जिला अस्पताल में नवजात की मौत, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग

Aishwarya Dwivedi | Jul 22, 2026, 14:08 IST
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राजनांदगांव-नवजात-मौत-मंत्री-विरोध
राजनांदगांव-नवजात-मौत-मंत्री-विरोध

राजनांदगांव जिला अस्पताल में लैब रिपोर्ट मिलने में 18 घंटे की देरी के कारण नवजात की मौत हो गई। लापरवाही से आक्रोशित कांग्रेस ने प्रदर्शन कर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

समझें क्या है पूरा मामला

टोलागांव की रहने वाली गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने हीमोग्लोबिन जांच रिपोर्ट आने के बाद ही ऑपरेशन करने की बात कही। साधारण सी ब्लड रिपोर्ट देने में लैब कर्मचारियों ने 18 घंटे लगा दिए। रिपोर्ट में देरी के कारण समय पर ऑपरेशन नहीं हो सका। इसके चलते गर्भस्थ शिशु की दर्दनाक मौत हो गई।

जिला अस्पताल में नवजात की मौत

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव स्थित जिला अस्पताल से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अस्पताल की बड़ी लापरवाही के कारण एक नवजात शिशु की जान चली गई। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। पीड़ित परिवार ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर महिला को अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन से पहले हीमोग्लोबिन (HB – Hemoglobin) जांच कराने की सलाह दी। लेकिन लैब की ओर से रिपोर्ट देने में लगातार देरी की गई।

महिला दर्द से तड़पती रही। इसके बावजूद समय पर जांच रिपोर्ट नहीं दी गई। जब तक रिपोर्ट आई और ऑपरेशन हुआ, तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची ने गर्भ में ही गंदा पानी पी लिया था। इस वजह से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस बात की जानकारी मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

घटना के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश भड़क उठा। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने को कहा। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के तुरंत इस्तीफे की मांग उठाई।

नेताओं का कहना है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। यदि जल्द कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच

मामला तूल पकड़ते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर त्वरित कार्रवाई की गई है। लैब सेवा में लापरवाही बरतने पर दो लैब टेक्नीशियन को हटा दिया गया है। एक कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज कराने के लिए थाने में पत्र भेजा गया है। इसके साथ ही ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अस्पताल की इस लापरवाही ने आपातकालीन सेवाओं की पोल खोल दी है। लोगों का कहना है कि समय पर इलाज मिलता तो मासूम की जान बच सकती थी। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है।

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