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रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा से एक बड़ी खबर सामने आई है। इस खबर ने माओवादी संगठन की अंदरूनी हालत उजागर कर दी है। एक महिला सदस्य समेत कुल 22 सक्रिय माओवादियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। ये वे लोग थे जो लंबे समय से जंगलों में संगठन के लिए काम कर रहे थे। साथ ही स्थानीय नेटवर्क को मजबूत करने में जुटे थे। अब हालात बदल रहे हैं। कभी जंगलों में अपनी ताकत दिखाने वाले अब खुद रास्ता तलाश रहे हैं।
आंकड़े बता रहे- लाल अभियान कमजोर पड़ रहा है
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले दो सालों में छत्तीसगढ़ में लगभग 2700 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सिर्फ बस्तर संभाग में ही सैकड़ों कैडर मुख्यधारा में लौटे हैं। कई ऐसे भी रहे जिन पर लाखों रुपए का इनाम घोषित था।
इस वर्ष की शुरुआत से ही लगभग 300 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। लगातार बढ़ती यह संख्या संकेत दे रही है कि संगठन के भीतर भरोसा और मनोबल दोनों टूट रहे हैं।
सुरक्षा बलों की रणनीति: दबाव भी, भरोसा भी
इस ताजा सफलता के पीछे जिला रिजर्व गार्ड, जिला बल और सीआरपीएफ की संयुक्त रणनीति अहम रही। सर्च ऑपरेशन, अंदरूनी इलाकों में कैंपों की स्थापना और संवाद अभियान ने माओवादी ढांचे को सीमित कर दिया है। जिन इलाकों में पहले सुरक्षाबलों की आवाजाही मुश्किल थी, वहां अब नियमित गश्त और प्रशासनिक गतिविधियां दिख रही हैं।
सीमा पर साजिश बेनकाब
सुकमा-बीजापुर सीमा पर तालपेरू नदी के पास सर्च ऑपरेशन हुआ था। इस दौरान 10 किलो एंटी-हैंडलिंग IED और अन्य सामग्री बरामद की गई थी। समय रहते कार्रवाई होने से संभावित बड़ा हमला टल गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार IED बरामदगी यह दिखाती है कि संगठन सक्रिय तो है। बस उसकी योजनाएं बार-बार नाकाम हो रही हैं।
जंगल से जनजीवन की ओर बढ़ते कदम
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने एक बड़ी बात बताई। कह कि पुनर्वास नीति, विकास कार्यों और सुरक्षा के बढ़ते दायरे ने उन्हें हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित किया। सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से स्थानीय समर्थन भी कमजोर पड़ा है। प्रशासन का दावा है कि भरोसे और पुनर्वास की नीति आगे भी जारी रहेगी। इससे और लोग मुख्यधारा में लौट सकें।
संकेत साफ हैं
सुकमा में 22 माओवादियों का आत्मसमर्पण सिर्फ एक घटना नहीं है। यह उस बदलते समीकरण का संकेत है जिसमें जंगल की बंदूकें अब धीरे-धीरे शांत हो रही हैं। साथ ही मुख्यधारा की ओर कदम बढ़ रहे हैं।
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