बस्तर में पोस्टिंग राजधानी में निवास! एडिशनल एसपी की नई पोस्टिंग की पुलिस मुख्यालय से लेकर थानों तक चर्चा
VINAY VERMA | Nov 03, 2026, 10:43 IST
नारायणपुर से बालोद भेजे गए अफसर, महादेव सट्टा ऐप मामले और जगरगुंडा पोस्टिंग को लेकर फिर उठी चर्चा
छत्तीसगढ़ पुलिस के 33 अधिकारियों की नई तबादला सूची में एक नाम ऐसा है, जिसकी पोस्टिंग ने पुराने मामलों की चर्चा फिर शुरू कर दी है। नाम है अभिषेक माहेश्वरी का। नारायणपुर की 16वीं वाहिनी में उप सेनानी की जिम्मेदारी संभाल रहे माहेश्वरी को अब बालोद की 21वीं वाहिनी में भेजा गया है।
यह सामान्य प्रशासनिक फेरबदल दिखता है, लेकिन उनके पुराने पदस्थापना रिकॉर्ड और महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में सामने आए आरोपों के कारण इस बदलाव पर सवाल उठ रहे हैं। बस्तर से बालोद पहुंचने के बाद वे राजधानी रायपुर के भी पहले से ज्यादा करीब हो गए हैं।
माहेश्वरी को 6 मार्च 2024 के शासनादेश के तहत सुकमा जिले के जगरगुंडा कैंप में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया था। 10 मार्च को पुलिस मुख्यालय से कार्यमुक्त होने के बाद उन्होंने 16 मार्च को वहां आमद दी। जगरगुंडा नक्सल प्रभावित और संवेदनशील इलाका है। यहां तैनात अधिकारी पर अभियान की निगरानी और फोर्स मूवमेंट जैसे अहम कामों की जिम्मेदारी होती है।
लेकिन इस पदस्थापना के दौरान उनके राजधानी में रहने का मामला भी सामने आया। उपलब्ध पदस्थापना दस्तावेजों और 10 जुलाई 2024 के बस्तर आईजी के पत्र से जुड़े विवरणों के मुताबिक, माहेश्वरी 2 अप्रैल से 10 मई 2024 तक विवेचना संबंधी काम के लिए मौखिक अनुमति के आधार पर रायपुर में मौजूद रहे। इसके अलावा 6 से 8 जुलाई तक न्यायालयीन पेशी के सिलसिले में बलौदाबाजार और रायपुर में उनकी मौजूदगी का भी उल्लेख है।
सवाल यह है कि नक्सल प्रभावित इलाके में तैनात अधिकारी को करीब डेढ़ महीने तक राजधानी में रहने की अनुमति किसने दी? क्या इसके लिए लिखित आदेश जारी हुआ था या मौखिक अनुमति से ही काम चलाया गया? बस्तर में तैनाती के बाद आमतौर पर अधिकारियों को लंबे समय तक वहीं जिम्मेदारी निभानी होती है। ऐसे में यह मामला पुलिस की कमांड व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़ा है।
माहेश्वरी का नाम महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में भी सामने आया था। प्रवर्तन निदेशालय की अभियोजन शिकायत में दर्ज बयानों के मुताबिक, निलंबित एएसआई चंद्रभूषण वर्मा ने अपने बयान में माहेश्वरी को हर महीने 35 लाख रुपये दिए जाने की बात कही थी। शिकायत में सट्टा नेटवर्क को कथित संरक्षण देने और रायपुर में फ्लैट खरीदने के लिए रकम उपलब्ध कराने से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया था।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि अभियोजन शिकायत में दर्ज बयान अपने आप में आरोप है, कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं। इसकी जांच और अदालत में आरोपों की पुष्टि अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। लेकिन इतनी बड़ी रकम के कथित लेन-देन का जिक्र किसी पुलिस अधिकारी के नाम के साथ आना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बस्तर में पोस्टिंग के दौरान वहां रहने की अवधि को लेकर कोई लिखित नियम नहीं है। हालांकि, सामान्य परंपरा के अनुसार, तीन साल से पहले बस्तर से वापसी मुश्किल होती है। विशेष परिस्थितियों में कुछ ही दिनों में वापसी संभव है।
मार्च 2025 में महादेव सट्टा मामले की जांच के सिलसिले में सीबीआई की टीम माहेश्वरी के राजनांदगांव स्थित आवास पहुंची थी। घर बंद मिलने पर टीम ने उसे सील कर दिया। अगले दिन टीम फिर पहुंची और दस्तावेजों की जांच की। इस कार्रवाई के बाद भी यह सवाल बना रहा कि मामले में जांच की स्थिति क्या है और अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
पिछली सरकार के दौरान माहेश्वरी की प्रशासनिक पहुंच और पुलिस महकमे में उनके कथित प्रभाव को लेकर चर्चाएं होती रही थीं। कुछ अधिकारियों के नेटवर्क और सत्ता के करीबी माने जाने वाले लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे। हालांकि, इन चर्चाओं को किसी आधिकारिक जांच का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
अब सरकार बदल चुकी है। पुलिस मुख्यालय में भी नई प्रशासनिक व्यवस्था है। ऐसे में सवाल है कि क्या बालोद में नई जिम्मेदारी देने से पहले माहेश्वरी के पुराने पदस्थापना रिकॉर्ड और महादेव सट्टा मामले में सामने आए आरोपों की समीक्षा की गई? क्या जगरगुंडा में मौखिक अनुमति से राजधानी में रहने के मामले में कोई जवाबदेही तय हुई? और सीबीआई की कार्रवाई के बाद जांच कहां तक पहुंची?
