अब इलाज के लिए नहीं भटकेंगे एमपी पुलिस के जवान, पड़ोसी राज्यों के बड़े अस्पताल भी पैनल में शामिल, परोपकार निधि बढ़कर हुई 5 लाख

Aman Vaishnav | Nov 03, 2026, 10:32 IST
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एमपी पुलिस कल्याण समिति की बैठक में पुलिस हेल्थ प्लान के विस्तार और परोपकार निधि को बढ़ाकर 5 लाख करने सहित कई बड़े कल्याणकारी फैसले लिए गए।
एमपी पुलिस कल्याण समिति की बैठक में पुलिस हेल्थ प्लान के विस्तार और परोपकार निधि को बढ़ाकर 5 लाख करने सहित कई बड़े कल्याणकारी फैसले लिए गए।

मध्य प्रदेश पुलिस के डीजीपी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पुलिस हेल्थ प्लान का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया गया है। अब प्रदेश की सीमा से लगे राज्यों के बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को भी पैनल में जोड़ा जाएगा। फिलहाल 64 अस्पताल अनुबंधित हैं। इनमें 11 अस्पताल दूसरे राज्यों में हैं।

सीमावर्ती जिलों के पुलिसकर्मियों को इमरजेंसी में नागपुर, कोटा, वडोदरा, झांसी या दिल्ली जाना पड़ता है। इस नए फैसले से इन अस्पतालों में जवानों को सीधी राहत मिलेगी।

जवान की तबीयत बिगड़ी, तो इलाज के लिए कहां जाएं?

दरअसल सोमवार, 02 नवंबर को आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में बैठक हुई थी। यह बैठक राज्य संयुक्त पुलिस परामर्शदात्री एवं कल्याण समिति की वार्षिक थी। इसकी अध्यक्षता डीजीपी ने की थी। इसी बैठक में मध्यप्रदेश पुलिस हेल्थ प्लान (MP Police Health Plan ) का दायरा बढ़ाने का अहम फैसला लिया गया। इस योजना के तहत परिजनों को इलाज के बिल और कागजी प्रक्रिया से भी राहत मिलेगी।

इमरजेंसी में इलाज के लिए करना पड़ता है लंबा सफर

सीमावर्ती जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों को इमरजेंसी में इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उन्हें नागपुर, कोटा, वडोदरा, झांसी या दिल्ली का रुख करना पड़ता है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में हार्ट, किडनी, कैंसर और ब्रेन जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज होता है। ऐसे में लंबा सफर अपने आप में बड़ी चुनौती बन जाता है। इस दौरान परिवार भी मानसिक दबाव से गुजरता है।

एमपी प्री PG काउंसलिंग: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए 30% सीटों की सीमा तय | MP Pre PG Counseling: High Court's Big Decision, 30% Seat Limit Set for In-Service Doctors
एमपी प्री PG काउंसलिंग में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए 30% सीटों की सीमा तय
02 Nov 2026 ,
By Neel Tiwari
मध्य प्रदेश में प्री PG मेडिकल (MD/MS) काउंसलिंग का पहला चरण जारी है। इसी बीच जबलपुर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। यह आदेश चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने दिया। पीठ ने ओपन कैटेगरी के अभ्यर्थियों की याचिका WP 44909/2026 पर सुनवाई की। इसमें सेवारत डॉक्टरों के लिए सीट आवंटन की सीमा निर्धारित की गई है।
मध्य प्रदेश में प्री PG मेडिकल (MD/MS) काउंसलिंग का पहला चरण जारी है। इसी बीच जबलपुर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। यह आदेश चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने दिया। पीठ ने ओपन कैटेगरी के अभ्यर्थियों की याचिका WP 44909/2026 पर सुनवाई की। इसमें सेवारत डॉक्टरों के लिए सीट आवंटन की सीमा निर्धारित की गई है।

अब बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा

फिलहाल पुलिस हेल्थ प्लान के तहत 64 अस्पताल अनुबंधित हैं। इनमें 11 अस्पताल प्रदेश के बाहर हैं। जिन अस्पतालों से अनुबंध नहीं होता, वहां इलाज का खर्च परिजनों को खुद उठाना पड़ता है। अब सीमावर्ती राज्यों के प्रमुख अस्पतालों को पैनल में जोड़ने की तैयारी है। इससे पुलिसकर्मी और उनके परिवार इमरजेंसी में ज्यादा आसानी से इलाज करा सकेंगे।

इलाज के बिल भरने से लेकर पैसे वापस लेने तक परेशानी

अनुबंधित अस्पताल नहीं होने पर परिजनों को इलाज के भारी-भरकम बिल पहले खुद चुकाने पड़ते थे। इसके बाद पैसे वापस लेने के लिए रीइंबर्समेंट की लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। रीइंबर्समेंट का मतलब है कि इलाज का खर्च पहले खुद भरना और बाद में उसे वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करना।

नई व्यवस्था से सीधे मिलेगी राहत

नए फैसले से इन अस्पतालों में इलाज कराने वाले जवानों को सीधी राहत मिलेगी। उन्हें इलाज के खर्च और कागजी प्रक्रिया की परेशानी से छुटकारा मिल सकेगा।

बीमा दावों में परेशानी न हो, इसलिए एसपी करेंगे निगरानी

डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि आश्रित परिवारों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। आकस्मिक स्थिति या सेवा के दौरान निधन होने पर बीमा दावों में भी दिक्कत नहीं आनी चाहिए। इसके लिए सभी एसपी और इकाई प्रमुख नियमित रूप से खुद निगरानी करेंगे।

