10 मिनट की डिलीवरी का दबाव, रायपुर में फास्ट डिलीवरी की होड़ बढ़ा रही हादसे

रायपुर में क्विक कॉमर्स कंपनियों के 10 मिनट डिलीवरी के दबाव में कर्मचारी ट्रैफिक नियम तोड़ रहे हैं। बिना हेलमेट और रॉन्ग साइड ड्राइविंग से राहगीरों की जान खतरे में है, जबकि सख्ती के डर से अब पहचान छिपाई जा रही है।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • डिलीवरी बॉय बिना हेलमेट, रॉन्ग साइड और रेड सिग्नल जंप कर बाइक चला रहे हैं।

  • कार्रवाई के डर से डिलीवरी बॉयज ने अब कंपनी की टी-शर्ट पहनना छोड़ दिया है।

  • एप पर 8 से 10 मिनट की डिलीवरी का वादा कर्मचारियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

  • समय पर सामान न पहुंचने पर रेटिंग गिरने और जुर्माना लगने के डर से कर्मचारी जोखिम उठा रहे हैं।

  • संकरी गलियों और मुख्य सड़कों पर तेज रफ्तार से राहगीरों की जान भी खतरे में है।

News In Detail

रायपुर. सरकार की सख्त चेतावनी और नियमों का हवाला देने के बाद भी रायपुर की सड़कों पर मौत की रेस जारी है। क्विक कॉमर्स कंपनियों के बीच मिनटों में सामान पहुंचाने की जो होड़ लगी है। उसका सारा बोझ उन डिलीवरी पार्टनर्स के कंधों पर है जो अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालकर बाइक दौड़ा रहे हैं। तय समय में ऑर्डर पूरा करने का दबाव इतना है कि ट्रैफिक नियम अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।

ट्रैफिक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे डिलीवरी बॉयज

इसकी हकीकत जानने के लिए मीडिया टीम ने ब्लिंकिट के स्टोर से निकलने वाले डिलीवरी बॉयज का पीछा किया। स्टोर से निकलते ही डिलीवरी बॉयज ने ट्रैफिक नियमों (ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन) की धज्जियां उड़ाना शुरू कर दिया। कहीं रॉन्ग साइड बाइक दौड़ाई गई, तो कहीं भीड़ भरे चौराहों पर बिना रुके खतरनाक कट मारते हुए वे आगे निकल गए। उनका एकमात्र मकसद था- स्क्रीन पर दिख रहे टाइमर के खत्म होने से पहले ग्राहक के दरवाजे पर दस्तक देना। 

कार्रवाई के डर से टी-शर्ट छोड़ी, पर रफ्तार नहीं

हैरानी की बात यह है कि सख्ती और कार्रवाई के डर से अब इन डिलीवरी बॉयज ने कंपनी की पहचान छिपाना शुरू कर दिया है। अधिकतर लड़कों ने अब कंपनी की टी-शर्ट पहनना बंद कर दिया है ताकि पहचान न हो सके। इसके बावजूद, एप पर अभी भी 8 से 15 मिनट में डिलीवरी का दावा किया जा रहा है। जांच के दौरान Blinkit, जेप्टो, स्विगी और इंस्टामार्ट जैसी कंपनियों से ऑर्डर करने पर सामान तय समय से भी पहले पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि सड़कों पर रफ्तार किस कदर जानलेवा है।

पहचान छिपाई पर रफ्तार वही रही

दोपहर ठीक 12 बजे एक डिलीवरी बॉय ब्लिंकिट स्टोर से थैला लेकर निकला। उसने न तो कंपनी की टी-शर्ट पहनी थी और न ही हेलमेट। एक्सप्रेस-वे से निकलते ही उसने रॉन्ग साइड पकड़ी और खालसा स्कूल होते हुए जेल रोड पहुंचा। इस दूरी को तय करने में सामान्यतः अधिक समय लगता है, उसे उसने महज 4 मिनट में पूरा कर होटल महिंद्रा तक सामान पहुंचा दिया।

तीन मिनट में सेक्टर-5 तक की रेस

एक और वाकया दोपहर 12:30 बजे का है। एक अन्य डिलीवरी बॉय बिना हेलमेट और बिना टी-शर्ट के स्टोर से निकला। पंडरी रोड पर गाड़ियों के बीच से खतरनाक तरीके से कट मारते हुए वह सिटी मॉल रोड पहुंचा। उसकी रफ्तार इतनी तेज थी कि पीछा कर रही टीम भी एक पल के लिए पीछे छूट गई। वह मात्र 3 मिनट के भीतर देवेंद्र नगर से मर्लिन जयश्री विहार पहुंच चुका था।

रेटिंग का डर और पेनाल्टी की मजबूरी

जब टीम ने नाम न छापने की शर्त पर इन डिवरी पार्टनर्स से बात की, तो उनकी मजबूरी सामने आई। उन्होंने बताया कि अगर ऑर्डर समय पर नहीं पहुंचता, तो ग्राहक रेटिंग गिरा देते हैं। कम रेटिंग होने पर कंपनी उन पर पेनाल्टी लगाती है। इसी आर्थिक दंड और नौकरी जाने के डर से ये युवा सड़कों पर मौत का खेल खेलने को मजबूर हैं।

एक्सपर्ट का क्या कहना है

ट्रैफिक एक्सपर्ट प्रफुल्ल जोशी का कहना है कि प्रतिस्पर्धा की इस रेस में इंसान की जान की कीमत कम हो गई है। हर कोई घर बैठे सामान चाहता है, लेकिन कंपनियों को अपने स्टाफ की सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए। ई-कॉमर्स कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।

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