सेठजी के नाम पर तेज हुई सियासत, 60 साल बाद बदल दिया किरोड़ीमल कॉलेज का नाम,ओपी ने लिखा साहेब को पत्र
Raipur. रायगढ़ के किरोड़ीमल शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज का नाम बदलने को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस कॉलेज का नाम बदलकर छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कर दिया गया है। नाम बदलने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरु हो गया है। इस मामले में रायगढ़ से आने वाले वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब को पत्र लिखकर नाम न बदलने को कहा है।
किरोड़ीमल नाम हटाने का विरोध :
रायगढ़ में शिक्षा की नींव रखने वाले दानवीर सेठ किरोड़ीमल की विरासत को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शहर के ऐतिहासिक किरोड़ीमल शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम बदलकर छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी CIT कर दिया गया है। इससे स्थानीय लोगों और पूर्व छात्रों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया से लेकर शहर के सियासी गलियारों तक बहस छिड़ गई है। रायगढ़ से आने वाले वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब को पत्र लिखकर नाम न बदलने की बात कही है। वित्त मंत्री चौधरी ने अपने पत्र में लिखा है कि सेठ किरोड़ीमल के शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में दिए गए योगदान को कभी नहीं भुला सकते । उन्होंने छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायगढ़ का नाम सेठ किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी करने का प्रस्ताव दिया है।
60 साल बदला नाम :
इस पॉलिटेक्निक संस्थान की स्थापना सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट के सहयोग से हुई थी। रायगढ़ में तकनीकी शिक्षा की शुरुआत इसी संस्थान से मानी जाती है। कॉलेज परिसर में लगे शिलालेख के अनुसार 5 फरवरी 1955 को मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने किरोड़ीमल पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट का शिलान्यास किया था।
सात दशक से इस संस्थान की पहचान सेठ किरोड़ीमल के नाम से जुड़ी रही है। लेकिन हाल ही में कॉलेज के मुख्य द्वार पर एक नया बड़ा बोर्ड लगा दिया गया, जिस पर छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायगढ़ लिखा हुआ है। हालांकि कॉलेज की मुख्य इमारत पर अब भी पुराने अक्षर दिखाई दे रहे हैं। लेकिन मुख्य प्रवेश द्वार और कई सरकारी दस्तावेजों में दानवीर का नाम गायब कर दिया गया है। इसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
पूर्व छात्रों का विरोध :
नाम परिवर्तन के फैसले के खिलाफ संस्थान के पूर्व छात्र खुलकर सामने आ गए हैं। 1996 बैच और 2001-2002 बैच के कई पूर्व छात्रों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इस फैसले की आलोचना की है। पूर्व छात्रों का कहना है कि जिस व्यक्ति के दान और प्रयासों से यह संस्थान अस्तित्व में आया, उसके नाम को हटाना न केवल इतिहास के साथ अन्याय है, बल्कि शहर की भावना को भी ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही किरोड़ीमल पॉलिटेक्निक का नाम बहाल नहीं किया, तो रायगढ़ में व्यापक जनांदोलन शुरू किया जाएगा।
रायगढ़ की पहचान से जुड़ा नाम :
सेठ किरोड़ीमल का नाम रायगढ़ की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के विकास से गहराई से जुड़ा माना जाता है। शहर में केजी आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज, किरोड़ीमल शासकीय अस्पताल, कई स्कूल, मंदिर और धर्मशालाएं उनके योगदान से स्थापित हुईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक दानवीर जिसने अपनी संपत्ति समाज के नाम कर दी, आज उसकी संस्थाओं से उसका नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है।
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