समग्र शिक्षा के टेंडर में बड़े कारोबारियों के लिए खोले दरवाजे, छत्तीसगढ़ के छोटे उद्योग आउट, MSME को कोई छूट नहीं

Arun Tiwari | Apr 27, 2026, 15:10 IST
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छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा के तहत जारी किए गए एक टेंडर पर विवाद उभर आया है। टेंडर की शर्तें छोटे उद्योगों और एमएसएमई के लिए अनुकूल नहीं हैं, और आरोप है कि इसमें बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तें बनाई गई हैं।

Raipur. छत्तीसगढ़ में टेंडर को लेकर आए दिन विवाद सामने आते रहते हैं। कई बार टेंडर रद्द भी किए गए हैं। अब एक और टेंडर है जिस पर विवाद शुरु हो गया है। समग्र शिक्षा के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने टेंडर निकाला है। पहली बात तो विवाद की यही है कि यह टेंडर आधी रात को निकाला गया। इसके अलावा इस टेंडर में छत्तीसगढ़ के छोटे उद्योगों को आउट कर दिया गया है।

यानी एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए इसमें न तो अनुभव और न ही टर्नओवर में कोई छूट दी गई है। आरोप ये है कि कुर्सी टेबल के इस टेंडर में बड़े कारोबारियों के लिए दरवाजे खोले गए हैं। अब एमएसएमई से जुड़े लोग इसकी शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से कर इसको रद्द करने की मांग करने जा रहे हैं।

समग्र शिक्षा टेंडर पर विवाद:

छत्तीसगढ़ में सरकारी टेंडरों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के तहत जारी किए गए टेंडर से जुड़ा है। जिसने एक बार फिर पारदर्शिता और स्थानीय उद्योगों के हितों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इस टेंडर की शर्तें ऐसी बनाई गई हैं जिससे बड़े कारोबारियों को सीधा फायदा मिले जबकि राज्य के छोटे उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्टअप को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।

सरकार की भंडार क्रय नीति यह कहती है कि सरकारी खरीदी में स्थानीय उद्योगों यानी एमएसएमई और स्टार्टअप को ज्यादा से ज्यादा मौका मिलना चाहिए ताकि राज्य के छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। लेकिन इस टेंडर में सरकारी नियमों की अनदेखी की गई है। आरोप है कि बड़े कारोबारियों को फायदा दिलाने के लिए यह नियम बनाए गए हैं।

ये है समग्र शिक्षा का टेंडर :

. जैम पोर्टल पर समग्र शिक्षा का टेंडर निकाला गया है।
. मार्च में निकाले गए इस टेंडर के खुलने तारीख 29 अप्रैल दी गई है।
. स्कूल शिक्षा विभाग ने यह टेंडर निकाला है।
. यह खरीदी की जानी है : कंपोजिट ऑफिस टेबल, मेटल रैक्स,क्लासरुम स्टूल, ऑफिस चेयर
. कितनी खरीदी करनी है : 38780

ये हैं टेंडर में शर्तें :
. बिडर का न्यूनतम वार्षिक टर्नओवर - 4 करोड़ 50 लाख सालाना
. इससे जुड़ा अनुभव - 3 साल
. एमएसएमई के लिए टर्नओवर और अनुभव में छूट - नहीं
. स्टार्टअप के लिए टर्नओवर और अनुभव में छूट - नहीं

यह है विवाद :

टेंडर में रखी गई शर्तों ने विवाद को और गहरा कर दिया है। इसमें अनुभव और टर्नओवर को लेकर जो मानक तय किए गए हैं वे प्रदेश के अधिकांश छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) पात्रता पूरी नहीं कर पा रहे हैं। खास बात यह है कि आमतौर पर केंद्र और राज्य सरकारें एमएसएमई और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए इन शर्तों में छूट देती हैं लेकिन इस टेंडर में ऐसी कोई राहत नहीं दी गई है।

यह टेंडर स्कूलों के लिए फर्नीचर जैसे कुर्सी और टेबल की सप्लाई से जुड़ा हुआ है। स्थानीय उद्योगों का कहना है कि यह ऐसा काम है जिसे प्रदेश के छोटे निर्माता आसानी से कर सकते हैं। इसके बावजूद उन्हें बाहर कर देना यह संकेत देता है कि टेंडर की शर्तें जानबूझकर बड़े सप्लायर्स के पक्ष में बनाई गई हैं।

