साय सरकार में आवास योजना को रफ्तार, लाखों परिवारों के पक्के घर का सपना हुआ साकार

The Sootr | Oct 24, 2026, 24:03 IST
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Raipur. किसी परिवार के लिए अपना पक्का घर होना जिंदगी की सबसे बड़ी खुशियों में से एक है। ऐसा घर, जहां बारिश में छत टपकने का डर न हो, दीवारें कमजोर न हों और परिवार सुरक्षित रह सके। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना हजारों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इसी सपने को पूरा करने का जरिया बन रही है।

दूर-दराज के इलाकों से लेकर शहरों तक पक्के मकान दिखाई दे रहे हैं। इन घरों के साथ लोगों की जिंदगी में सुरक्षा, सुविधा और सम्मान भी बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर दिलाने को प्राथमिकता दी है। सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 18 लाख 12 हजार परिवारों को आवास देने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले ने उन परिवारों की उम्मीद बढ़ाई है, जो लंबे समय से अपने घर का सपना देख रहे थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसे पूरा नहीं कर पा रहे थे।

छत्तीसगढ़ में योजना के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आवास स्वीकृत किए गए हैं। अब तक प्रदेश में 26 लाख से अधिक आवासों को मंजूरी मिल चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि आवास योजना राज्य में कितने बड़े स्तर पर जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रही है।

साय सरकार का जोर आवासों को मंजूरी देने के साथ उनके निर्माण को आगे बढ़ाने पर भी है। घर मिलने से परिवारों को सुरक्षित रहने की जगह मिलती है और वे अपनी बचत का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से कर सकते हैं।

गांवों में पक्के घरों से बदल रही जिंदगी

ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार वर्षों तक कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर रहे हैं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकना, दीवारों में सीलन आना और घर के कमजोर हिस्सों के गिरने का डर उनकी रोजमर्रा की परेशानी थी। गर्मी और ठंड के मौसम में भी ऐसे मकानों में रहना आसान नहीं होता था।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) इन परिवारों को पक्का घर बनाने में मदद दे रही है। छत्तीसगढ़ में अब तक इस योजना के तहत 11 लाख 78 हजार आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है, इससे लाखों परिवारों को रहने के लिए सुरक्षित जगह मिली है। घर बनने का असर परिवार की पूरी दिनचर्या पर पड़ता है। बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिलता है। महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित जगह मिलती है। परिवार को हर मौसम में मकान की हालत को लेकर परेशान नहीं होना पड़ता। पक्का घर लोगों के आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को भी बढ़ाता है।

नक्सल प्रभावित परिवारों के लिए भी आवास

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए पक्का घर उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए विशेष परियोजना के तहत केंद्र सरकार से 15 हजार आवासों की मंजूरी मिली है। इनमें से राज्य में 5 हजार 600 आवास स्वीकृत किए गए हैं।

इस पहल का उद्देश्य ऐसे परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, जिन्होंने हिंसा और अस्थिरता के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। आवास जैसी बुनियादी सुविधा उनके जीवन को स्थिरता देने में मदद कर सकती है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत भी जरूरतमंद परिवारों को घर देने का काम किया गया है। इस योजना में 47 हजार हितग्राहियों के लिए आवास स्वीकृत किए गए थे। नई सरकार के गठन के बाद इस श्रेणी में 39 हजार आवास स्वीकृत हुए, जिनमें से 24 हजार का निर्माण पूरा हो चुका है।

नए सर्वे से और परिवारों को मिलेगा घर

आवास योजना का लाभ उन परिवारों तक पहुंचाना जरूरी है, जो अब तक इससे छूट गए हैं। इसी उद्देश्य से वर्ष 2024 में आवास प्लस 2.0 के तहत नया सर्वे किया गया है। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को भारत सरकार से छत्तीसगढ़ को करीब 3 लाख 65 हजार नए आवासों का लक्ष्य मिला है। इससे राज्य में और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

शहरों में भी हजारों परिवारों को मिला पक्का घर

प्रधानमंत्री आवास योजना का असर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरों में भी दिखाई दे रहा है। शहरी इलाकों में ऐसे कई परिवार हैं, जो सीमित आमदनी के कारण अपना घर नहीं बना पाते। किराए के मकान में रहना या छोटी और असुविधाजनक जगह में परिवार चलाना उनकी मजबूरी बन जाता है। ऐसे परिवारों के लिए पक्का घर मिलने से आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा बढ़ती है।

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 2 लाख 43 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 2 लाख 22 हजार आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। पूर्ण आवासों में 1 लाख 93 हजार 175 आवास लाभार्थियों को घर बनाने के लिए सहायता देने वाली श्रेणी के हैं, जबकि 29 हजार 267 आवास साझेदारी में विकसित किए गए हैं।

पिछले ढाई वर्षों में शहरी आवास योजना के तहत भी निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया गया है। इस अवधि में लाभार्थियों को अपने घर बनाने में मदद देने वाली श्रेणी के 75 हजार 709 आवास पूरे हुए। वहीं, साझेदारी में विकसित किए जाने वाले 13 हजार 82 आवासों का निर्माण पूरा हुआ है। इस श्रेणी में 14 हजार 687 हितग्राहियों को आवास आवंटित किए गए और 12 हजार 530 हितग्राहियों को बनकर तैयार आवासों में बसाया गया है। आपको बता दें कि आवास निर्माण के लिए नगरीय निकायों को 909 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। इससे शहरों में आवास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और निर्माण कार्य पूरा करने में मदद मिलती है।

शहरी आवास योजना 2.0 से आगे बढ़ेगा काम

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत शहरों में घर की जरूरत वाले परिवारों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे किया जा रहा है। तकनीक की मदद से आवेदन और जांच की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर है, ताकि पात्र परिवारों को समय पर योजना का लाभ मिल सके।

इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ में 71 हजार 416 आवास स्वीकृत किए गए हैं, इनमें से 4 हजार 129 आवास पूरे हो चुके हैं, जबकि 25 हजार 165 आवासों का निर्माण चल रहा है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत विभिन्न क्षेत्रों में 1 लाख 32 हजार आवासों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इससे शहरों में घर की जरूरत वाले परिवारों को मदद मिलने की संभावना बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में जरूरतमंद परिवार

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की उन प्राथमिकताओं को दिखाती है, जिनमें गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख 12 हजार ग्रामीण परिवारों के लिए आवास का निर्णय लेना इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण संकेत था।

ग्रामीण क्षेत्रों में 11 लाख 78 हजार घरों का निर्माण पूरा होना और शहरी क्षेत्रों में 2 लाख 22 हजार आवासों का तैयार होना इस काम की व्यापकता बताता है। नए सर्वे और अतिरिक्त आवास लक्ष्य से आगे भी इस योजना का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।

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