रायपुर में डेंगू को निजी अस्पतालों ने बनाया कमाई का जरिया, डेंगू बताकर मरीजों को किया भर्ती, आयुष्मान योजना के तहत किया 77 लाख का क्लेम, अब होगी कार्रवाई
Shivam Dubey | Sept 14, 2023, 24:00 IST
रायपुर में डेंगू को निजी अस्पतालों ने बनाया कमाई का जरिया, डेंगू बताकर मरीजों को किया भर्ती, आयुष्मान योजना के तहत किया 77 लाख का क्लेम, अब होगी कार्रवाई
रायपुर में डेंगू के इलाज में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रायवेट अस्पतालों ने बुखार के मरीजों को डेंगू के इलाज के नाम पर भर्ती कर इलाज किया है
नितिन मिश्रा, RAIPUR. राजधानी रायपुर में डेंगू के इलाज में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रायवेट अस्पतालों ने बुखार के मरीजों को डेंगू के इलाज के नाम पर भर्ती कर इलाज किया है। उसके बाद आयुष्मान कार्ड के तहत 77 लाख रुपए का क्लेम 25 अस्पतालों ने किया है। इन सभी 25 अस्पतालों की जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। जल्दी ही इन पर कार्रवाई हो सकती है।
डेंगू को बनाया था कमाई का जरिया
भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत डेंगू के इलाज के लिए एक निर्धारित राशि दी जाती है। जो प्रशासन से सीधे अस्पतालों को मिलती है। जब राजधानी में डेंगू फैलने की शुरुआत हुई तो प्राइवेट अस्पतालों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया। स्वास्थ्य विभाग के सीधे निर्देश हैं कि डेंगू के इलाज के लिए एलाइजा टेस्ट कराना जरूरी है, लेकिन अस्पतालों ने आरडी किट का प्रयोग कर डेंगू का इलाज किया। जिससे मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि 220 मरीजों में से केवल 3 मरीजों का ही एलाइजा टेस्ट कराया गया था। मरीजों को भर्ती कराने के बाद आयुष्मान योजना के तहत 35-35 हजार के हिसाब से स्वास्थ्य विभाग से 77 लाख का क्लेम की मांग निजी अस्पतालों ने की है।
नोटिस जारी
इन सभी 25 अस्पतालों को महामारी एक्ट के तहत नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस एक्ट के तहत गलत जानकारी देने या बीमारी को लेकर लापरवाही बरतने में एक महीने तक की सजा का प्रावधान भी है। नोटिस में अस्पतालों से पूछा गया है कि उनकी ओर से मरीज को डेंगू की पुष्टि के लिए कौन सी जांच करवाई गई। वहीं अस्पतालों की जांच में यह तथ्य भी सामने आए हैं कि इसकी ओपीडी 135 रही।, डेंगू का इलाज 217 आरडी किट पॉजिटिव आने के आधार पर किया गया।, इनमें से एलाइजा जांच में केवल 3 पॉजिटिव की पुष्टि हुई।सात निजी अस्पतालों ने डेंगू मरीजों के लिए मच्छरदानी का उपयोग नहीं किया, जो ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।, तीन एलाइजा पॉजिटिव वाले मरीजों का टेस्ट निजी लैब में हुआ।, 8 निजी अस्पतालों ने शासन को एलाइजा जांच के लिए एक भी सीरम सैम्पल नहीं भेजा।
डेंगू को बनाया था कमाई का जरिया
भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत डेंगू के इलाज के लिए एक निर्धारित राशि दी जाती है। जो प्रशासन से सीधे अस्पतालों को मिलती है। जब राजधानी में डेंगू फैलने की शुरुआत हुई तो प्राइवेट अस्पतालों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया। स्वास्थ्य विभाग के सीधे निर्देश हैं कि डेंगू के इलाज के लिए एलाइजा टेस्ट कराना जरूरी है, लेकिन अस्पतालों ने आरडी किट का प्रयोग कर डेंगू का इलाज किया। जिससे मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि 220 मरीजों में से केवल 3 मरीजों का ही एलाइजा टेस्ट कराया गया था। मरीजों को भर्ती कराने के बाद आयुष्मान योजना के तहत 35-35 हजार के हिसाब से स्वास्थ्य विभाग से 77 लाख का क्लेम की मांग निजी अस्पतालों ने की है।
नोटिस जारी
इन सभी 25 अस्पतालों को महामारी एक्ट के तहत नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस एक्ट के तहत गलत जानकारी देने या बीमारी को लेकर लापरवाही बरतने में एक महीने तक की सजा का प्रावधान भी है। नोटिस में अस्पतालों से पूछा गया है कि उनकी ओर से मरीज को डेंगू की पुष्टि के लिए कौन सी जांच करवाई गई। वहीं अस्पतालों की जांच में यह तथ्य भी सामने आए हैं कि इसकी ओपीडी 135 रही।, डेंगू का इलाज 217 आरडी किट पॉजिटिव आने के आधार पर किया गया।, इनमें से एलाइजा जांच में केवल 3 पॉजिटिव की पुष्टि हुई।सात निजी अस्पतालों ने डेंगू मरीजों के लिए मच्छरदानी का उपयोग नहीं किया, जो ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।, तीन एलाइजा पॉजिटिव वाले मरीजों का टेस्ट निजी लैब में हुआ।, 8 निजी अस्पतालों ने शासन को एलाइजा जांच के लिए एक भी सीरम सैम्पल नहीं भेजा।
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