एमपी हाउसिंग बोर्ड की हजारों करोड़ की नई तैयारी! अधूरे निर्माणों पर जवाबदेही का संकट

Ramanand Tiwari | Oct 23, 2026, 23:10 IST
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पुराने निर्माणों का हिसाब बाकी, नई योजनाओं की तैयारी
पुराने निर्माणों का हिसाब बाकी, नई योजनाओं की तैयारी

मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड की नई योजनाओं ने पुराने निर्माण कार्यों पर सवाल खड़े किए हैं। भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाओं की तैयारी चल रही है। बोर्ड ने नई इमारतों और व्यावसायिक परिसरों की योजनाएं बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, पुरानी परियोजनाओं की प्रगति और खर्च का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं है।

निर्माण पूरा होने की स्थिति भी सामने नहीं आई है। इससे बोर्ड की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।

पुराने कामों का हिसाब बाकी

मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड (Madhya Pradesh Housing Board) फिर बड़े निर्माण प्रोजेक्टों की तैयारी में है। बोर्ड इन परियोजनाओं के जरिए शहरी विकास को बढ़ावा देना चाहता है। हालांकि, नई योजनाओं के साथ पुराने निर्माणों की जवाबदेही भी जरूरी है। पहले स्वीकृत परियोजनाओं में कितने काम पूरे हुए, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। कितने निर्माण लंबित हैं, इसका समग्र विवरण भी सामने नहीं आया है। जिन परियोजनाओं में देरी हुई, उनकी लागत बढ़ने की भी समीक्षा जरूरी है। संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

भोपाल में 2000 करोड़ रुपए की योजना

भोपाल की प्रोफेसर कॉलोनी में दो हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजना प्रस्तावित है। यह इलाका छोटे तालाब के पास स्थित है। इस कारण योजना का मामला पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक पहुंच चुका है। अब परियोजना की संशोधित डीपीआर तैयार करने की कवायद चल रही है। इसके लिए कलेक्टर कार्यालय को प्रस्ताव से अलग किया जा रहा है।

ऐसे में पुरानी योजना पर हुए खर्च का वित्तीय विवरण सार्वजनिक होना जरूरी है। प्रस्ताव में किए गए बदलावों की जानकारी भी सामने आनी चाहिए। राजधानी में करीब 1500 करोड़ रुपए की सेंट्रल विस्टा परियोजना भी प्रस्तावित है। इसकी डीपीआर तैयार बताई गई है। हालांकि, दोनों परियोजनाओं की मंजूरी और वित्तीय व्यवस्था की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। निर्माण पूरा करने की समयसीमा भी सामने आना बाकी है।

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एमपी हाउसिंग बोर्ड भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में तीन हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाएं लाने की तैयारी कर रहा है। इनमें दो हजार से ज्यादा किफायती और लग्जरी आवास होंगे। एक हजार से ज्यादा दुकानें, शोरूम और ऑफिस स्पेस भी बनेंगे। भोपाल की प्रोफेसर कॉलोनी सबसे बड़ी परियोजना होगी। ग्वाल सागर परियोजना पर काम चल रहा है।
एमपी हाउसिंग बोर्ड भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में तीन हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाएं लाने की तैयारी कर रहा है। इनमें दो हजार से ज्यादा किफायती और लग्जरी आवास होंगे। एक हजार से ज्यादा दुकानें, शोरूम और ऑफिस स्पेस भी बनेंगे। भोपाल की प्रोफेसर कॉलोनी सबसे बड़ी परियोजना होगी। ग्वाल सागर परियोजना पर काम चल रहा है।

ग्वालियर में पुराने निर्माणों की प्रगति पर सवाल

ग्वालियर में ग्वाल सागर परियोजना पर 300 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा बायपास क्षेत्र की आवासीय योजना पर भी गतिविधियां चल रही हैं। सूर्यनगर फेज-दो को लेकर भी तैयारियां जारी हैं। ग्वालियर की पुरानी पुनर्घनत्वीकरण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा जरूरी है। इससे नई परियोजनाओं की तैयारी का बेहतर आकलन हो सकेगा।

पहले स्वीकृत योजनाओं में निर्माण की वास्तविक स्थिति सामने आना बाकी है। आवंटन और हस्तांतरण की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं हुई है। कितने निर्माण अधूरे हैं, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। इनकी अनुबंधित लागत और संशोधित समयसीमा की जानकारी भी जरूरी है। पुरानी परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट होने पर ही नई योजनाओं का बेहतर मूल्यांकन हो सकेगा।

