शांतिलाल को हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
VINAY VERMA | Jun 09, 2026, 20:20 IST
छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा चिकित्सा घोटाला
छत्तीसगढ़ के सीजीएमएससी रिएजेंट और हमर लैब घोटाले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के शांतिलाल चोपड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिली। टेंडर प्रक्रिया में मिलीभगत और अधिक कीमत पर खरीद से 550 करोड़ का नुकसान हुआ। कई आरोपी गिरफ्तार और कुछ जमानत पर हैं।
Raipur। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सीजीएमएससी रिएजेंट और हमर लैब घोटाले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मोक्षित कॉर्पोरेशन से जुड़े कारोबारी शांतिलाल चोपड़ा की अग्रिम जमानत को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है।
मामले में राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सौरभ पांडेय के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट से तत्काल अग्रिम राहत नहीं मिली है और शांतिलाल चोपड़ा को निर्धारित अवधि के भीतर जांच एजेंसियों के सामने समर्पण कर नियमित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश के सबसे चर्चित चिकित्सा खरीद घोटालों में शामिल सीजीएमएससी रिएजेंट मामले में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर टिक गई है। दूसरी ओर, इस बहुचर्चित मामले में अब तक करीब दस प्रमुख गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, कई आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं और जांच अभी भी जारी है।
पूरा मामला सीजीएमएससी (CGMSC) के माध्यम से सरकारी अस्पतालों और हमर लैब योजना के लिए रिएजेंट, मेडिकल उपकरण और अन्य सामग्री की खरीद से जुड़ा है। एसीबी और ईओडब्ल्यू का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कथित मिलीभगत कर कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और बाजार मूल्य से अधिक दरों पर सामग्री की खरीद की गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार इससे सरकारी खजाने को लगभग 550 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि टेंडर की शर्तों से लेकर सप्लाई और भुगतान तक पूरे सिस्टम में कथित तौर पर एक योजनाबद्ध नेटवर्क (नेक्सस) सक्रिय था, जो सरकारी कामकाज को प्रभावित कर रहा था।
इस मामले में असली तेजी तब आई जब जनवरी 2025 में एसीबी (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) ने एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू की। इसके बाद कार्रवाई करते हुए एक के बाद एक कई गिरफ्तारियां की गईं। जांच आगे बढ़ी तो सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इसके घेरे में आ गईं।
जांच एजेंसियों का साफ दावा है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ थी, जिसके दम पर सरकारी खरीदी के नियमों को ताक पर रखकर पूरे प्रोसेस को प्रभावित किया गया था।
इस मामले में एसीबी/ईओडब्ल्यू और ईडी की कार्रवाई में अब तक कई प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें शशांक चोपड़ा, बसंत कुमार कौशिक, छिरोद रौतिया, कमलकांत पाटनवार, डॉ.अनिल परसाई, दीपक कुमार बांधे, अभिषेक कौशल, राकेश जैन, प्रिंस जैन और कुंजल शर्मा शामिल है।
इसके अलावा जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा रहा है। पूरे मामले में गिरफ्तार कई आरोपी विभिन्न अदालतों से जमानत प्राप्त कर चुके हैं।
शशांक चोपड़ा को मूल एसीबी मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली, जबकि ईडी के पीएमएलए मामले में भी बाद में उन्हें जमानत मिल गई। अन्य कई आरोपियों को भी न्यायालयों से राहत मिल चुकी है। हालांकि जांच समाप्त नहीं हुई है और आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल के बाद ही होगा।
मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर के रूप में शांतिलाल चोपड़ा का नाम जांच के दौरान सामने आया। उनकी अग्रिम जमानत को लेकर पहले हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई चली।
अब मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सौरभ पांडेय के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट से तत्काल अग्रिम राहत नहीं मिली है
और शांतिलाल चोपड़ा को निर्धारित अवधि के भीतर समर्पण कर नियमित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। इस घटनाक्रम के बाद माना जा रहा है कि जांच एजेंसियों की अगली रणनीति और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
एसीबी की जांच के बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की। एजेंसी का आरोप है कि कथित अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल विभिन्न निवेशों और संपत्तियों में किया गया। जांच के दौरान कई बैंक खाते, निवेश और लग्जरी वाहन जब्त किए गए। जांच के दौरान एसीबी/ईओडब्ल्यू ने पूरक चार्जशीट दाखिल कर नए आरोपियों को भी शामिल किया।
2022-हमर लैब योजना के लिए रिएजेंट और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया शुरू
जनवरी 2025- ACB/EOW ने FIR दर्ज की।
जनवरी 2025-शशांक चोपड़ा सहित पहली बड़ी गिरफ्तारियां।
