राजनांदगांव: बीमार नाबालिग को गर्भवती बताकर रातभर थाने में रखा, डॉक्टर और TI नपे
Harrison Masih | May 30, 2026, 14:39 IST
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राजनांदगांव में सिस्टम की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। मासिक धर्म की समस्या से पीड़ित 14 साल की नाबालिग को डॉक्टरों ने गलत जांच कर गर्भवती बता दिया। रिपोर्ट पर बिना सोचे-समझे सोमनी पुलिस ने बच्ची को रातभर थाने में प्रताड़ित किया।
Rajnandgaon. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सोमनी थाने से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक अस्पताल की गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 14 साल की बीमार नाबालिग बच्ची को रातभर थाने में बिठाकर प्रताड़ित किया। जब अगले दिन सुबह सोनोग्राफी कराई गई, तो रिपोर्ट नेगेटिव आई। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया गया है और संबंधित मेडिकल ऑफिसर को पद से हटा दिया गया है।
राजनांदगांव के सोमनी क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची पिछले कुछ समय से बीमार थी। उसे मासिक धर्म (Menstrual Cycle) से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं थीं।
25 मई को माता-पिता उसे इलाज के लिए सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां मौजूद डॉक्टर ने प्रेगनेंसी किट से जांच की और बच्ची को गर्भवती घोषित कर दिया।
अस्पताल प्रबंधन ने इसकी सूचना तुरंत सोमनी पुलिस को दी। पुलिस ने बच्ची के पिता को तत्काल थाने बुलाया और शाम को दोबारा आने को कहा।
गलत रिपोर्ट को सच मानकर पुलिस ने कानून और मानवाधिकारों को ताक पर रख दिया। आरोप है कि पुलिस रातभर नाबालिग बच्ची से यह पूछती रही कि "उसने किसके साथ संबंध बनाए थे?" 4. सुबह खुली पोल: अगले दिन सुबह जब बच्ची की सोनोग्राफी (Sonography) कराई गई, तो रिपोर्ट पूरी तरह नेगेटिव आई। यानी बच्ची गर्भवती नहीं थी, वह केवल बीमार थी।
मामले के तूल पकड़ने और मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।
राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा (SP Ankita Sharma) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा प्रथम दृष्टया सोमनी थाना प्रभारी की गंभीर लापरवाही सामने आई है। नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में उन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है। मामले की विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल ऑफिसर डॉ. मौन्या साहू को पद से हटा दिया है। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उन्हें आगामी आदेश तक जिला चिकित्सालय के 100 बिस्तर मातृ एवं शिशु अस्पताल में अटैच किया गया है।
पीड़ित नाबालिग के पिता ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि पुलिस ने न सिर्फ थाने में उनकी बेटी को प्रताड़ित किया, बल्कि गांव के चौराहे पर आकर परिवार के बारे में पूछताछ की। पुलिस ने बच्ची के गर्भवती होने की झूठी बात पूरे गांव में फैला दी, जिससे उनके परिवार की भारी बदनामी हुई है और वे समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं।
इस मामले में पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की गाइडलाइंस का पूरी तरह उल्लंघन किया है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत प्रभात तिवारी के अनुसार कानूनन किसी भी नाबालिग लड़की को पूछताछ के लिए दिन में भी थाने लाने का अधिकार पुलिस को नहीं है।
यदि पूछताछ बेहद जरूरी हो, तो वह बच्ची के माता-पिता या संरक्षक की मौजूदगी में होनी चाहिए।
पूछताछ बच्ची के घर पर या किसी ऐसे स्थान पर होनी चाहिए जहां वह सुरक्षित और बेहतर महसूस करे। सोमनी पुलिस ने जो किया, वह पूरी तरह गैर-कानूनी और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।
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क्या है पूरा मामला?
25 मई को माता-पिता उसे इलाज के लिए सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां मौजूद डॉक्टर ने प्रेगनेंसी किट से जांच की और बच्ची को गर्भवती घोषित कर दिया।
अस्पताल प्रबंधन ने इसकी सूचना तुरंत सोमनी पुलिस को दी। पुलिस ने बच्ची के पिता को तत्काल थाने बुलाया और शाम को दोबारा आने को कहा।
गलत रिपोर्ट को सच मानकर पुलिस ने कानून और मानवाधिकारों को ताक पर रख दिया। आरोप है कि पुलिस रातभर नाबालिग बच्ची से यह पूछती रही कि "उसने किसके साथ संबंध बनाए थे?" 4. सुबह खुली पोल: अगले दिन सुबह जब बच्ची की सोनोग्राफी (Sonography) कराई गई, तो रिपोर्ट पूरी तरह नेगेटिव आई। यानी बच्ची गर्भवती नहीं थी, वह केवल बीमार थी।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
थाना प्रभारी लाइन अटैच
मेडिकल ऑफिसर हटाई गईं
पूरे गांव में बदनामी फैलाई
क्या कहता है कानून?
यदि पूछताछ बेहद जरूरी हो, तो वह बच्ची के माता-पिता या संरक्षक की मौजूदगी में होनी चाहिए।
पूछताछ बच्ची के घर पर या किसी ऐसे स्थान पर होनी चाहिए जहां वह सुरक्षित और बेहतर महसूस करे। सोमनी पुलिस ने जो किया, वह पूरी तरह गैर-कानूनी और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।
FAQ
- राजनांदगांव में नाबालिग लड़की के साथ क्या मामला हुआ?
राजनांदगांव के सोमनी में एक 14 साल की बीमार बच्ची को अस्पताल ने गलत रिपोर्ट में गर्भवती बता दिया, जिसके बाद पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए उसे रातभर थाने में प्रताड़ित किया। सुबह सोनोग्राफी में रिपोर्ट नेगेटिव आई। - सोमनी थाना प्रभारी पर क्या कार्रवाई हुई है?
राजनांदगांव एसपी अंकिता शर्मा ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर सोमनी थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया है।
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