाद और दवाओं के दामों में भारी अंतर

उदाहरण के तौर पर जिस जैविक खाद की 25 किलो की बोरी बीज निगम में 471 रुपए की थी, उसे 1100 रुपए में खरीदा गया। 199 रुपए प्रति लीटर वाला जिंक घुलनशील जीवाणु 330 रुपए में खरीदा गया। पोटेशियम गतिशील जीवाणु भी 199 रुपए की जगह 330 रुपए में लिया गया।

इसी प्रकार 109 रुपए प्रति किलो मिलने वाला माइकोराइजा 245 रुपए में खरीदा गया। 176 रुपए का ट्राइकोर्मा 272 रुपए और 200 रुपए वाला जिंक सल्फेट 400 रुपए में खरीदा गया। पेंडिमेथालिन की कीमत भी 450 रुपए की जगह 780 रुपए दर्ज की गई।

दंतेवाड़ा, कोंडागांव और कोरबा में अनियमितता

जिलों के अनुसार खरीदी का पैटर्न देखें तो दंतेवाड़ा में 97 लाख रुपए का काम एक ही फर्म को दिया गया। इस फर्म ने 15 तरह के सामान बीज निगम से दोगुने से अधिक दाम पर सप्लाई किए।

कोंडागांव जिले में 1.10 करोड़ रुपए का काम उसी फर्म को दिया गया। यहां जेम पोर्टल पर कैटेगरी बदलने के कारण योग्य कंपनियां बोली में भाग नहीं ले सकीं।

कोरबा जिले में 48 लाख रुपए का ठेका एक अन्य इंडस्ट्री को दिया गया। यह कंपनी पहले से ही जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF – District Mineral Foundation) घोटाले की जांच के दायरे में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED – Enforcement Directorate) इस कंपनी के ठिकानों पर पहले भी छापे मार चुका है। इसके बावजूद इसे फिर से नया काम सौंप दिया गया।

सरकारी खजाने को पहुंचाया गया करोड़ों का नुकसान

पूरे मामले से स्पष्ट है कि अधिकारियों ने जानबूझकर टेंडर नियमों का उल्लंघन किया। इस तरह सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है। किसान कल्याण और कृषि विकास के लिए आई राशि का गलत इस्तेमाल किया गया है।

FAQ

  1. टेंडर प्रक्रिया में अफसरों ने क्या चालाकी की?
    उत्तर: अफसरों ने खाद के टेंडर में दिव्यांगजन सामग्री और बैडमिंटन रैकेट जैसी गलत कैटेगरी डाल दी। इससे दूसरी कंपनियां टेंडर में हिस्सा नहीं ले सकीं।
  2. खाद और कृषि सामग्री की खरीदी में कितना अंतर आया?
    उत्तर: बीज निगम की तय दरों के मुकाबले जेम पोर्टल से दोगुने और तिगुने दामों पर खरीदी की गई।
  3. सरकारी रेट और खरीदी के रेट में कितना अंतर था?
    उत्तर: सामान बीज निगम की निर्धारित दरों से दोगुने और तीन गुने ऊंचे दामों पर खरीदा गया।

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