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News In Short
- पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह के बेटे बलवंत सिंह ने 5 जनवरी रात कार से बाइक सवार को टक्कर मारी
- टक्कर में त्रिभुवन सिंह गंभीर घायल हो गया। उसके शरीर पर कई बड़ी चोटें आई
- पूर्व मंत्री ने अपने समर्थकों को पीड़ित के घर भेजा, परिवार से पूरा इलाज कराने का वादा किया
- हिट एंड रन केस में बलवंत पर सामान्य धाराएं लगी। हो—हल्ला न होने से वह आधे घंटे में बेल पर छूट गया
- समर्थकों को बलवंत की जमानत की सूचना मिली, वे त्रिभुवन को अस्प्ताल में छोड़ भाग छूटे। अब पीड़ित का परिवार
- इलाज के खर्च के लिए पूर्व मंत्री के यहां चक्कर लगा रहा है
News In Detail
Raipur. छत्तीसगढ़ में एक घटना ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह के परिवार को मुश्किल में डाल दिया। हालांकि, उन्होंने सबकुछ मैनेज कर हिट एंड रन केस में अपने बेटे को बचा लिया। लेकिन, उन पर पीड़ित परिवार ने वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
मामला यह हुआ है कि रेणुका सिंह का बेटा बलवंत सिंह ने रायपुर में 5 जनवरी को अपनी कार से बाइक सवार युवक को रौंद दिया था। शुरुआती शिकायत पर पुलिस ने बलवंत को गिरफ्तार कर लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री के लोगों ने पीड़ित के परिवार को पूरा इलाज कराने का वादा कर मामले को मैनेज कर लिया।
इस बीच, भाजपा महिला नेता रेणुका सिंह का बेटे के खिलाफ एक्सीडेंट केस में सामान्य धाराएं लगी। वह महज आधे घंटे में ही थाने से बेल पर बाहर आ गया। जिस युवक को एक्सीडेंट में चोट आई, वो पूरे इलाज के लिए तरस गया। युवक का परिवार अब इलाज के पूरे खर्च लेने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री के घर चक्कर लगा रहा है।
भरोसा देकर निजी अस्पताल शिफ्ट करवाया
बताया जाता है कि एक्सीडेंट के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह का समर्थक सोनू अग्रवाल नाम का व्यक्ति घायल त्रिभुवन सिंह के परिजनों के पास पहुंचा। उसने पूर्व मंत्री की तरफ से त्रिभुवन का पूरा इलाज कराने का वादा किया। उसे डीकेएस अस्पताल से एक निजी अस्पताल शिफ्ट किया गया।
परिजनों के अनुसार अटेंडर के रुप में शादाब अली को जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन, जैसे ही पूर्व मंत्री के बेटे की जमानत की सूचना मिली, वह थोड़ी देर में अस्पताल से गायब हो गया। त्रिभुवन सिंह की बहन रश्मि सिंह कहती हैं कि शुरुआती बिल भरने में ही लंबा संघर्ष करना पड़ा। फोन पर कई बार बात के बाद बिल जमा हुआ, लेकिन उसके बाद शादाब फोन बंद कर गायब हो गया।
पुलिस कार्रवाई से बचने का हथकंडा
पीड़ित त्रिभुवन की बहन रश्मि सिंह के मुताबिक, त्रिभुवन को अस्पताल ने इलाज के बीच डिस्चार्ज कर दिया। तब तक हमारे भाई की हालत ठीक नहीं हो पाई थी। बाद में सपंर्क करने पर सोनू अग्रवाल ने उन्हें बताया कि इलाज के नाम पर जितने पैसे खर्च किए हैं, इससे अधिक पैसे नहीं खर्च कर पाएंगे।
परिजनों का आरोप है यह सब कुछ पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए किया गया। बलवंत सिंह के जमानत मिलते ही उन लोगों ने मुंह फेर लिया। हकीकत यह है कि जमानत से वे पहले हमारे सामने गिड़गिड़ा रहे थे।
क्या है पूरा मामला
तेलाबांधा थाना पुलिस के मुताबिक, बलवंत सिंह ने रात करीब 1 बजे अपनी कार से एक मोटरसाइकिल को टक्कर मारी थी। हादसे के बाद बलवंत दूसरी कार से फरार हो गया। हालांकि, हादसे का शिकार हुए त्रिभुवन सिंह के परिजनों ने थाने में शिकायत की और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तेलीबंधा थाना पुलिस ने बलवंत को गिरफ्तार कर लिया। घायल त्रिभुवन को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बेहतर इलाज का किया वादा
इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह के समर्थक ने त्रिभुवन सिंह के परिजनों को निजी अस्पताल में बेहतर इलाज का वादा किया। चिंताजनक स्थिति मे त्रिभुवन को एक निजी अस्पताल शिफ्ट किया गया।
उधर, बलवंत के उपर जमानती धाराएं लगाकर केस रजिस्टर्ड किया गया। इसलिए उसे थाने से ही बेल बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने तब बताया था कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद मामले में और धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। त्रिभुवन सिंह के बहन के मुताबिक मेडिकल रिपोर्ट उन्हें नहीं दी गई हैं।
हम पर दबाव बनाया गया
घायल त्रिभुवन सिंह की बहन रश्मि सिंह का आरोप है कि जब मेरा भाई अस्पताल में भर्ती था तो रेणुका सिंह ने सोनू अग्रवाल को भेजकर इलाज का वादा किया था। उस दौरान यह भी कहा गया कि न तो मीडिया में कुछ बोलना है और न ही विपक्षी दल के पास जाना है। मेरे भाई की हालत सही नहीं है। सोनू अग्रवाल और अटेंडर शादाब अली फोन करके भाग गए हैं। दो लाख का बिल जमा करने के बाद दबाव बनाया गया। मेरे भाई की हालत अस्थिर थी, लेकिन उन्होंने मेरे भाई को डिस्चार्ज कर दिया।
रेणुका सिंह ने जवाब नहीं दिया
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इस मामले में 'द सूत्र' ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान भाजपा विधायक रेणुका सिंह को संपर्क कियां। बताया गया कि वे कार्यक्रम में हैंं। लगभग 2 घंटे बाद फोन करने का समय दिया गया। उनके निज सचिव से संपर्क किया तो उन्होने इस मामले में पल्ला झाड़ लिया। फिर तय समय पर उन्होंने फोन भी नहीं रिसीव किया। हमने उन्हें वाट्सऐप और मैसेज के जरिए अपने सवाल भेजे, लेकिन उन्होंने उसका भी जवाब नहीं दिया।
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