गणेशोत्सव से पहले सिस्टम फेल, कमिश्नर बोले पूर्वानुमान में कमी रह गई
VINAY VERMA | Sept 14, 2026, 15:45 IST
रायपुर में ट्रैफिक जाम
गणेश चतुर्थी से पहले रायपुर में गणेश प्रतिमाओं और झांकियों के चलते कई प्रमुख सड़कों पर घंटों जाम लगा। वहीं पंडाल को लेकर नगर निगम के नोटिस और कांग्रेस के सवालों ने मामले को और गरमा दिया है।
गणेश चतुर्थी से ठीक पहले रायपुर की सड़कों पर ऐसा जाम लगा कि राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई। गणेश प्रतिमाओं और झांकियों के साथ बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकले तो शहर के कई प्रमुख रास्ते घंटों जाम रहे। कई जगह हालात बिगड़े और विवाद से लेकर मारपीट तक की नौबत आ गई।
जिस त्योहार की तैयारियां पहले से तय थीं, उसी के दौरान पुलिस और ट्रैफिक व्यवस्था लड़खड़ाती नजर आई। ऐसे में सोशल मीडिया में पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नर ने इसका जवाब भी दिया है। कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार यह उनके पूर्वानुमान में चूक का नतीजा है।
अव्यवस्था के बीच पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला का व्हाट्सएप पर दिया जवाब सामने आया। इसमें उन्होंने माना कि एक साथ बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं के निकलने और बारिश में बड़े वाहनों के फंसने का सही पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सका। जिससे वे और उनके अधिकारी आगे के लिए सीख मान रहे हैं। लेकिन सवाल यही है कि गणेशोत्सव कोई अचानक आया आयोजन तो है नहीं। शहर में कहां-कहां पंडाल लगते हैं, किन रास्तों से प्रतिमाएं निकलती हैं और कहां भीड़ बढ़ती है, इसका अंदाजा प्रशासन को पहले से रहता है।
राजधानी में गणेशोत्सव के दौरान प्रतिमाओं और झांकियों का निकलना कोई नई बात नहीं है। इसके बावजूद भीड़ के हिसाब से रूट डायवर्जन और ट्रैफिक इंतजाम क्यों नहीं संभल पाए, यह बड़ा सवाल है।
अगर बारिश में ट्रक फंसने की आशंका थी तो वैकल्पिक व्यवस्था क्या थी? संवेदनशील रास्तों पर पहले से पुलिस बल क्यों नहीं लगाया गया? घंटों जाम लगने के बाद व्यवस्था संभालने की कोशिश क्यों शुरू हुई?
पुलिस की सक्रियता अक्सर चालान, कार्रवाई और सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाई देती है। लेकिन त्योहार के पहले जब हजारों लोग सड़कों पर थे, तब ग्राउंड पर ट्रैफिक मैनेजमेंट की तस्वीर अलग दिखी।
शहर में पहले से नशे, चाकूबाजी, लूट और दूसरी वारदातों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में त्योहार के दौरान बिगड़ी व्यवस्था ने पुलिस की तैयारी और मॉनिटरिंग दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस अव्यवस्था पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या रायपुर की व्यवस्था पूरी तरह से ऑनलाइन हो गई है। रायपुर पुलिस ऑनलाइन चालान काटती है। ट्रेफिक अव्यवस्था में जब कोई सोशली मीडिया में वीडियो वायरल होता है तभी जाकर पुलिस जागती है। लेनिक उस पर भी केवल बड़ा चालान काटकर सोशल मीडिया में क्रेडिट लेती है। इधर शहर में कई जगहों पर नशे के अवैध धंधे चरम पर हैं। जिसपर कार्रवाई नही हो रही।
इसी बीच नगर निगम के जोन क्रमांक-2 के एक नोटिस ने अलग विवाद खड़ा कर दिया। गजानंद चौक रोड, इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक 27 में नव निर्माण गणेश उत्सव समिति को बिना अनुमति पंडाल लगाने का हवाला देकर नोटिस दिया गया।
नोटिस में 24 घंटे के भीतर पंडाल खुद हटाने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
निगम की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता आरपी सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए पुराने शासनकाल से तुलना की और इसे दोहरे रवैये का मामला बताया।
यानी गणेशोत्सव से पहले राजधानी में एक तरफ सड़कें जाम, दूसरी तरफ पंडाल पर नोटिस और तीसरी तरफ सियासी वार शुरू हो गया है।
पूरे घटनाक्रम ने पुलिस, ट्रैफिक और नगर निगम के बीच तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। त्योहार पहले से तय था, भीड़ का अंदाजा भी था और प्रतिमाओं के रूट भी नए नहीं थे।
फिर भी राजधानी की सड़कें घंटों जाम रहीं और पुलिस कमिश्नर को खुद पूर्वानुमान में कमी माननी पड़ी। अब सवाल सिर्फ जाम का नहीं है। सवाल यह है कि जब प्रशासन को पहले से सब पता था, तो व्यवस्था आखिर समय पर क्यों नहीं जागी?
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जिस त्योहार की तैयारियां पहले से तय थीं, उसी के दौरान पुलिस और ट्रैफिक व्यवस्था लड़खड़ाती नजर आई। ऐसे में सोशल मीडिया में पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नर ने इसका जवाब भी दिया है। कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार यह उनके पूर्वानुमान में चूक का नतीजा है।
कमिश्नर ने मानी चूक
रूट प्लान कहां गया?
अगर बारिश में ट्रक फंसने की आशंका थी तो वैकल्पिक व्यवस्था क्या थी? संवेदनशील रास्तों पर पहले से पुलिस बल क्यों नहीं लगाया गया? घंटों जाम लगने के बाद व्यवस्था संभालने की कोशिश क्यों शुरू हुई?
सोशल मीडिया से सड़क तक सवाल
शहर में पहले से नशे, चाकूबाजी, लूट और दूसरी वारदातों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में त्योहार के दौरान बिगड़ी व्यवस्था ने पुलिस की तैयारी और मॉनिटरिंग दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चालान पर पूरा फोकस
पंडाल पर 24 घंटे का फरमान
नोटिस में 24 घंटे के भीतर पंडाल खुद हटाने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
नोटिस पर सियासत तेज
यानी गणेशोत्सव से पहले राजधानी में एक तरफ सड़कें जाम, दूसरी तरफ पंडाल पर नोटिस और तीसरी तरफ सियासी वार शुरू हो गया है।
तालमेल पर सबसे बड़ा सवाल
फिर भी राजधानी की सड़कें घंटों जाम रहीं और पुलिस कमिश्नर को खुद पूर्वानुमान में कमी माननी पड़ी। अब सवाल सिर्फ जाम का नहीं है। सवाल यह है कि जब प्रशासन को पहले से सब पता था, तो व्यवस्था आखिर समय पर क्यों नहीं जागी?
रायपुर ट्रैफिक जाम : 18 चौराहों का री-डिजाइन तीन महीने में होगा पूरा
वकीलों ने किया ट्रैफिक जाम, 10.30 घंटे फंसे रहे शहरवासी
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