परोपकार निधि से मिलने वाली सहायता राशि भी एक लाख रुपए से बढ़ाकर पांच लाख रुपए कर दी गई है।

पुलिस परिवारों के बच्चों को पढ़ाई में मिलेगी मदद

प्रदेश की 86 इकाइयों में चल रहे दिशा केंद्र अब सिर्फ लाइब्रेरी तक सीमित नहीं रहेंगे। इन्हें कोचिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां बाहर से विशेषज्ञ शिक्षक बुलाए जाएंगे।

दिशा केंद्रों में बच्चों को स्पोकन इंग्लिश और ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा भी मिलेगी। पिछले साल दिशा लर्निंग सेंटर्स के जरिए 300 से ज्यादा बच्चों ने सफलता हासिल की थी। ये सभी पुलिस परिवारों के बच्चे थे, जिन्होंने अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाई।

मध्यप्रदेश में मकान बनाने के नियम बदले: 2152 वर्गफीट तक के लिए ऑनलाइन फीस पर मिलेगी मंजूरी, छोटे कामों के लिए नहीं लेनी होगी अनुमति | Madhya Pradesh House Building Rules Changed: Approval for up to 2152 sq ft on Online Fee, No Permission Needed for Minor Works
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02 Nov 2026 ,
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अपना घर बनाना हर परिवार का सपना होता है, लेकिन प्लॉट खरीदने के बाद नक्शा पास कराने और निर्माण की अनुमति लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना बड़ी परेशानी बन जाता है। अब मध्यप्रदेश सरकार इस प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी कर रही है। नए नियम लागू हुए तो 2152 वर्गफीट तक के मकान के लिए नगर निगम या नगरपालिका के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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तनाव कम करने के लिए शुरू होंगे परामर्श केंद्र

पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए संस्थागत परामर्श केंद्र शुरू किए जाएंगे। साथ ही हार्टफुलनेस के सहयोग से ध्यान, योग और प्राणायाम के नियमित सत्र चलाए जाएंगे। इनका मकसद पुलिसकर्मियों का मानसिक तनाव कम करना है। इन सत्रों को रोजमर्रा की ड्यूटी का हिस्सा भी बनाया जा सकता है।

1,694 बच्चों को मिली 5.45 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति

चालू वित्तीय वर्ष में शिक्षा निधि से 1,694 बच्चों को छात्रवृत्ति दी गई है। इन बच्चों को कुल 5.45 करोड़ रुपए मिले। इसी दौरान 1,701 लाभार्थियों को 5.24 करोड़ रुपए की सहायता भी दी गई है।

खातेगांव टीआई दिलीप पुरी की श्रद्धांजलि से बैठक की शुरुआत

जानकारी के अनुसार बैठक की शुरुआत श्रद्धांजलि के साथ हुई थी। इसमें देवास के खातेगांव थाना प्रभारी स्वर्गीय निरीक्षक दिलीप पुरी को श्रद्धांजलि दी गई थी।

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02 Nov 2026 ,
By Aman Vaishnav
मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना अब महिलाओं को आर्थिक मदद देने तक सीमित नहीं है। सर्वे में दावा किया गया है कि इस योजना से महिलाएं कारोबार की तरफ भी बढ़ रही हैं। सर्वे में योजना शुरू होने से पहले और बाद के हालात की तुलना की गई है। इसके आंकड़े महिलाओं की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव को समझने में मदद करते हैं।
मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना अब महिलाओं को आर्थिक मदद देने तक सीमित नहीं है। सर्वे में दावा किया गया है कि इस योजना से महिलाएं कारोबार की तरफ भी बढ़ रही हैं। सर्वे में योजना शुरू होने से पहले और बाद के हालात की तुलना की गई है। इसके आंकड़े महिलाओं की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव को समझने में मदद करते हैं।

यह खबर क्यों जरूरी है

पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार ड्यूटी करते हैं। ऐसे में उनके इलाज और परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की है। सीमावर्ती जिलों में इलाज के लिए दूर जाने की मजबूरी खत्म होना पुलिसकर्मियों के साथ आम लोगों के भरोसे से भी जुड़ा है। बेहतर इलाज और कागजी प्रक्रिया से राहत मिलने पर जवान जल्द अपनी ड्यूटी पर लौट सकेंगे। वहीं उनके आश्रित परिवारों को भी भरोसा मिलेगा कि मुश्किल समय में व्यवस्था उनके साथ खड़ी है।

FAQ

  1. मध्यप्रदेश पुलिस हेल्थ प्लान (MP Police Health Plan) का क्या महत्व है?
    मध्यप्रदेश पुलिस हेल्थ प्लान का महत्व यह है कि यह सीमावर्ती जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए चिकित्सा सेवाओं को सुगम बनाता है, जिससे उन्हें इमरजेंसी में इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और इलाज के बिल तथा कागजी कार्यवाही की परेशानियों से राहत मिलेगी।
  2. मध्य प्रदेश पुलिस के पुलिस हेल्थ प्लान में अब कौन से अस्पताल जुड़ेंगे?

    एमपी की सीमा से सटे राज्यों के बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल अस्पताल पैनल में जोड़े जाएंगे। अभी 64 अस्पताल अनुबंधित हैं, जिनमें 11 राज्य से बाहर हैं। यह फैसला डीजीपी की अध्यक्षता वाली बैठक में लिया गया।
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