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RAIPUR. छग में अर्धवार्षिक परीक्षा में 'मोना के कुत्ते का नाम' वाला सवाल भाजपा सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। महासमुंद जिले से पहली बार मामला सामने आने के बाद इसे जिला स्तरीय गलती बता टालने की भरपूर कोशिश की गई। लेकिन अलग-अलग जिलों की परीक्षाओं में जब ये सवाल सामने आने लगे तो सरकार के गले की हड्डी बन गई।
बहरहाल मामले में रायपुर जिले में पहली कार्रवाई हुई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने शासकीय प्राथमिक शाला नकटी की प्रधान पाठिका शिखा सोनी को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि शिखा ने ही पेपर तैयार किया था। वहीं पेपर मॉडरेडरं संविदा सहायक शिक्षक नम्रता वर्मा को सेवा से अलग करने की कार्रवाई की जा रही है।
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कार्रवाई पर सवाल
यह कार्रवाई 5 सदस्यीय टीम की अनुशंसा पर की गई है। लेकिन, अब अलग-अलग जिलों की अर्धवार्षिक परीक्षा में अंग्रेजी में यही सवाल पूछे जाने पर शिक्षा विभाग घिर गया है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर ये पेपर जिला स्तर पर तैयार किया गया। तो अलग-अलग जिलों में एक सवाल कैसे आए? साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पूरा प्रश्न पत्र एक प्रधान पाठक और संविदा सहायक शिक्षक के भरोसे था?
U को बताया गया पूरा दोषी
कार्रवाई के बाद दोनों शिक्षिकाओं ने इसे अनजाने में हुई त्रुटि बताया। प्रधान पाठिका का कहना है कि रामू शब्द में ‘U’ छूट गया और गलती से ‘राम’ लिखा गया, जिस पर ध्यान नहीं जा सका। वहीं मॉडरेटर शिक्षक ने भी स्वीकार किया कि विकल्पों की जांच में चूक हुई। दोनों ने किसी भी तरह की धार्मिक भावना आहत करने के इरादे से इनकार करते हुए क्षमा मांगी।
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क्या है पूरा मामला
प्रदेश के विभिन्न जिलों में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा शिक्षा व्यवस्था के लिए समस्या बन गई है। सवाल था, मोना के कुत्ते का नाम क्या है? लेकिन उत्तर के विकल्पों में ‘राम’ शब्द शामिल होते ही यह मामला धार्मिक आस्था, प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की जवाबदेही से जुड़ गया। बवाल बढ़ने पर शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन सवाल अभी भी वही है। क्या पूरी गलती सिर्फ एक प्रधान पाठिका की थी, या सिस्टम ने फिर से बलि का बकरा ढूंढ लिया?
पूरी चेन क्या कर रही थी?
यहीं से असली सवाल खड़े होते हैं। क्या प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया सिर्फ एक शिक्षक तक सीमित होती है? क्या ब्लॉक स्तर, जिला स्तर और मॉडरेशन की पूरी चेन केवल दर्शक बनी रही? अगर गलती इतनी गंभीर थी, तो वह कई स्तरों से गुजरने के बाद भी कैसे नहीं पकड़ी गई? कार्रवाई सिर्फ नीचे के स्तर पर क्यों?
पहली बार नहीं हुई है गलती..
यह पहला मौका नहीं है जब शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में आया है। इससे पहले भी पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियां, प्रश्नपत्रों की गलतियां और परीक्षाओं में लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं। हर बार जांच होती है, समिति बनती है और अंत में किसी शिक्षक या कर्मचारी पर कार्रवाई कर फाइल बंद कर दी जाती है।
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सरकार की नाक बचाने का काम
इस मामले में भी 5 सदस्यीय टीम ने भाजपा सरकार की नाक बचाने का काम किया, लेकिन क्या इससे व्यवस्था सुधरेगी? या फिर अगली परीक्षा में कोई नया विवाद जन्म लेगा? चेतावनी पत्र विकासखंड शिक्षा अधिकारी तिल्दा और स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय रायपुर के प्राचार्य को जरूर दिया गया। लेकिन चेतावनी से आगे की जिम्मेदारी तय नहीं की गई।
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