मेट्रो स्टेशन के लिए रानी सराय के पेड़ काटने को हाईकोर्ट की मंजूरी, तोतों का आवास होगा खत्म
Sanjay Gupta | Oct 23, 2026, 21:31 IST
रानी सराय के काटे जाएंगे पेड़।
INDORE. इंदौर में मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए रानी सराय के 150 से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इसकी मंजूरी दे दी है। हालांकि कोर्ट ने पेड़ काटने को लेकर कुछ शर्तें भी लगाई हैं। इन पेड़ों पर सालों से बड़ी संख्या में तोते रहते हैं। अब पेड़ कटने से इन पक्षियों का बसेरा उजड़ जाएगा।
आपको बता दें कि रीगल चौराहे के पास एसपी कार्यालय परिसर में रानी सराय स्थित है। यहां पेड़ों को बचाने के लिए पर्यावरणविद लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे थे। प्रियांश जैन ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद भालू मोंढे भी इस मामले में पक्षकार बने थे। सुनवाई के दौरान पेड़ों को बचाने के लिए कई तर्क दिए गए।
हालांकि हाईकोर्ट ने पुराने फैसले और दूसरा विकल्प नहीं होने की बात कही। इसके बाद कुछ शर्तों के साथ पेड़ काटने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला सभी के लिए दुखद है। खासकर पक्षी प्रेमियों को इससे दुख होगा। लेकिन मौजूदा हालात में पक्षियों के हितों की रक्षा के लिए यही सबसे बेहतर उपाय है।
हरे
रानी सराय शहर के मध्य में घना हरियाली वाला इकलौता एरिया है। यहां पर हजारों तोतों और पक्षियों का आवास बना हुआ है। मेट्रो स्टेशन के लिए इन पेड़ों को काटा जाएगा, जिससे इन पक्षियों का आवास उजड़ जाएगा। इसी को लेकर यह याचिका लगी थी। इसमें मांग थी कि मेट्रो स्टेशन के लिए जो अन्य विकल्प हैं उन पर काम होना चाहिए। साथ ही, रूट बदला जाना चाहिए।
इस पर मेट्रो रेल कंपनी प्रबंधन की ओर से बताया गया कि मेट्रो का रूट पहले से ही मंजूर है। दिल्ली स्थित मुख्यालय से भी स्वीकृत है। अन्य जगह जो विकल्प रीगल टॉकीज, प्रीतम लाल दुआ सभागृह व हाथी हाल बताए गए हैं वह उपयुक्त नहीं हैं। वहीं काटे गए पेड़ों की जगह पर ढाई हजार पेड़ लगाए जाएंगे और वहां यह पक्षी आवास बना लेंगे। जो पक्षी अभी रानी सराय परिसर में बसेरा करने आते हैं, वे निश्चित रूप से आसपास के क्षेत्रों में कहीं और अपना ठिकाना ढूंढ लेंगे।
हाईकोर्ट की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया था। जज खुद भी मौके पर जाकर हालात देख चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर पक्षी शाम को यहां आराम करने आते हैं। वे रात भी इन्हीं पेड़ों पर बिताते हैं। बहुत कम पक्षियों ने यहां अपने घोंसले बनाए हैं। पेड़ कटने के बाद पक्षियों के पास रात बिताने की जगह नहीं बचेगी। कोर्ट ने कहा कि हम भी ऐसा नहीं चाहते हैं। हालांकि मेट्रो के रूट को लेकर दूसरी याचिका में पहले ही फैसला हो चुका है। ऐसे में अब उस फैसले में दखल नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने पेड़ काटने को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मेट्रो प्रबंधन और दूसरे पक्षकारों से कहा कि सभी पेड़ एक साथ नहीं काटे जाएं। मनमाने तरीके से पेड़ काटने की भी अनुमति नहीं होगी। यह काम कम से कम दो पक्षी विशेषज्ञों की निगरानी में करना होगा।
पक्षी विशेषज्ञ ही बताएंगे कि पेड़ कब और कैसे काटे जाएं। पेड़ों की शाखाओं की छंटाई भी धीरे-धीरे करनी होगी। इसके लिए एक तय समय और तरीका अपनाना होगा। कोर्ट का कहना है कि ऐसा करने से पक्षियों को दूसरी जगह जाने का मौका मिलेगा। वे आसपास के दूसरे पेड़ों पर अपना बसेरा बना सकेंगे।
कोर्ट ने पक्षियों के घोंसलों और अंडों की सुरक्षा के भी निर्देश दिए हैं। पेड़ों की छंटाई के दौरान छोटे पक्षियों का भी ध्यान रखना होगा। मौके पर वन्यजीव बचाव दल की टीम मौजूद रहेगी। टीम के पास जाल और मेडिकल किट भी होनी चाहिए। इससे किसी पक्षी के घायल होने या चूजे के नीचे गिरने पर तुरंत मदद मिल सकेगी।
इसके अलावा कोर्ट ने 2500 नए पेड़ लगाने का वादा पूरा करने के निर्देश दिए हैं। हर साल अप्रैल में इन पेड़ों की स्थिति की रिपोर्ट देनी होगी। पेड़ों की गूगल इमेजेस भी हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करानी होंगी। इससे पता चल सकेगा कि लगाए गए पेड़ों की हालत कैसी है।
हालांकि हाईकोर्ट ने पुराने फैसले और दूसरा विकल्प नहीं होने की बात कही। इसके बाद कुछ शर्तों के साथ पेड़ काटने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला सभी के लिए दुखद है। खासकर पक्षी प्रेमियों को इससे दुख होगा। लेकिन मौजूदा हालात में पक्षियों के हितों की रक्षा के लिए यही सबसे बेहतर उपाय है।
हरे तोतों का आवास होगा खत्म
मेट्रो कंपनी ने यह दिया तर्क
हाईकोर्ट बेंच ने भी देखी थी जगह, यह कहा
हाईकोर्ट ने दिए इस तरह सतर्कता बरतने के निर्देश
पक्षी विशेषज्ञ ही बताएंगे कि पेड़ कब और कैसे काटे जाएं। पेड़ों की शाखाओं की छंटाई भी धीरे-धीरे करनी होगी। इसके लिए एक तय समय और तरीका अपनाना होगा। कोर्ट का कहना है कि ऐसा करने से पक्षियों को दूसरी जगह जाने का मौका मिलेगा। वे आसपास के दूसरे पेड़ों पर अपना बसेरा बना सकेंगे।
कोर्ट ने पक्षियों के घोंसलों और अंडों की सुरक्षा के भी निर्देश दिए हैं। पेड़ों की छंटाई के दौरान छोटे पक्षियों का भी ध्यान रखना होगा। मौके पर वन्यजीव बचाव दल की टीम मौजूद रहेगी। टीम के पास जाल और मेडिकल किट भी होनी चाहिए। इससे किसी पक्षी के घायल होने या चूजे के नीचे गिरने पर तुरंत मदद मिल सकेगी।
इसके अलावा कोर्ट ने 2500 नए पेड़ लगाने का वादा पूरा करने के निर्देश दिए हैं। हर साल अप्रैल में इन पेड़ों की स्थिति की रिपोर्ट देनी होगी। पेड़ों की गूगल इमेजेस भी हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करानी होंगी। इससे पता चल सकेगा कि लगाए गए पेड़ों की हालत कैसी है।
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