रायपुर में 30 साल पुराना लोन घोटाला, 15 हजार पन्नों का चालान पेश

Aishwarya Dwivedi | Jul 17, 2026, 23:08 IST
रायपुर-EOW-लोन-घोटाला-चार्जशीट
रायपुर में ईओडब्ल्यू ने 30 साल पुराने सरकारी आवास ऋण घोटाले में विशेष अदालत के सामने 15 हजार पन्नों का चालान पेश किया है। तीन आरोपियों द्वारा किया गया 1.86 करोड़ का यह गबन अब 104 करोड़ का डूबत कर्ज बन चुका है।

समझें क्या है पूरा मामला

रायपुर में ईओडब्ल्यू ने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। यह मामला करीब 30 साल पुराना गृह निर्माण ऋण गबन का है। जांच एजेंसी ने तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। यह चालान कुल 15 हजार पन्नों का है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों रुपये का गबन किया था।



छत्तीसगढ़ में बड़ा घोटाला

रायपुर में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW - Economic Offences Wing) ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने विशेष न्यायाधीश के सामने अपना चालान पेश कर दिया है। यह मामला सरकारी आवास योजना से जुड़ा हुआ है।



यह पूरा घोटाला साल 1995 से 1998 के बीच का है। जरूरतमंद लोगों के लिए एक सरकारी आवासीय योजना शुरू हुई थी। आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष थावरदास माधवानी ने इसमें बड़ी साठगांठ की।



फर्जी नामों पर लिया लोन

माधवानी ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित के रायपुर कार्यालय से संपर्क किया। इसके बाद 186 सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत करा लिया गया। हर सदस्य के नाम पर 1-1 लाख रुपये का लोन पास हुआ। यह पूरी राशि किस्तों में जारी की गई थी। कुल मिलाकर 1 करोड़ 86 लाख रुपये का लोन लिया गया। लोन लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया था।



रायपुर में 30 साल पुराना लोन घोटाला


धरातल पर नहीं मिले मकान

जांच के दौरान जब भौतिक सत्यापन किया गया तो सच सामने आया। लोन के कागजों में रायपुरा और पंडरी कांपा का पता दिया गया था। दस्तावेजों में दावा था कि वहां मकान बन चुके हैं। जब अधिकारी वहां पहुंचे तो धरातल पर एक भी मकान नहीं मिला। जिन सदस्यों के नाम पर लोन जारी हुआ था वे भी गायब मिले। लक्ष्मीचंद चिमनानी और दिलीप कुमार बालानी अपने पते पर नहीं मिले।



अफसरों की मिलीभगत से गबन

जांच में सामने आया कि यह सब एक सोची-समझी साजिश थी। समिति के अध्यक्ष थावरदास माधवानी इसमें मुख्य रूप से शामिल थे। उनके साथ आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू भी मिले हुए थे।



भोपाल मुख्यालय के प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा ने भी इसमें मदद की। बसंत कुमार साहू ने बिना जांच किए ही प्रमाण पत्र जारी कर दिए। उन्होंने फर्जी उपयोगिता और पूर्णता प्रमाण-पत्र बना दिए थे।



मुख्यालय से पास हुआ लोन

इसके बाद भोपाल मुख्यालय के अधिकारी अनिल शर्मा और प्रदीप कुमार निखरा सक्रिय हुए। इन लोगों ने मिलकर फर्जी लोन को आसानी से स्वीकृत कर दिया। लोन की राशि आते ही आपस में बांट ली गई।



इस धोखाधड़ी के कारण राज्य सहकारी आवास संघ को भारी नुकसान हुआ है। अब यह सरकारी पैसा पूरी तरह से डूब चुका है। इस वजह से विभाग को बड़ा झटका लगा है।



डूब गया जनता का पैसा

रिकॉर्ड के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। इस फर्जी लोन की मूल राशि और ब्याज काफी बढ़ चुका है। अब यह राशि कुल 104 करोड़ रुपये हो चुकी है।



यह भारी-भरकम राशि अब आवास संघ के खाते में डूबत ऋण दर्ज है। ईओडब्ल्यू अब पुराने लंबित मामलों पर कड़ा एक्शन ले रही है। पुख्ता सबूत जुटाने के बाद ही यह चालान कोर्ट में पेश किया गया।



FAQ

  1. रायपुर का यह गृह निर्माण घोटाला कितना पुराना है?
    उत्तर: यह घोटाला करीब 30 साल पुराना है, जो साल 1995 से 1998 के दौरान अंजाम दिया गया था।
  2. ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में कितने पन्नों का चालान पेश किया है?
    उत्तर: ईओडब्ल्यू ने तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष कोर्ट में 15,000 पन्नों का भारी-भरकम चालान पेश किया है।

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