सरकारी भंडार क्रय नियमों में भी यह कहा गया है कि स्थानीय छोटे उद्योगों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देना है। फर्नीचर भी बल्क में नहीं बल्कि अलग-अलग केटेगरी में है, इसलिए छोटे उद्योग इसे पूरा करने में सक्षम हैं। नियमों में एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए सालाना टर्नओवर और अनुभव में पूरी तरह छूट दी गई है।

इतने फर्नीचर की खरीदी :
टेबल - 5540
मेटल रैक्स - 5540
क्लासरुम स्टूल - 6620
चेयर - 11080

टेंडर को लेकर उठे सवाल :

इस टेंडर में साफ लिखा है कि बिड स्टार्ट डेट 27 मार्च 2026 11 बजकर 52 मिनट है जबिक इसकी आखिरी तारीख 4 मई 2026 को दोपहर 1 बजे तक है। यानी ये टेंडर 27 मार्च को रात 11 बजकर 52 मिनट को जैम पोर्टल में कॉल किया गया। जब इसके लिए निविदाकारों को 38 दिन का समय दिया गया तो फिर आधी रात को टेंडर कॉल क्यों किया गया। क्या आधी रात तक स्कूल एजुकेशन का दफ्तर इस टेंडर के लिए खोला गया।

क्या सक्षम अधिकारियों की अनुमति से यह दफ्तर खोला गया। यदि सरकारी दफ्तर नहीं खोला गया तो क्या ये किसी निजी फर्म या ठेकेदार के घर से या ऑफिस से इस टेंडर को जैम पोर्टल पर देने का काम किया गया। क्या यह किसी खास को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया। सवाल यह भी है कि स्कूल शिक्षा विभाग के इतने कर्तव्यनिष्ठ वे कौन लोग हैं जो आधी रात तक इस तरह का काम करते हैं।

एमएसएमई संगठनों की आपत्ति :

एमएसएमई से जुड़े संगठनों और उद्यमियों में इसको लेकर भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी नीतियों के विपरीत यह कदम है। उनका कहना है कि यदि स्थानीय उद्योगों को ही अवसर नहीं मिलेगा, तो राज्य में रोजगार और आर्थिक विकास कैसे बढ़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक एमएसएमई से जुड़े प्रतिनिधि जल्द ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर इस टेंडर को रद्द करने की मांग करने वाले हैं। उनका कहना है कि या तो टेंडर की शर्तों में संशोधन किया जाए या फिर इसे पूरी तरह से निरस्त कर नए सिरे से पारदर्शी प्रक्रिया के तहत जारी किया जाए।

इस पूरे मामले में विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह टेंडर कुछ चुनिंदा बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सवालों के घेरे में जैम से खरीदारी :

छत्तीसगढ़ में जैम (gem portal) से खरीदारी वैसे भी कई बार सवालों के घेरे में रही है। कई बार इस तरह की खरीदी को निरस्त कर जांच भी बैठाई गई।

.आदिवासी विकास विभाग द्वारा स्टील का एक जग 32,000 रुपए में खरीदा गया, जबकि बाजार में इसकी सामान्य कीमत 400 से 1000 के बीच होती है।

. जग की सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट श्रीराम सेल्स को मिला, जिसके पते पर पड़ताल में ऐसी कोई एजेंसी नहीं मिली और दिया गया मोबाइल नंबर किराए की दुकान चलाने वाले का निकला।

. उच्च शिक्षा विभाग में महासमुंद के कॉलेज में खरीदी में करीब 1.06 करोड़ रूपए की अनियमितता का मामला सामने आया ।

. सरगुजा में अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग द्वारा 1 लाख से अधिक की दर पर टीवी खरीदी गई।

. स्वास्थ्य विभाग में 104 दवाओं की खरीदी में 75 करोड़ रूपए के कथित महंगे सौदे पर विवाद चल रहा है, जहाँ सीजीएमएससी ने जेम से खरीदी को महंगा बताया है।

निष्कर्ष :

विशेषज्ञों का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। टेंडर जारी करने का समय भी सामान्य कार्यावधि के भीतर होना चाहिए, ताकि किसी तरह की शंका न रहे। तकनीकी रूप से ई-टेंडरिंग सिस्टम 24 घंटे काम करता है। लेकिन संवेदनशील मामलों में समय का चयन भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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