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मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों में घनी आबादी के बीच बनी पुरानी जेलों को अब शहर से बाहर शिफ्ट किया जा रहा है। इन जेलों की लगभग 106 एकड़ कीमती सरकारी जमीन निजी डेवलपर्स को दी जाएगी। इन जमीनों का तय बेस रेट 1971 करोड़ रुपए है। निर्माण पर होने वाला खर्च निकालने के बाद भी सरकार को एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत होगी।

जबलपुर में 480 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

जबलपुर के धन्वंतरि नगर में करीब 480 करोड़ रुपए की मिश्रित परियोजना प्रस्तावित है। इसके तहत आवासीय फ्लैट और व्यावसायिक परिसर बनाने की तैयारी है। योजना में दुकानें और कार्यालय भी शामिल हैं। करीब 6.36 एकड़ जमीन पर 60 मीटर तक ऊंची इमारतें बनाने का प्रस्ताव है।

यहां 112 दुकानें और 38 कार्यालय हॉल प्रस्तावित हैं। इसके अलावा एक हजार से अधिक पार्किंग स्थान बनाने की योजना है। निर्माण शुरू करने से पहले बाजार की मांग का आकलन जरूरी माना जाता है। व्यावसायिक इकाइयों की बिक्री की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण होंगी। उम्मीद से कम बिक्री होने पर परियोजना की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

जमीन के उपयोग और जनता को लाभ का सवाल

पुनर्घनत्वीकरण योजनाओं (Redensification Schemes) में मूल्यवान शहरी जमीन का इस्तेमाल किया जाता है। यहां नए आवासीय और व्यावसायिक परिसर विकसित किए जाते हैं। इन परियोजनाओं की सफलता केवल बड़ी इमारतों और निवेश राशि से तय नहीं होगी। योजनाओं से आम लोगों को मिलने वाला लाभ भी महत्वपूर्ण है।

विस्थापित परिवारों और सरकारी कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा जरूरी है। अन्य पात्र हितग्राहियों को मिलने वाली सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा। जमीन के मूल्यांकन और निर्माण लागत में पारदर्शिता होनी चाहिए। निजी एजेंसियों की भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए।

पुराने प्रोजेक्ट लंबित होने पर नई योजनाओं से पहले उनकी समीक्षा जरूरी है। इससे पुरानी निर्माण संबंधी समस्याओं के दोहराव का जोखिम कम हो सकता है।

अध्यक्ष ओम जैन के सामने जवाबदेही की चुनौती

हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन ने बड़ी परियोजनाओं पर जोर दिया है। यह तैयारी मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप की जा रही है। बोर्ड ऊंची इमारतों और आवासीय-व्यावसायिक परिसरों का निर्माण करना चाहता है। इनके जरिए शहरों में नई सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

हालांकि, योजनाओं की सफलता का आकलन निर्माण पूरा होने के बाद ही होगा। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। अध्यक्ष और बोर्ड प्रबंधन के सामने पुरानी परियोजनाओं की जवाबदेही भी बड़ी चुनौती है। इनकी प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करना महत्वपूर्ण होगा।

रिपोर्ट में स्वीकृत बजट और वास्तविक खर्च की जानकारी होनी चाहिए। निर्माण की वर्तमान स्थिति और देरी के कारण भी स्पष्ट होने चाहिए। अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने की नई समयसीमा भी बताई जानी चाहिए। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए।

Photograph: (thesootr)
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हजारों करोड़ की नई योजनाएं

मध्य प्रदेश में आवासीय विकास की जरूरत लगातार बनी हुई है। इसके लिए नई परियोजनाओं की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि, पहले स्वीकृत योजनाओं में खर्च हुई राशि का विवरण सामने आना जरूरी है। पुराने निर्माणों की वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

बोर्ड की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन केवल नई घोषणाओं से नहीं होना चाहिए। पूरी हुई परियोजनाओं और उनके लाभार्थियों को भी इसका आधार बनाना होगा। नई योजनाओं से पहले पुराने निर्माणों का स्वतंत्र मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा। इससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बढ़ सकता है। अब हजारों करोड़ रुपए की नई परियोजनाओं के बीच जवाबदेही बड़ा मुद्दा है। निर्माण की प्रगति और वित्तीय पारदर्शिता पर बोर्ड प्रबंधन की परीक्षा होगी। परियोजनाओं को समय पर पूरा करना भी बड़ी चुनौती रहेगी।
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