छत्तीसगढ़ में कमिश्नर प्रणाली पर असमंजस, बढ़ेगा या सीमित रहेगा दायरा,कैबिनेट में नहीं हुई चर्चा
Arun Tiwari | Jan 21, 2026, 18:05 IST
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रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की जा रही है, लेकिन इसके दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह तय होना बाकी है कि कमिश्नरी केवल रायपुर शहर तक सीमित रहेगी या नवा रायपुर और एयरपोर्ट सहित ग्रामीण क्षेत्रों को भी शामिल करेगी।
NEWS IN SHORT
- 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होगा।
- कमिश्नरी का दायरा शहर तक रहेगा या ग्रामीण क्षेत्र तक, इस पर असमंजस बना हुआ है।
- कैबिनेट बैठक में कमिश्नरी विस्तार पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ।
- आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच अधिकारों को लेकर खींचतान सामने आई है।
- जल्द अधिसूचना जारी होने के बाद कमिश्नरी की सीमाएं और अधिकार स्पष्ट होंगे।
NEWS IN DETAIL
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा था कि पूरे रायपुर जिले को कमिश्नरी में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा था कि कैबिनेट में कमिश्नरी के विस्तार के ब्लू प्रिंट पर मुहर लग जाएगी लेकिन कैबिनेट बैठक में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। जल्द ही पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर अधिसूचना जारी की जाएगी उसके बाद ही तय होगा कि आखिर इसका दायरा कितना रहेगा।
23 जनवरी से पुलिस कमिश्नर सिस्टम :
सूत्रों के मुताबिक दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम क्षणों में परिस्थितियों ने करवट बदली तो सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा का नाम भी विकल्प के तौर पर सामने आ सकता है। कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर शासन-प्रशासन के गलियारों में गहन मंथन जारी है।
अधिकारों को लेकर टकराव :
हालांकि, शस्त्र लाइसेंस और आबकारी से जुड़े अधिकारों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इसे लेकर पुलिस महकमे के भीतर असंतोष उभर कर सामने आया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीमित अधिकारों वाली कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
बताया जा रहा है कि डीजीपी द्वारा गठित समिति ने व्यापक अधिकार दिए जाने की सिफारिश की थी, लेकिन प्रशासनिक महकमे ने उन सुझावों को दरकिनार करते हुए मध्य प्रदेश मॉडल को अपनाने की अनुशंसा कर दी। पुलिस कमिश्नरी प्रणाली को लेकर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पुलिस द्वारा मांगे गए कई अधिकारों पर आईएएस लॉबी ने कैंची चला दी है। राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर माना जा रहा है जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच दूरियां इस कदर बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
पुलिस कमिश्नर को मिल सकते हैं ये अधिकार
कैदी अधिनियम, 1900 – विशेष परिस्थितियों में बंदियों को अल्प अवधि के लिए पैरोल पर रिहा करने का अधिकार।
छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम, 2007 – धरना, प्रदर्शन, जुलूस व सभाओं की अनुमति तथा निषेधाज्ञा लागू करने का अधिकार।
विष अधिनियम, 1919 – अवैध जहर भंडारण या बिक्री पर तलाशी वारंट जारी करने की शक्ति।
जेल अधिनियम, 1894 – जेलों की सुरक्षा व्यवस्था व बंदियों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई।
अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 – देह व्यापार से जुड़े मामलों में छापेमारी व जांच के आदेश।
गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 – प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार।
राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 – असामाजिक तत्वों के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई।
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 – यातायात संचालन, मार्ग निर्धारण और भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 – सार्वजनिक व्यवस्था या आंतरिक सुरक्षा पर खतरे की स्थिति में निरुद्ध करने का अधिकार।
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 – जासूसी की आशंका पर संवेदनशील सूचनाओं की जांच।
विस्फोटक अधिनियम, 1884 एवं पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 – विस्फोटक व ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, परिवहन और उपयोग पर नियंत्रण।
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