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News In Short
राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों को प्रदर्शन के आधार पर कामकाज की निगरानी का निर्देश दिया है।
दिल्ली में कांग्रेस का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ, जिसमें कई राज्यों के अध्यक्ष शामिल हुए थे।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि जिलाध्यक्षों का मूल्यांकन तय मानकों पर किया जाएगा।
आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस संगठन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
जिलाध्यक्षों की समीक्षा छह महीने बाद की जाएगी, जिसमें कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाएगी।
News In Detail
रायपुर: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों को दो टूक कह दिया है। जिला अध्यक्षों को साफ-साफ समझा दिया गया है कि कांग्रेस संगठन में अब केवल पद नहीं, बल्कि प्रदर्शन ही सबसे बड़ा पैमाना होगा। पार्टी नेतृत्व ने जिलाध्यक्षों को साफ संदेश दे दिया है कि अगले छह महीनों तक उनके कामकाज की लगातार निगरानी की जाएगी।
इसके अलावा कमजोर प्रदर्शन करने वालों को पद से हटाया भी जा सकता है। यह निर्देश दिल्ली में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दिए गए, जहां संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इस ट्रेनिंग कैंप में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे।
दिल्ली में ट्रेनिंग कैंप
दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस के नवनियुक्त जिला और शहर अध्यक्षों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा और तमिलनाडु समेत कई राज्यों के अध्यक्ष शामिल हुए।
कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल मौजूद रहे। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि जिलाध्यक्ष संगठन की रीढ़ होते हैं। उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक भी होती है। इसी कारण अब उनके कार्यों का मूल्यांकन तय मानकों पर किया जाएगा।
कांग्रेस के अनुसार छह महीने बाद जिलाध्यक्षों की समीक्षा होगी। इसमें संगठनात्मक मजबूती, जनसंपर्क, सदस्यता अभियान की प्रगति, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और जमीनी पकड़ को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
विधानसभा चुनाव की तैयारी
दिल्ली में आयोजित यह कार्यक्रम एक दिवसीय ओरिएंटेशन के रूप में रखा गया था। इसके बाद सभी नवनियुक्त जिलाध्यक्षों के लिए 10 दिन का विस्तृत और आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस कैंप में संगठन प्रबंधन, चुनावी रणनीति और वैचारिक प्रशिक्षण पर विस्तार से काम होगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसकी तारीखें जल्द घोषित की जाएंगी। यह ट्रेनिंग कैंप छत्तीसगढ़ में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी के रुप में देखा जा रहा है।
वन टू वन चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों को संबोधित करते हुए सीधे संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कई जिलाध्यक्षों से वन-टू-वन चर्चा भी की। इसमें जिलों की राजनीतिक स्थिति, संगठन की कमजोरियां, स्थानीय चुनौतियां और आगामी रणनीति पर खुलकर बात हुई। राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी को जनता से सीधे जोड़ने के लिए जिलों में मजबूत नेतृत्व बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने, मीडिया मैनेजमेंट, सोशल मीडिया कैंपेन, डिजिटल रणनीति, जन आंदोलनों और जनता से सीधा संवाद जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। नेतृत्व ने साफ किया कि बदलते राजनीतिक दौर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका अहम है। इसलिए जिलाध्यक्षों को इसमें दक्ष होना होगा।
कांग्रेस ने इस प्रशिक्षण के जरिए यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में संगठन के भीतर जवाबदेही बढ़ेगी। छह महीने बाद होने वाली समीक्षा कई जिलाध्यक्षों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। पार्टी का मानना है कि इस प्रक्रिया से न केवल संगठन मजबूत होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कांग्रेस की सक्रियता और प्रभाव भी बढ़ेगा।
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