6 साल से अधूरा मेडिकल कॉलेज हॉस्टल, स्टूडेंट बोले- कमरा दो, पत्थर नहीं
VINAY VERMA | Jul 07, 2026, 14:44 IST
रायपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्टल 6 साल से अधूरा
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज में 2020 में शुरू हुआ 100 सीटर हॉस्टल प्रोजेक्ट 2026 तक भी पूरा नहीं हो सका। बीच में क्षमता 100 से बढ़ाकर 200 सीट करने, डिजाइन बदलने और ठेकेदार के हटने से निर्माण कार्य अटक गया।
समझें क्या है पूरा मामला
- 2020 में शुरू, 2022 में पूरा होना था
- 100 से 200 सीटर करने में अटक गया प्रोजेक्ट
- 41.63 करोड़ रुपए बढ़ गई लागत
- छात्र आज भी किराए के हॉस्टल और पीजी में
- अधूरे भवन का फिर कराया गया भूमिपूजन
- जिम्मेदार अधिकारी पर नहीं हुई कार्रवाई
उद्घाटन नहीं हो सकता तो भूमिपूजन ही सही। जिस भवन का पहले ही भूमिपूजन हो चुका था, उसी अधूरे प्रोजेक्ट का फिर मुख्यमंत्री से भूमिपूजन करा दिया गया। इधर छात्र कमरों के लिए भटक रहे हैं, उधर शिलापट्ट बदलने का सिलसिला जारी है।
इसलिए पूरा प्रोजेक्ट पटरी से उतरा
हॉस्टल की क्षमता 100 से बढ़ाकर 200 सीट कर दी। कर्मचारियों के आवास में भी अतिरिक्त फ्लैट जोड़ दिए गए। जगह वही रही, लेकिन योजना बदल गई। इसके बाद पूरी डिजाइन दोबारा बनानी पड़ी। यहीं से निर्माण की रफ्तार रुक गई।
डिजाइन बदली... ठेकेदार बाहर हो गया
ठेकेदार ने ठेका छोड़ दिया। इसके बाद फाइलें घूमती रहीं। बैठकें होती रहीं। नोटिस भी जारी हुए। लेकिन निर्माण दोबारा शुरू नहीं हो सका। दो साल का प्रोजेक्ट छह साल का हो गया।
छात्र बोले- वादा मिला, हॉस्टल नहीं
अब मेडिकल कॉलेज को 120 कमरों का हॉस्टल किराए पर लेना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में छात्र निजी पीजी में रह रहे हैं। हर महीने 10 से 15 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं।
लागत बढ़ती गई... जिम्मेदार नहीं मिले
इसके बाद भी करीब 10 महीने तक काम आगे नहीं बढ़ा। सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ गया, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं हुई। सवाल यह है कि इस देरी की कीमत आखिर कौन चुकाएगा?
कैंसर भवन में भी वही कहानी
टेंडर और आगे की प्रक्रिया पूरी होने से पहले शिलापट्ट लग गया। इससे विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
विपक्ष बोला- काम नहीं, नेम प्लेट की राजनीति
पहले निर्माण पूरा होना चाहिए, फिर उद्घाटन होना चाहिए। लेकिन यहां उल्टा क्रम चल रहा है।
सबसे बड़ा सवाल... हॉस्टल कब मिलेगा?
योजना बदली, डिजाइन बदली, ठेकेदार बदला, लागत बढ़ी और भूमिपूजन भी दोबारा हो गया। लेकिन छात्रों की परेशानी नहीं बदली। मेडिकल की पढ़ाई कर रहे युवाओं को आज भी हॉस्टल नहीं मिला।
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