निजी अस्पताल बिलिंग नियम : अब इमरजेंसी में बिना पैसे जमा किए तुरंत मिलेगा इलाज

Aishwarya Dwivedi | Aug 15, 2026, 15:00 IST
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निजी अस्पतालों में बिलिंग के नए नियम - नई रिपोर्ट
निजी अस्पतालों में बिलिंग के नए नियम - नई रिपोर्ट

संसद की स्वास्थ्य समिति ने 176वीं रिपोर्ट में आयुष्मान कवर 10 लाख करने, इमरजेंसी में तुरंत इलाज और दवाओं पर मनमाना मुनाफा रोकने जैसी 365 सिफारिशें पेश की हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • संसद की स्वास्थ्य समिति ने अपनी 176वीं रिपोर्ट पेश की है।
  • समिति ने निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने के कई सुझाव दिए हैं।
  • इमरजेंसी में बिना पैसे जमा किए तुरंत इलाज शुरू करना होगा।
  • आयुष्मान भारत योजना का बीमा कवर 10 लाख करने का प्रस्ताव है।
  • मरीजों को इलाज शुरू होने से पहले अनुमानित खर्च बताना होगा।

निजी अस्पतालों की बिलिंग बदलेगी व्यवस्था

देश में निजी अस्पतालों के इलाज और बिलिंग व्यवस्था में बदलाव होगा। संसद की स्वास्थ्य समिति ने इसके लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार किया है। समिति ने अपनी 176वीं रिपोर्ट लोकसभा और राज्यसभा में पेश कर दी है।

इस रिपोर्ट में कुल 365 सिफारिशें शामिल की गई हैं। यह रिपोर्ट करीब 361 पन्नों की है। इसमें आम लोगों को महंगी चिकित्सा से राहत देने के उपाय हैं।

प्रो. राम गोपाल यादव की अध्यक्षता में इस समिति का गठन हुआ था। 31 सदस्यीय समिति ने लगभग 18 महीने तक गहरा अध्ययन किया। समिति ने देश के कई राज्यों का दौरा भी किया।

इलाज से पहले पता चलेगा खर्च

अक्सर निजी अस्पताल इलाज के बाद भारी-भरकम बिल थमा देते हैं। अब इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अस्पतालों को मानक प्रक्रियाओं के पैकेज रेट सार्वजनिक करने होंगे।

मरीज को भर्ती करते समय ही अनुमानित खर्च की जानकारी दी जाएगी। इससे छिपे हुए शुल्क और अचानक आने वाले खर्च से मुक्ति मिलेगी। मरीजों के परिजनों को मानसिक तनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

इमरजेंसी में तुरंत शुरू होगा इलाज

अक्सर देखा जाता है कि अस्पताल पहले पैसे जमा करने को कहते हैं। इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को तुरंत इलाज नहीं मिल पाता है। समिति ने इस पुरानी और गंभीर प्रथा को बदलने की सिफारिश की है।

अब इमरजेंसी में बिना पैसे की मांग किए इलाज शुरू करना होगा। भुगतान की प्रक्रिया इलाज शुरू होने के बाद की जा सकती है। इससे समय पर इलाज मिलने से कई जानें बचाई जा सकेंगी।

दवाओं और उपकरणों के घटेंगे दाम

निजी अस्पतालों में दवाएं और मेडिकल उपकरण बहुत महंगे मिलते हैं। इनके लैंडिंग प्राइस और एमआरपी (MRP – Maximum Retail Price) में भारी अंतर रहता है। समिति ने इस अंतर को रोकने की सिफारिश की है।

दोनों कीमतों के बीच अधिकतम 20 प्रतिशत का अंतर रखने का सुझाव है। इससे मरीजों को अस्पतालों से महंगी दवाएं खरीदने की मजबूरी नहीं रहेगी। स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला अतिरिक्त जेब का खर्च भी कम होगा।

आयुष्मान का दायरा 10 लाख रुपये होगा

संसदीय समिति ने आयुष्मान भारत (AB-PMJAY – Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana) का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया है। वर्तमान में इस योजना का कवर पांच लाख रुपए प्रति परिवार है। इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति परिवार करने की सिफारिश है।

समिति का मानना है कि पांच लाख रुपए का कवर गंभीर बीमारियों के लिए कम है। इसके साथ ही 600 नई महंगी प्रक्रियाओं को भी जोड़ा जाएगा। इससे गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी।

ओपीडी और जांचें भी होंगी कवर

ज्यादातर परिवारों का बड़ा खर्च अस्पताल में भर्ती होने पर नहीं होता। उनका अधिक पैसा ओपीडी परामर्श, जांच और दवाओं में खर्च होता है। समिति ने इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया है।

अब ओपीडी (OPD – Outpatient Department) परामर्श और जांचें भी योजना में शामिल होंगी। मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और पुनर्वास सेवाएं भी हेल्थ पैकेज का हिस्सा होंगी। इससे आम नागरिक की जेब पर पड़ने वाला दैनिक बोझ बहुत घटेगा।

बच्चों और बुजुर्गों को सीधा लाभ

समिति ने बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। पांच वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को योजना का लाभ मिलेगा। 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्ग भी इसमें शामिल होंगे।

उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना यह लाभ दिया जाएगा। इसके लिए आय की कोई सीमा तय नहीं की जाएगी। यह कदम देश के कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करेगा।

अस्पतालों में खुलेंगे जन औषधि केंद्र

निजी और सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोले जाने का सुझाव है। आयुष्मान भारत से जुड़े अस्पतालों में अमृत (AMRIT – Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) फार्मेसी भी स्थापित होगी।

इससे मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं आसानी से मिल सकेंगी। मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह व्यवस्था सीधे तौर पर आम जनता के वित्तीय बोझ को कम करेगी।

आगे की राह और नियम

यह रिपोर्ट अभी तक कोई कानून नहीं बनी है। स्वास्थ्य मंत्रालय को इस पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR – Action Taken Report) प्रस्तुत करनी होगी। कई सिफारिशों पर विचार करके निर्णय लिया जाएगा।

कानूनी, कर और नियामकीय बदलावों के लिए केंद्र सरकार कदम उठाएगी। कुछ मामलों में जीएसटी (GST – Goods and Services Tax) परिषद और संसद को फैसला लेना होगा। यदि ये सुझाव लागू होते हैं तो स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा।

FAQ

  1. आयुष्मान भारत योजना के कवर में क्या बदलाव का सुझाव है?
    उत्तर: समिति ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले बीमा कवर को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति परिवार करने की सिफारिश की है। साथ ही लगभग 600 नई महंगी बीमारियों के इलाज को इसमें जोड़ने का सुझाव दिया है।
  2. प्राइवेट अस्पतालों की बिलिंग को लेकर क्या नया नियम प्रस्तावित है?
    उत्तर: प्रस्तावित नियम के तहत अस्पतालों को अपने पैकेज रेट सार्वजनिक करने होंगे। मरीज को भर्ती करते समय ही इलाज का अनुमानित खर्च बताना अनिवार्य होगा ताकि बाद में छिपे हुए शुल्क न जोड़े जा सकें।

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