रायपुर में फर्जी जमानत का भंडाफोड़, NDPS केस में 3 महिलाओं पर FIR
Umeshwari Baghel | Jul 28, 2026, 22:10 IST
रायपुर में फर्जी जमानत का भंडाफोड़
रायपुर में NDPS मामलों में फर्जी जमानत रैकेट का खुलासा हुआ है। कोर्ट के आदेश पर तीन महिला जमानतदारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि ऋण पुस्तिका में हेरफेर कर एक ही दस्तावेज का इस्तेमाल कई आरोपियों की जमानत के लिए किया गया।
समझें क्या है पूरा मामला
- रायपुर में फर्जी जमानत का खुलासा
- NDPS मामलों में दस्तावेजों से खेल
- तीन महिला जमानतदारों पर FIR
- एक ही ऋण पुस्तिका से कई जमानत
- कोर्ट के आदेश पर पुलिस कार्रवाई
ऋण पुस्तिका से हटाए गए सील और हस्ताक्षर वाले पेज
न्यायालय ने इसे सामान्य गलती नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ का मामला माना है। इसके बाद पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए गए।
एक ही दस्तावेज से कई आरोपियों की जमानत का आरोप
जांच में पता चला कि इसी ऋण पुस्तिका का उपयोग वर्ष 2024, 2025 और 2026 के दौरान कई अन्य एनडीपीएस मामलों में भी जमानतदार के रूप में किया गया था। इनमें कई आरोपियों की जमानत के लिए इसी दस्तावेज का इस्तेमाल होने की बात सामने आई है।
जांच के दौरान ऋण पुस्तिका से न्यायालय की सील और अधिकारी के हस्ताक्षर वाले पन्ने नहीं मिले। कोर्ट के सामने पूछताछ में मीना बाई ने दस्तावेज में बदलाव की बात स्वीकार करने और आगे ऐसी गलती नहीं करने का आश्वासन दिया।
दो अन्य महिलाओं पर भी दर्ज हुई FIR
कोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं ने अलग-अलग एनडीपीएस मामलों में आरोपियों की जमानत के लिए दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। जांच में उनकी ऋण पुस्तिकाओं से भी न्यायालय की सील और हस्ताक्षर वाले पन्ने गायब पाए गए।पूछताछ के दौरान दोनों महिलाओं ने न्यायालय से माफी मांगी और दस्तावेजों में बदलाव करने की बात स्वीकार की।
कोर्ट ने माना गंभीर मामला
अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इस कथित रैकेट में और कितने लोग शामिल हैं और कितने मामलों में इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है।
FAQ
- रायपुर फर्जी जमानत मामले में कितनी महिलाओं पर कार्रवाई हुई है?
इस मामले में तीन महिला जमानतदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। - महिलाओं पर क्या आरोप लगाया गया है?
आरोप है कि उन्होंने ऋण पुस्तिका में हेरफेर कर न्यायालय की सील और हस्ताक्षर वाले पन्ने हटाए और उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कई एनडीपीएस मामलों में जमानत के लिए किया। - कोर्ट ने इस मामले को गंभीर क्यों माना?
कोर्ट ने दस्तावेजों में बदलाव को न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ माना है। अदालत के अनुसार ऐसे दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल फर्जी जमानत दिलाने जैसा गंभीर अपराध है।
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