नारायणपुर से बालोद तक का तबादला भले ही एक प्रशासनिक आदेश हो, लेकिन इसके साथ जुड़े पुराने सवालों के जवाब अब भी बाकी हैं। पुलिस मुख्यालय की चुप्पी के बीच नई पोस्टिंग ने इन सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
बस्तर में पोस्टिंग, राजधानी में मौजूदगी
लेकिन इस पदस्थापना के दौरान उनके राजधानी में रहने का मामला भी सामने आया। उपलब्ध पदस्थापना दस्तावेजों और 10 जुलाई 2024 के बस्तर आईजी के पत्र से जुड़े विवरणों के मुताबिक, माहेश्वरी 2 अप्रैल से 10 मई 2024 तक विवेचना संबंधी काम के लिए मौखिक अनुमति के आधार पर रायपुर में मौजूद रहे। इसके अलावा 6 से 8 जुलाई तक न्यायालयीन पेशी के सिलसिले में बलौदाबाजार और रायपुर में उनकी मौजूदगी का भी उल्लेख है।
सवाल यह है कि नक्सल प्रभावित इलाके में तैनात अधिकारी को करीब डेढ़ महीने तक राजधानी में रहने की अनुमति किसने दी? क्या इसके लिए लिखित आदेश जारी हुआ था या मौखिक अनुमति से ही काम चलाया गया? बस्तर में तैनाती के बाद आमतौर पर अधिकारियों को लंबे समय तक वहीं जिम्मेदारी निभानी होती है। ऐसे में यह मामला पुलिस की कमांड व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़ा है।
महादेव सट्टा मामले में 35 लाख रुपये का जिक्र
यहां ध्यान देने वाली बात है कि अभियोजन शिकायत में दर्ज बयान अपने आप में आरोप है, कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं। इसकी जांच और अदालत में आरोपों की पुष्टि अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। लेकिन इतनी बड़ी रकम के कथित लेन-देन का जिक्र किसी पुलिस अधिकारी के नाम के साथ आना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।
तीन साल बस्तर में रहने की परंपरा
सीबीआई की टीम घर तक पहुंची
पुराने सवाल, नई जिम्मेदारी
अब सरकार बदल चुकी है। पुलिस मुख्यालय में भी नई प्रशासनिक व्यवस्था है। ऐसे में सवाल है कि क्या बालोद में नई जिम्मेदारी देने से पहले माहेश्वरी के पुराने पदस्थापना रिकॉर्ड और महादेव सट्टा मामले में सामने आए आरोपों की समीक्षा की गई? क्या जगरगुंडा में मौखिक अनुमति से राजधानी में रहने के मामले में कोई जवाबदेही तय हुई? और सीबीआई की कार्रवाई के बाद जांच कहां तक पहुंची?
नारायणपुर से बालोद तक का तबादला भले ही एक प्रशासनिक आदेश हो, लेकिन इसके साथ जुड़े पुराने सवालों के जवाब अब भी बाकी हैं। पुलिस मुख्यालय की चुप्पी के बीच नई पोस्टिंग ने इन सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
- महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में माहेश्वरी का नाम क्यों आया है?
महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में माहेश्वरी का नाम सामने आने का कारण यह है कि एक निलंबित एएसआई के बयान में उन्हें हर महीने 35 लाख रुपये दिए जाने का उल्लेख किया गया है, जिससे उन पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने सट्टा नेटवर्क को संरक्षण दिया। - जगरगुंडा में पोस्टिंग के दौरान
अभिषेक माहेश्वरी रायपुर में क्यों रहे थे?
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, वे 2 अप्रैल से 10 मई 2024 तक विवेचना संबंधी काम के लिए मौखिक अनुमति के आधार पर रायपुर में मौजूद रहे थे। - सीबीआई की टीम ने अभिषेक माहेश्वरी के घर पर क्या कार्रवाई की थी?
घर बंद मिलने पर सीबीआई की टीम ने उसे सील कर दिया था। अगले दिन टीम दोबारा पहुंची और दस्तावेजों की जांच की थी।
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