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NEWS IN SHORT
- रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद पहला आदेश जारी किया गया।
- युवाओं में बढ़ते नशे को देखते हुए रोलिंग पेपर, गोगो कोन जैसे सामान की बिक्री पर रोक लगी।
- यह प्रतिबंध पान, चाय और किराना दुकानों पर सिर्फ दो महीने के लिए लगाया गया है।
- दो महीने की समयसीमा को लेकर आदेश पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- भूपेश बघेल ने इसे अस्थायी और दिखावटी कदम बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
NEWS IN DETAIL
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हो गई है। पुलिस कमिश्नर न्यायालय ने पहला फरमान जारी किया है।
पुलिस कमिश्नर ने युवाओं में नशे की बढ़ती लत पर चिंता जताते हुए यह माना है कि नशे का ये सामान चाय,पान और किराने की दुकान पर बेचा जा रहा है।
इसको बंद करने के लिए कमिश्नर ने जो फरमान जारी किया है उस पर सवाल उठ रहे है। कमिश्नर ने चरस,गांजा,गोगो और रोलिंग पेपर जैसे नशे के सामान को बेचने पर पाबंदी तो लगा दी है लेकिन सिर्फ दो महीने के लिए।
सवाल उठता है कि क्या सिर्फ दो महीने की पाबंदी से रायपुर नशा मुक्त हो जाएगा।
ये है पुलिस कमिश्नर का आदेश :
विभिन्न माध्यमों से यह बात सामने आई है कि नाबालिगों और युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है।
वे चरस,गांजा जैसा नशा करने के लिए रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन और परफेक्ट रोल जैसे सामानों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह नशे को छिपाने और उसके सेवन करने का आसान तरीका है। इसमें टाइटेनियम ऑक्साइड, पोटेशियम नाइट्रेट, आर्टिफिशियल डाई, कैल्शियम कार्बोनेट और क्लोरीन ब्लीच जैसे जहरीले पदार्थ पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिये बेहद हानिकारक है।
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रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन, परफेक्ट रोल पान की दुकान, परचून या किराने व चाय की दुकानों जैसे सहज उपलब्ध होने वाले स्थानों में बेचा जाने लगा है।
जो सरलता से नाबालिगों और युवाओं को उपलब्ध है। जिसके कारण उनमें नशे की लत और नशे के चलते होने वाली आपराधिक वारदातों बढ़ोत्तरी दिखाई दे रही है जो उनके खुद के लिए और आम लोगों के लिए गंभीर खतरा है।
सिर्फ दो महीने का बैन क्यों:
आदेश में कहा गया है कि रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन, परफेक्ट रोल के उपयोग की रोकथाम के लिए इसके पान की दुकान, परचून/किराने व चाय की दुकानों, कैफे, रेस्टोरेंट जैसे सहज उपलब्ध स्थानों से विक्रय पर प्रतिबंध किये जाने की तत्काल आवश्यकता है।
इस जरुरत को देखते हुए रायपुर नगरीय क्षेत्र की सीमा में इन स्थानों पर मिलने वाले नशे के इस सामान बेचने को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाता है।
यह आदेश तत्काल प्रभावी होगा और यदि बीच में वापस ना लिया गया तो दिनांक 29.03.2026 तक लागू रहेगा। यह आदेश 29 जनवरी 2026 को जारी किया गया।
सवाल यहीं पर पैदा होता है। सवाल ये है कि क्या दो महीने में नशे का ये कारोबार पूरी तरह बंद हो जाएगा। क्या युवा नशे से मुक्त हो जाएंगे।
यदि ऐसा नहीं है तो दो महीने के लिए ही क्यों ये जानलेवा नशा हमेशा के लिए प्रतिबंधित होना चाहिए। दो महीने बाद फिर वही स्थिति आ जाएगी तो फिर इस पाबंदी का क्या मतलब रह जाएगा।
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भूपेश बघेल ने उठाए सवाल :
भूपेश बघेल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस आदेश पर सवाल उठाए हैं। भूपेश बघेल ने लिखा कि अजब-गज़ब आदेश!! रायपुर पुलिस कमिश्नर का यह आदेश अक्षरशः पढ़िए।
इस आदेश से यह तो स्पष्ट हो गया है कि अब सरकार स्वीकार रही है कि रायपुर में गाँजा/चरस आदि का सेवन बड़ी मात्रा में हो रहा है।
अब सवाल यह है कि गाँजा/चरस की उपलब्धता कैसे रुके, इसके लिए सरकार क्या कर रही है। इस आदेश के अनुसार गाँजा/चरस के सेवन के लिए प्रयोग में लाए जाने वाली सामग्री की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी लेकिन मूल कारण के लिए आप क्या कर रहे हैं।
ये तो ठीक वैसा ही है कि शराब का सेवन रोकने के लिए भी आप डिस्पोजल ग्लास/काँच ग्लास की बिक्री पर रोक लगा दें या फिर आप चखने की बिक्री पर रोक लगा दें।
इस आदेश को स्थायी आदेश क्यों नहीं बनाया गया। सिर्फ़ 29 मार्च 2026 (दो महीने) के लिए ही लागू क्यों किया गया।
इस आदेश में लिखा है कि “यदि बीच में वापस ना लिया गया” तो कौन है जो इसे बीच में रोक सकता है।
वैसे नशा सिर्फ़ रायपुर में नहीं, पूरा छत्तीसगढ़ इसकी गिरफ़्त में है। यदि सरकार गंभीर है तो गंभीर आदेश निकालिए, मीडियाबाज़ी के लिए सरकार के पास बहुत इंवेंट हैं।
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