अप्रैल 2025-पहली चार्जशीट दाखिल।
2025- ED ने PMLA के तहत जांच शुरू की।
जनवरी 2026-ED ने शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया।
2026- पूरक चार्जशीट में नए आरोपी जोड़े गए।
करीब डेढ़ साल से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना यह मामला अभी अपने अंतिम पड़ाव से काफी दूर है। एसीबी/ईओडब्ल्यू और ईडी दोनों की जांच जारी है।
कई आरोपी जमानत पर बाहर हैं, जबकि जांच एजेंसियां पूरे कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। इतना तय है कि रिएजेंट घोटाले की फाइल अभी बंद नहीं हुई है। अदालतों में चल रही कानूनी लड़ाई और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई आने वाले दिनों में इस मामले की नई दिशा तय करेगी।
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मामले में राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सौरभ पांडेय के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट से तत्काल अग्रिम राहत नहीं मिली है और शांतिलाल चोपड़ा को निर्धारित अवधि के भीतर जांच एजेंसियों के सामने समर्पण कर नियमित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश के सबसे चर्चित चिकित्सा खरीद घोटालों में शामिल सीजीएमएससी रिएजेंट मामले में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर टिक गई है। दूसरी ओर, इस बहुचर्चित मामले में अब तक करीब दस प्रमुख गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, कई आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं और जांच अभी भी जारी है।
क्या है पूरा 550 करोड़ का कथित घोटाला
जांच एजेंसियों के अनुसार इससे सरकारी खजाने को लगभग 550 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि टेंडर की शर्तों से लेकर सप्लाई और भुगतान तक पूरे सिस्टम में कथित तौर पर एक योजनाबद्ध नेटवर्क (नेक्सस) सक्रिय था, जो सरकारी कामकाज को प्रभावित कर रहा था।
इस मामले में असली तेजी तब आई जब जनवरी 2025 में एसीबी (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) ने एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू की। इसके बाद कार्रवाई करते हुए एक के बाद एक कई गिरफ्तारियां की गईं। जांच आगे बढ़ी तो सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इसके घेरे में आ गईं।
जांच एजेंसियों का साफ दावा है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ थी, जिसके दम पर सरकारी खरीदी के नियमों को ताक पर रखकर पूरे प्रोसेस को प्रभावित किया गया था।
अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुए
इसके अलावा जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा रहा है। पूरे मामले में गिरफ्तार कई आरोपी विभिन्न अदालतों से जमानत प्राप्त कर चुके हैं।
शशांक चोपड़ा को मूल एसीबी मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली, जबकि ईडी के पीएमएलए मामले में भी बाद में उन्हें जमानत मिल गई। अन्य कई आरोपियों को भी न्यायालयों से राहत मिल चुकी है। हालांकि जांच समाप्त नहीं हुई है और आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल के बाद ही होगा।
अब शांतिलाल चोपड़ा पर क्यों टिकी हैं नजरें
अब मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सौरभ पांडेय के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट से तत्काल अग्रिम राहत नहीं मिली है
और शांतिलाल चोपड़ा को निर्धारित अवधि के भीतर समर्पण कर नियमित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। इस घटनाक्रम के बाद माना जा रहा है कि जांच एजेंसियों की अगली रणनीति और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ईडी की एंट्री ने बढ़ाई मुश्किलें
पूरे मामले की टाइमलाइन
जनवरी 2025- ACB/EOW ने FIR दर्ज की।
जनवरी 2025-शशांक चोपड़ा सहित पहली बड़ी गिरफ्तारियां।
अप्रैल 2025-पहली चार्जशीट दाखिल।
2025- ED ने PMLA के तहत जांच शुरू की।
जनवरी 2026-ED ने शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया।
2026- पूरक चार्जशीट में नए आरोपी जोड़े गए।
अब आगे क्या
कई आरोपी जमानत पर बाहर हैं, जबकि जांच एजेंसियां पूरे कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। इतना तय है कि रिएजेंट घोटाले की फाइल अभी बंद नहीं हुई है। अदालतों में चल रही कानूनी लड़ाई और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई आने वाले दिनों में इस मामले की नई दिशा तय करेगी।
FAQ
- शांतिलाल चोपड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत क्यों नहीं मिली?
उन्हें कोर्ट ने तत्काल राहत नहीं दी। निर्धारित अवधि में उन्हें जांच एजेंसियों के सामने समर्पण करना होगा। - इस घोटाले में कितना वित्तीय नुकसान हुआ?
टेंडर में मिलीभगत और अधिक दरों पर खरीद से सरकारी खजाने को लगभग 550 करोड़ का नुकसान हुआ। - अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार या जमानत पर हैं?
कई प्रमुख लोग गिरफ्तार हैं, जिनमें शशांक चोपड़ा शामिल हैं, जबकि कुछ अन्य आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
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