छत्तीसगढ़ के अधिकारी कर्मचारियों को समय पर DA नहीं दे रही सरकार, हाईकोर्ट में देना होगा जवाब

रायपुर में छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान समय पर डीए (महंगाई भत्ता) क्यों नहीं दिया जा रहा।

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VINAY VERMA
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Raipur. छत्तीसगढ़ के अधिकारी कर्मचारियों को समय पर डीए यानी महंगाई भत्ता क्यों नहीं मिल रहा? छग सरकार को इसका जवाब हाईकोर्ट को देना है। हाईकोर्ट ने मामले में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की याचिका पर सरकार से सवाल पूछा है। हाईकोर्ट ने सरकार को पक्ष रखने के लिए 4 सप्ताह का मोहलत दिया है। 

क्या है मामला

दरअसल छग में अधिकारी कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता मिलना होता है। लेकिन जब केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता की घोषणा करती है। तो राज्य सरकार उसे तुरंत अमल में लाने के बजाय 6 से 8 महीने देर करती है।

छग सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता की घोषणा में देरी तो करती ही है। ऐसे में कर्मचारियो को प्रति महीने 2000 से 5000 रुपए तक का नुकसान हो जाता है।

81 महीने का एरियर्स भी नहीं 

छग सरकार, राज्य के अधिकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता देने की घोषणा में देरी तो करती ही है उसके अलावा उनका एरियर्स भी नहीं  देती। फेडरेशन का कहना है कि केंद्र सरकार के महंगाई भत्ता घोषणा के बाद राज्य डीए की तुरंत घोषणा करे।

अगर कभी ऐसा संभव नहंी हो तो हमें एरियर्स का भी भुगतान किया जाए। फेडरेशन के अनुसार राज्य सरकार ने प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियो को उनके 81 महीने का एरियर्स नहीं दिया है।

एकल पीठ में सुनवाई

लंबित डीए और एरियर्स की मांग को लेकर छग अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस पर जस्टिस पीपी साहू की एकल पीठ में सुनवाई हुई।

 फेडरेशन की तरफ से अधिवक्ता ने इस बात को प्रमुखता से रखा कि 2017 से शासकीय कर्मचारियों को महंगाई भता समय पर नहीं मिल रहा है और उसका एरियर्स लंबित है। जस्टिस साहू ने सरकार को उसका पक्ष रखने 4 सप्ताह का समय दिया है।

मोदी की गारंटी का पालन नहीं

छग अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा का कहना है कि प्रदेश में 2017 से ही ऐसी स्थिति बन रही है। इसे रोकने के लिए बीते विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने कर्मचारियों से वादा किया था।

मोदी की गारंटी नाम के घोषणा पत्र में इस बात का जिक्र भी किया गया था। लेकिन अब सरकार बनने के बाद वे भूल गए हैं। हमें मोदी की गारंटी में किए एक-एक वादे को पूरा करवाना है।

डीए और डीआर वैधानिक- SC

बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने डीए यानी महंगाई भत्ता और डीआर यानी महंगाई राहत को कर्मचारियों - पेंशनरों का वैधानिक अधिकार माना है। इसी के आधार पर सरकारों को जल्द भुगतान का आदेश दिया था।

उसी निर्णय के आधार में छग में भी लंबित महंगाई भत्ता और राहत भुगतान कराने की मांग एक बार फिर बुलंद हो रही है। राज्य में 81 महीने से लंबित है। सभी संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही थी लेकिन फेडरेशन ने आगे बढ़ते हुए यह याचिका दायर कर दी है।

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